सिंधु बॉर्डर पर आंदोलनकारी किसानों के त्वरित राहत के लिए बनाया गया मिनी अस्पताल

सिंधु बॉर्डर पर बनाया गया मिनी अस्पताल

सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि क़ानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन सिंधु बॉर्डर में जोरों शोरों से जारी है एवं इस दौरान तुरंत अस्पताल न मिलने के कारण कई किसानों की मौत भी हुई है। बदलते मौसम और दिल्ली की बढ़ती सर्दियों के कारण कई प्रदर्शनकारियों के बीमार पड़ने की खबर सामने आई है।

सिंधु बॉर्डर अस्पताल

दरअसल बोर्डर पर बहुत सारे बूढ़े और महिलाएँ हैं जिन्हें मधुमेह, रक्तचाप और गैस्ट्रिक जैसी समस्याएं हैं। बता दें कि मौसम की मार सबसे ज्यादा विशेष रूप से बुज़ुर्ग झेल रहे हैं। अब इन्हीं मामलों को ध्यान में रखते हुए मुख्य चरण के पास मुख्य बुजुर्गों और हृदय रोगियों पर नज़र रखने के लिए सिंधु बोर्डर में एक अस्थायी चार-बेड वाला एक मिनी अस्पताल तैयार किया गया है।

सिंधु बॉर्डर में 24-घंटे आपातकालीन अस्पताल की हुई स्थापना

सिंधु बॉर्डर अस्पताल

पंजाब के डेरा बस्सी के एक एनजीओ लाइफ केयर फ़ाउंडेशन ने बताया कि उन्होंने 24-घंटे आपातकालीन अस्पताल की स्थापना की है। उन्होंने आगे बताया कि वे पहले दिन से प्राथमिक चिकित्सा एवं काउंटर पर दवाओं को दे रहे हैं। मगर इन हाल के कुछ दिनों में उनको वहां एक अस्पताल बनाने की आवश्यकता महसूस हुई है।


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पंजाब में डेराबस्सी के अवतार सिंह (36) ने बताया कि उन्होंने ऐसे लोगों को देखा है जिनको कभी रक्तचाप की समस्या होती थी।कभी किसी व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ जाता था। एवं इसी कारण से यह महसूस किया गया कि शिविर में त्वरित राहत के लिए एक मिनी अस्पताल की  सुविधा होना आवश्यक है। उन्होंने कहा यह वास्तव में कुछ ज्यादा नहीं है मगर कुछ नहीं होने से तो बेहतर है। साथ ही बताया कि उनके पास अस्थमा के रोगियों के लिए नेबुलाइज़र और इंसुलिन इंजेक्शन और टेटनस शॉट्स रखने के लिए फ्रिज भी हैं कारण चीनी की समस्या और चोट ये दोनों आम हैं। उन्होंने आगे बताया कि उन लोगों के पास पंजाब के विभिन्न अस्पतालों के तीन डॉक्टर होंगे । जिन्हें वे वेतन भी देंगे और जो शिविर में 10-15 दिनों की शिफ्ट में काम करेंगे।साथ ही अस्पतालों को अस्पताल कैथेटर, ईसीजी मशीन, ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित किया गया है।

सिंधु बॉर्डर अस्पताल

जानकारी के मुताबिक़ सीमा से निकट जो अस्पताल है वो 2-3 किलोमीटर दूर है एवं विरोध स्थल पर भारी यातायात के वज़ह से वहां पहुंचने में करीबन 25-30 मिनट लगते हैं। तैयार किए गए अस्पतालों के डॉक्टरों ने बताया कि वे एक दिन में लगभग  20-25 मरीजों का इलाज करते हैं। वहीं इसी के साथ हम बता दें संगठन अभी और भी अधिक उपकरण और डॉक्टर प्राप्त करने की योजना तैयार कर रहा है।

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