संविधान दिवस विशेष: क्या आज के समय में हमारा संविधान सुरक्षित है?

संविधान के मुख्य निर्माता और पिता कहे जाने वाले  डॉ. भीमराव आंबेडकर को ने एक बात कही थी, उन्होंने कहा था

धर्म में भक्ति एक आत्मा के उद्धार के लिए एक रास्ता हो सकती है लेकिन राजनीति में भक्ति या नायक की पूजा क्षरण और अंतत तानाशाही के लिए एक निश्चित रास्ता है।

भीमराव अंबेडकर की चेतावनी हमे आज याद आती है क्योंकि उनकी कही बात आज सच साबित हो रही है, पिछले कुछ सालों में हमने लोकतंत्र की आत्मा कहे जाने वाली संविधान में कुछ  ऐसे संशोधन किया और कुछ ऐसे मामले सामने आए जिसकी वजह से लोगो के मन में ये बात आई कि सरकार संविधान के आड़ में संविधान का हनन कर रही है।

आइए जानते है पिछले कुछ महीनों में हुए कुछ ऐसे मामले जिसे लोगो के मन में संविधान को लेकर विश्वास कम हुआ है

मौजूदा दौर में संवैधानिक व्याख्या आज का समय संवैधानिक व्याख्या के विकास का चौथा चरण कहा जाता है। लेकिन कुछ मामले जैसे CAA, लव जिहाद पर कानून लाने की बात, राम मंदिर के फैसले में राजनीति को ज़्यादा महत्व देना, तेलुगू कवि और सामाजिक कार्यकर्ता  वरवरा राव और सुधा भारद्वाज  की तबियत अत्याधिक ख़राब होने  के बावजूद उन्हें बेल ना देना, जबकि अरनब गोस्वामी जिनपर कई गंभीर आरोप होने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट से बेल मिल जाने की बात लोगो में में ने काफी सवाल खड़ी करती है।


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धर्म के आधार पर भेदभाव का कानून CAA

भारत के संविधान के आर्टिकल 14 के मुताबिक राज्य किसी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता या भारत के क्षेत्र के भीतर कानूनों के समान संरक्षण से इनकार नहीं करेगा। लेकिन, कई लोगो ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसके द्वारा पारित  नागरिकता  संशोधन कानून 2019  आर्टिकल 14 का सीधा उल्लंघन करती है।

इस  बिल  के प्रावधान के मुताबिक हिंदू, बौद्ध, जैन, ईसाई, पारसी और सिखों को, जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत में शरण लेने आए हैं उन्हें नागरिकता प्रदान की जाएगी लेकिन यह कानून सिर्फ मुसलमानों के साथ हीं नहीं बल्कि दलित, आदिवासी आदि के साथ अन्याय करता है।

वरवरा राव के मौलिक अधिकार का हनन

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में हिरासत में बंद 81 वर्षीय  वरवरा राव की पत्नी ने उनके  गिरते  स्वास्थ्य के आधार पर SC में ज़मानत याचिका डाली थी लेकिन उन्हें जमानत नहीं दी गई। उनकी  की  पत्नी ने   दावा किया कि है कि इतने दिनों तक वरवरा राव को  निरंतर हिरासत में रखना क्रूरता और अमानवीय है। और इससे  संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और हिरासत में उनकी गरिमा का उल्लंघन होता है, लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

प्यार पर सरकारी पहरा लगाने की तैयारी

मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि, अंतर्जातीय विवाह पर सख्त कानून लाया जाए। हमारा संविधान वयस्क होने पर अपनी मर्ज़ी से विवाह की अनुमति देता है, लेकिन अब सरकार इस पर भी पहरा लगाने जा रही है।

इसके अलावा हमने यह यह भी देखा है कि सत्तारुढ़ सरकार की तरफ़दारी करने के कारण संविधान को ताक पर रख कर फैसले दिए जा रहे है और अब न्यायपालिका भी इससे अछूता नहीं रहा है।

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