मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के जन्मदिन को शिक्षा दिवस के रूप में मनाए जाता है,जानें क्यों

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस

आज हमारे देश का 12वां राष्ट्रीय शिक्षा दिवस है तो आईए आज जानते हैं इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें सबसे पहले हम बता दें कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यह फैसला सितंबर 2008 में किया था कि हर वर्ष देश भर में 11 नवम्बर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस का पालन किया जाना चाहिए। लेकिन कई लोग होंगे जो यह बात शायद नहीं जानते होगें कि क्यों यह दिवस मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती के पावन अवसर पर ही मनाया जाता है।

national education day first education minister maulana abul kalam azad | National Education Day पर जानिए देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना आजाद की कहानी | Hindi News,

 

मौलाना अबुल कलाम एक प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षा विद्  

भारत के इस महान पुत्र के जन्मदिन को शिक्षा दिवस के रूप में मनाए जाने और उन्हें इस दिन याद करने के कई कारण हैं। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एक सुधारक,स्वतंत्रता सेनानी और केवल एक विद्वान ही नहीं थे बल्कि शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध थे।उनका जन्म सन् 1888 में  हुआ था।

महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने वाले मौलाना अबुल कलाम आज़ाद भारत के बंटवारे के घोर विरोधी और हिन्दू-मुस्लिम एकता के सबसे बड़े परिवार में थे। हालांकि वह उर्दू के बेहद काबिल साहित्यकार और पत्रकार थे लेकिन शिक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने उर्दू की जगह अंग्रेजी को तरजीह दी ताकि भारत पश्चिम से कदम मिलाकर चल सके।

हम आपको बता दें कि मौलाना अबुल कलाम आजाद एक शिक्षाविद ,कवि, लेखक, और पत्रकार के साथ ही भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे। स्वतंत्रता संग्राम के समय वो ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक थे। शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की स्थापना की थी।उनका मुख्य लक्ष्य प्राइमरी शिक्षा को बढ़ाना था।


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पंडित जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट में 1947 से 1958 तक मौलाना अबुल कलाम आजाद शिक्षा मंत्री रहे। 22 फरवरी, 1958 को हृदय आघात से उनका निधन हो गया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने आईआईटी, आईआईएम और यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) जैसे संस्थानों की स्थापना में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।वे हमारे देश के पहले शिक्षा मंत्री थे। वर्ष 1992 में उन्हें भारत रत्न से भी नवाजा गया था।

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मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एक प्रसिद्ध भारतीय मुस्लिम विद्वान थे।उनका मानना था कि अंग्रेज़ों के ज़माने में भारत की पढ़ाई में संस्कृति को अच्छे ढंग से शामिल नहीं किया गया, इसीलिए 1947 में आज़ादी के बाद भारत के प्रथम शिक्षामंत्री बनने पर उन्होंने पढ़ाई-लिखाई और संस्कृति के मेल पर विशेष ध्यान दिया। मौलाना आज़ाद की अगुवाई में 1950 के शुरुआती दशक में संगीत नाटक अकादमी, साहित्य अकादमी और ‘ललित कला अकादमी का गठन हुआ।

इससे पहले वह 1950 में ही भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद बना चुके थे। वे भारत के केंद्रीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन थे।जिसका काम केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर शिक्षा का प्रसार करना था। उन्होंने सख्ती से वकालत की कि भारत में धर्म, जाति और लिंग से ऊपर उठ कर 14 साल तक सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा दी जानी चाहिए।मौलाना आज़ाद महिला शिक्षा के खास हिमायती थे। शिक्षामंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में ही भारत में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी का गठन किया गया था।

सर्वशिक्षा अभियान

आप में से कई लोगों ने सर्वशिक्षा अभियान के बारे में तो  सुना होगा।असल में केंद्र सरकार ने 6 से 14 वर्ष की उम्र वाले देश के सभी विद्यार्थियों के लिए सर्वशिक्षा अभियान के नारे के साथ इसकी शुरुआत वर्ष 2002 से की थी।इस योजना के तहत देश के अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों के लिए कई विशेष योजनाओं को लागू भी किया गया और सफल भी किया गया।

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आगे जाकर इस अभियान के तहत अपंग समावेशक शिक्षा योजना को भी लाया गया और देश के सभी अपंग बच्चों को स्वस्थ व सामान्य बच्चों के साथ-साथ समान शिक्षा प्रदान करने का अधिकार दिया गया।देश भर के सभी राज्यों के सभी प्राथमिक-माध्यमिक स्कूलों के बाहर अनिवार्य रूप से सब पढ़ें-आगे बढ़े  का बोर्ड लगाया गया, ताकि समस्त जनता को यह संदेश मिले कि स्कूलों के दरवाज़े समाज के सभी वर्गों के लिए खुले हैं।

वर्ष 2009 में अनिवार्य व मुफ़्त प्राथमिक शिक्षा अधिकार का क़ानून लागू किया, जिसे संसद ने अपनी मंजूरी सहर्ष ही प्रदान की।इस क़ानून के तहत पूरे देश में 6 से 14 वर्ष की उम्र वाले सभी बच्चों को अनिवार्य व मुफ़्त शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराया गया। हालांकि इस क़ानून को काफ़ी पहले ही पारित कर दिया गया था पर इसकी जानकारी अधिकतर लोगों को नहीं थी। इसे पूरे देश में व्यापक रूप से लागू करने के लिए सरकार ने योजना बनाई और अंतत: देश के पहले शिक्षामंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती के शुभ अवसर पर,11 नवम्बर, 2011 से इसकी शुरुआत कर दी गई। 

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