लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों के मौत का आंकड़ा अभी भी मौजूद नहीं- संतोष कुमार गंगवार

रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने दिया लिखित जवाब 

इस बुधवार को सरकार ने राज्यसभा को सूचित किया कि मार्च वर्ष 2020 में लॉकडाउन की घोषणा के बाद से हुई प्रवासी श्रमिकों की मौतों की संख्या के आंकड़े को अभी भी राज्यों से एकत्र किए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक़ शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी और कांग्रेस सांसद फूलो देवी नेताम के एक सवाल के जवाब में श्रम और रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने एक लिखित जवाब दिया है।

सांसद गंगवार

शेष राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों से जानकारी एकत्र करना जारी

मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने लिखित जवाब में कहा कि राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त हुए जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र में 17 श्रमिकों की आकस्मिक मौतों को छोड़कर,असम,अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, मेघालय, हिमाचल प्रदेश,पंजाब, केरल, नागालैंड, मणिपुर और अंडमान और निकोबार द्वीप से प्रवासी श्रमिकों के जीवन जाने की कोई रिपोर्ट नहीं प्राप्त हुई है। 

बता दें कि श्रम और रोजगार मंत्री ने पिछले साल मार्च से सितंबर के बीच राष्ट्रीय तालाबंदी के दौरान और बाद में मरने वाले प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों की संख्या को प्राप्त कर बताया कि शेष राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों से अभी भी जानकारी एकत्र की जा रही है और इसे सदन के पटल पर रखा जाएगा।


और पढ़ें :पंचायत विभाग के अफसरों ने गड्ढे में बना दिया 6 करोड़ का आवास


गंगवार ने कहा कि सरकार द्वारा देश में रोजगार पैदा करने के लिए उठाए गए कई कदम
सांसद गंगवार

मंत्री ने कहा कि सरकार ने देश में रोजगार पैदा करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उपायों में निवेश से जुड़ी विभिन्न परियोजनाएं और विभिन्न योजनाओं पर सार्वजनिक व्यय बढ़ाना भी शामिल है। साथ ही कहा कि संगठित क्षेत्र में 10 करोड़ और असंगठित क्षेत्र में 40 करोड़ मजदूर हैं एवं सरकार असंगठित क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को संगठित क्षेत्र में स्थानांतरित करने के लिए प्रयास कर रही है और कार्यक्रम चला रही है। पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने कहा कि रोज़गार में सुधार के साथ युग्मित रोज़गार सृजन सरकार की प्राथमिकता है।

निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता ज़रूरी है

आपके लिए डेमोक्रेटिक चरखा आपके लिए ऐसी ग्राउंड रिपोर्ट्स पब्लिश करता है जिससे आपको फ़र्क पड़ता है
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.