केंद्र सरकार की फंडिग बंद होने  से 60 लाख SC छात्रों की स्कॉलरशिप रुकी

केंद्र सरकार की फंडिग बंद होने से स्कॉलरशिप रुकी

एक महत्वपूर्ण स्कॉलरशिप स्कीम जिसके तहत पूरे देश के 60 लाख 11 वीं व 12 वीं के छात्रों को स्कूल की पढ़ाई पूरी करने में मदद के लिए पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के तहत पैसे दिए जाते थे। और उस सेवा को लगभग 14 राज्यों में केंद्र सरकार के फंडिंग ख़तम करने से रुक दिया गया।

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स्कॉलरशिप का 60 फीसद केंद्र और 40 फीसद पैसा राज्य सरकार देती थी

पैसों के अभाव में किसी भी वर्ग के छात्र को पढ़ाई न छोड़नी पड़े ये सुनिश्चित करने के लिए 10वीं व 12वीं के SC, ST और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए सरकार ने खास स्कॉलरशिप शुरू की थी। इस स्कॉलरशिप के लिए एक खास फॉर्मूले के तहत केंद्र और राज्य सरकार पैसा जोड़ती थीं। लेकिन वर्ष 2017-18 में मोदी सरकार ने इस फॉर्मूले को बदल दिया।

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इसके पीछे का कारण था 2017-18 में सरकार द्वारा  फाइनेंस मिनिस्ट्री के ‘कमिटेड लायबिलिटी’ यानी प्रतिबद्ध जिम्मेदारी के फॉर्मूले पर हामी भरना। इस के तहत यह तय हुआ कि स्कॉलरशिप का 10 फीसदी पैसा तो सरकार पक्का देगी। केंद्र की तरफ से केवल 10 प्रतिशत हिस्सा मिलने पर राज्य सरकारों पर इसका पूरा बोझ आ गया। इससे इस स्कॉलरशिप का पूरा सिस्टम लड़खड़ाने लगा।


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14 राज्यों में स्थिति बेहद गंभीर हो गई और स्कीम बंद होने की कगार पर

कई राज्य सरकार भारत सरकार से इस समस्या को लेकर गुहार लगा चुकी हैं। इनमें प्रमुख है पंजाब, हरियाणा, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड की सरकारें है। वे सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय के पास अपनी गुजारिश लेकर भी गए हैं। इसमें कहा गया है कि फाइनेंस मिनिस्ट्री अपने 60 फीसदी और 40 फीसदी वाले फार्मूले पर वापस आ जाए। ऐसा करने पर ही राज्य सरकारें शैक्षिक संस्थानों के लिए मेंटेनेंस फीस, हॉस्टल और ट्यूशन फीस फिर से जारी करने के हाल में होंगी।

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इसके अलावा राज्य सरकार ने बेहतर इनकम मैपिंग करने और स्कॉलरशिप के लिए ज्यादा टेस्ट कराने जैसी योजनाएं भी रखी हैं जिससे स्कॉलरशिप योजना को ज्यादा जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा सके। सरकार ने दलील दी है कि स्कॉलरशिप प्रोग्राम के जरिए ही अनुसूचित जाति के स्टूडेंट्स को शिक्षा में बेहतर भागीदारी दी जा सकती है। फिलहाल राज्य सरकारों की ये गुज़ारिशें भारत सरकार के पास सुनवाई का इंतज़ार कर रही हैं। इस बीच दूर-दराज बैठे लाखों अनुसूचित जाति के स्टूडेंट अपने भविष्य के सपने को डूबते-उतरते देख रहे हैं।

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इस स्कॉलरशिप योजना में 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के लिए छात्रों को 18 हजार रुपए सालाना मदद की व्यवस्था थी। इसके जरिए वो अपनी फीस और बाकी के खर्च निकाल लेते थे। इसके लिए स्टूडेंट को अपने परिवार का आय प्रमाण पत्र देना होता है। 

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