सुदर्शन टीवी पर प्रसारित होने वाले UPSC जिहाद कार्यक्रम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

उच्चतम न्यायालय ने सुदर्शन टीवी पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम बिंदास बोल के यूपीएससी जिहाद कार्यक्रम के 2 एपिसोड के प्रसारित होने पर रोक लगा दी है। एपिसोड मंगलवार और बुधवार यानी कि आज प्रसारित किया जाना था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस शो के जरिए मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि यह मुस्लिम समुदाय को अपमानित करने वाला है| नौकरशाही में मुसलमानों की घुसपैठ के आरोपों पर 2 एपिसोड के प्रसारण पर लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “इस समय, प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि यह कार्यक्रम मुसलमान समुदाय के अपमानित करने वाला है।”


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कार्यक्रम के खिलाफ याचिका दर्ज करी गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डीवीआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन बैंच तैयार करी गई है। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, ‘हमने सुदर्शन टीवी न्यूज चैनल कार्यक्रम के शेष कड़ियों के प्रसारण पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।’

मंगलवार को, सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि मीडिया में स्व-नियंत्रण की व्यवस्था होनी चाहिए। इस टीवी कार्यक्रम के ट्रेलर में दावा किया गया था कि सरकारी सेवा में मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की घुसपैठ की साजिश का पर्दाफाश किया जा रहा है। शीर्ष अदालत ने इस कार्यक्रम के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि कुछ मीडिया हाउस के कार्यक्रमों में आयोजित होने वाली बहस चिंता का विषय है क्योंकि इसमें हर तरह की मानहानिकारक बातें कहीं जा रही हैं।

न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति के एम जोसफ की पीठ ने कहा, “इस कार्यक्रम को देखिये, कैसा उन्माद पैदा करने वाला यह कार्यक्रम है कि एक समुदाय प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश कर रहा है।” पीठ ने कहा, “देखिये इस कार्यक्रम का विषय कितना उकसाने वाला है कि मुस्लिमों ने सेवाओं में घुसपैठ कर ली है और यह तथ्यों के बगैर ही यह संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं को संदेह के दायरे में ले आता है।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि हम 5 सदस्यों की कमिटी का गठन करने के पक्ष में है, जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए कुछ निश्चित मानक तय कर सके।

न्यायमूर्ति केएम जोसेफ ने कहा कि हमें इस पर बहस करने की आवश्यकता है कि क्या औरों को केवल एंकर के खिलाफ बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए। न्यायालय ने कहा, “हम गुरुवार को नागरिकों के हर वर्ग के लिए समानता और निष्पक्षता के अधिकार तथा संवैधानिक मूल्यों के संतुलन से संबंधित मामले पर विचार करेंगे।”


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सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से पत्रकारों की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा कि पत्रकारों की स्वतंत्रता सर्वोच्च है और प्रेस को नियंत्रित करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक होगा।

सुदर्शन टीवी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने पीठ से कहा कि चैनल इसे राष्ट्रहित में एक खोजी खबर मानता है। इस पर पीठ ने दीवान से कहा, “आपका मुवक्किल देश का अहित कर रहा है और यह स्वीकार नहीं कर रहा कि भारत विविधता भरी संस्कृति वाला देश है। आपके मुवक्किल को अपनी आजादी के अधिकार का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए।”


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आपको बता दें, 2009 में, जब शाह फ़ैज़ल सिविल सेवा परीक्षाओं में प्रथम स्थान पाने वाले पहले कश्मीरी बने, तो भारत का मुस्लिम अल्पसंख्यक प्रेरित हुआ। इसके बाद यूपीएससी परीक्षाओं में मुसलमानों की संख्या बढ़ी। 2011, 2012, 2013, 2014, 2015 में क्रमशः यूपीएससी परीक्षा पास करने वाले मुसलमानों की संख्या 31, 30, 34, 38 और 36 हो गयी।

2016 के बाद से, लगभग 40-45 मुस्लिम छात्रों ने हर साल यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की।  2018 में, जेएमआई आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) के 43 उम्मीदवारों, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों शामिल हैं, ने यूपीएससी परीक्षाओं को पास करी और 2019 में, एक ही जेएमआई से 30 सिविल सेवक निकले: 16 मुस्लिम और 14 हिंदू।

न्यायालय ने सुदर्शन टीवी चैनल पर प्रसारित किए जा रहे उस कार्यक्रम के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया, जिसमें सिविल सेवाओं में मुसलमानों के चयन को लेकर आक्षेप किया गया था। न्यायालय ने टीवी चैनल पर कार्यक्रम दिखाए जाने के तौर-तरीके पर भी नाराजगी जतायी।

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