स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास गांव को ईको सेंसेटिव ज़ोन में शामिल की योजना, गांवालों ने कहा उनकी सहमति के बिना ही उठाया गया कदम

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास के गांव को ईको सेंसेटिव ज़ोन में शामिल करने की योजना

यह बात गुजरात के नर्मदा ज़िले के केवडिया में स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल की दुनिया में सबसे ऊंची प्रतिमा के आसपास क्षेत्रों की है।जहां नर्मदा नदी के किनारे पर बसे गांव जोखिम में है। हम आपको बता दें कि गोरा गांव के सरपंच ने बताया कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास स्थित एक अभयारण्य के आसपास के 121 गांवों को ईको सेंसेटिव ज़ोन में शामिल करने की योजना है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (फोटो: पीटीआई)

गांववाले सरकार को उनकी जमीनों का सहमालिक बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी सहमति के बिना ही स्थानीय प्रशासन की ओर से यह कदम उठाया गया है।बता दें कि जिला प्रशासन ने भूमि रिकॉर्ड में राज्य सरकार को बतौर दूसरे भूस्वामी के तौर पर शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


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अधिसूचना के जारी होने के बाद गांव में विरोध

पहले ही हम आपको बता दें कि सात नवंबर को जारी अधिसूचना में गरुड़ेश्वर मामलातदार  ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास स्थित पूरे गोरा गांव और शूलपनेश्वर अभयारण्य को ईको सेंसेटिव जोन में शामिल किया और राज्य सरकार को सहधारक के तौर पर जोड़ा है।अधिसूचना के जारी होने के बाद ग्रामीणों का कहना है कि गोरा पंचायत कार्यालय पर सात नवंबर यानी शनिवार की शाम को यह अधिसूचना लगाई गई थी और अगले दिन रविवार होने के कारण से भूमालिकों को तुरंत इस पर आपत्ति नहीं उठाने दी गई।

स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' के पास हमारी जमीन छीन रही है #BJP सरकार : आदिवासी - gujarat tribals claimed bjp govt taking their lands near statue of unity memorial of sardar patel

गोरा गांव के सरपंच शांति तड़वी ने कहा हमने अपना आपत्ति-पत्र राज्य सरकार जो कि हमारी जमीनों की सहमालिक भी है उसे सौंप दिया है। हम लगभग 120 लोग हैं जो जमीनों के मालिक हैं और प्रशासन ने यह फैसला हमारी सहमति के बिना लिया है साथ ही कहा यह फैसला बिना किसी पूर्व चेतावनी के एक आश्चर्य के तौर पर सामने आया।साथ ही तड़वी ने प्रश्न उठाया कि हमें अब अपनी ही जमीनों पर कुछ करने के लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी। वे कहते हैं कि वे इसे हमसे बचाना चाहते हैं लेकिन हम मूल मालिक हैं हमसे बेहतर इसकी रक्षा कौन कर सकता है।

Gujrat State government ready to give land to displaced Statue of Unity

रिपोर्ट के अनुसार गोरा गांव में(एसएसएनएनएल) सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड ने छह गांवों- लिंबड़ी, केवड़िया, वागड़िया, नवगाम, कोठी और गोरा के लोगों के आदर्श वासहट के लिए उनका पुनर्वास करने का फैसला किया है।ये लोग नर्मदा बांध के लिए 1961 में अपनी 16 हेक्टेयर जमीनों के अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं।एसएसएनएनएल ने नर्मदा नदी के दोनों किनारों को जोड़ने के लिए रोपवे के लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं जो नर्मदा बांध की 1.2 किलोमीटर लंबाई में हैं ताकि केवड़िया जाने वाले पर्यटक मिनटों में नदी के दूसरी तरफ संबद्ध परियोजनाओं तक पहुंच सके। बता दें गोरा गांव से होते हुए नदी के किनारे की यात्रा में तकरीबन 30 मिनट लगते हैं।

आदिवासियों के स्वामित्व वाली कृषि भूमि के जबरन छीनने का आरोप

अधिक जानकारी के तौर पर बता दें कि अपर कलेक्टर एचके व्यास ने कहा पूरी प्रक्रिया को वन विभाग की ओर से लागू किया गया है। जमीन के स्वामित्व या मालिकाना हक में जिला प्रशासन की कोई भूमिका नहीं है। बीते सितंबर महीने में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास के 14 गांवों के सैकड़ों आदिवासियों ने क्षेत्र के विकास के नाम पर गुजरात सरकार द्वारा किए जाने वाले उनकी भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ प्रदर्शन किया था।इनका आरोप था कि विकास परियोजनाओं के नाम पर राज्य सरकार आदिवासियों के स्वामित्व वाली कृषि भूमि को जबरन छीन रही है जो उनकी आजीविका का आधार है।

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