मोदी सरकार ने बच्चों की शिक्षा के सुधार के लिए स्टार्स योजना को अनुमति दे दी

प्रधानमंत्री ने स्टार्स प्रोजेक्ट की अनुमति दे दी

मोदी सरकार बच्चों की शिक्षा के सुधार के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। आपको बता दें, केंद्र कैबिनेट ने प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में 5718 करोड़ रुपए की स्ट्रेंथनिंग टीचिंग लर्निंग एंड रिजल्ट्स फॉर स्टेटस (STARS) योजना के लिए बुधवार को अनुमति दे दी है।

कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति के लिए सरकार की STARS योजना को दी मंजूरी – INDIAN BREAKING

दरअसल, केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में स्ट्रेंथनिंग टीचिंग लर्निंग एंड रिजल्ट्स फॉर स्टेटस (STARS) योजना के लिए अनुमति दे दी है। आपको बता दें, वर्ल्ड बैंक ने भारत के बच्चों के स्कूली शिक्षा के सुधार के लिए 500 मिलियन यानी कि 3700 करोड़ रुपए दिए हैं और यह योजना कुल 5718 करोड रुपए की है।

सुचना और प्रसारण मंत्री द्वारा की गई स्टार्स प्रोजेक्ट की घोषणा 

इस घोषणा को सुचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सेंट्रल कैबिनेट की बैठक खत्म होने के बाद की। इस कार्यक्रम का प्रबंधन केंद्र सरकार के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा नए केंद्र पोषित कार्यक्रम के रूप में किया जाएगा। 


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6 राज्यों में लागू होगा स्टार्स प्रोजेक्ट

आपको बता दें, स्टार्स प्रोजेक्ट 6 राज्यों ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान और मध्य प्रदेश में लागू होगा। जावड़ेकर ने बताया कि यह कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल और ओडिशा में लागू होगा। जावड़ेकर ने आगे कहा कि इससे शिक्षा में मूलभूत सुधार का मार्ग प्रशस्त होगा। छात्रों के भाषा ज्ञान में सुधार होगा और माध्यमिक शिक्षा पूरी करने की दर में सुधार होगा। 

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बच्चों की शिक्षा में सुधार के लिए 6 राज्यों को कई तरह की मदद करी जायेगी। इन राज्यों की अलावा 5 और राज्यों जिनमें गुजरात, तमिलनाडु, उत्तराखंड, झारखंड और असम शामिल है, इन राज्यों में इसी तरह का एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) फंडेड प्रोजेक्ट को लागू किए जाने अनुमान है।

जावड़ेकर ने कहा कि इस फैसले से राज्यों के बीच सहयोग बढ़ेगा, शिक्षकों का प्रशिक्षण होगा और परीक्षा में सुधार होने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में भारत तैयारी के साथ भाग ले सकेगा।

इस योजना के लिए राज्यों के चयन के आधार के बारे में मंत्रालय की एडीजी मौसमी चक्रवर्ती ने कहा कि स्कूलों को परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) के आधार पर चुना गया है। उन्होंने आगे कहा, “इनमें से कुछ स्कूल टॉप, कुछ मिड लेवल और कुछ लोअर लेवल के हैं।”

दो हिस्सों में बंटा है प्रोजेक्ट

स्टार्स प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में बंटा गया है, पहले हिस्से के अंतर्गत रिटेंशन, ट्रांज़ीशन, और कम्पलीशन करना होगा। रिटेंशन मतलब की बच्चों को स्कूल में बनाए रखना, ट्रांज़ीशन मतलब बच्चों का किसी भी हालत में स्कूल नहीं छूटने देना और कम्पलीशन में बच्चों की पढ़ाई कम्पलीट होने के बाद शिक्षा मंत्रालय को डाटा को ठोस करना होगा।  

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यदि किसी प्रकार की विपदा पड़ती है तो उसके लिए कॉन्टिजेंसी इमरजेंसी रेस्पॉन्स कॉम्पोनेंट नामक प्रावधान किया गया है। बताया गया है, इसके ज़रिए किसी प्राकृतिक, इंसानों द्वारा उपजी या स्वास्थ्य से जुड़ी विपदा की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई को बर्बाद होने से बचाया जा सकेगा।

दूसरे हिस्से में, बच्चों को हर प्रयास लीडर शिप क्वालिटी सिखाने की योजना है, इसमें बच्चों को करियर गाइडेंस और काउंसिलिंग, इंटर्नशिप आदि हर तरीके से बच्चों को मजबूत बनाने की योजना है। यह योजना आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत है इसलिए इस मिशन में पीएम- ईविद्या और फ़ाउंडेशन लिटरेसी एंड न्यूमेरसी मिशन पर भी ध्यान दिया जाएगा।

स्टार्स प्रोजेक्ट को लेकर मंत्रालय द्वारा दिए गए बयान

बुधवार को शिक्षा मंत्रालय द्वारा बयान में कहा गया, “स्टार्स प्रोजेक्ट द्वारा राज्यों को दिए जा रहे समर्थन के जरिए शिक्षा से जुड़े परिणामों को अच्छा करने और बेहतर लेबर मार्केट परिणामों के लिए छात्रों को स्कूल से काम तक ले जाने से जुड़ी रणनीति पर काम किया जाएगा।”

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मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है, “स्टार्स प्रोजेक्ट का पूरा फोकस और इसके तहत होने वाली चीज़ें गुणवत्ता आधारित शिक्षण परिणामों के एनईपी 2020 के उद्देश्यों के साथ मेल खाती हैं।”

बयान में आगे कहा गया है, “इस प्रोजेक्ट को केंद्र की तरफ़ से स्पॉन्सर्ड स्कीम की तौर पर लागू किया जाएगा। इसे लागू करने का ज़िम्मा शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवम् साक्षरता विभाग के पास होगा। इसके तहत नेशनल असेसमेंट सेंटर, परख की स्थापना की जाएगी जो कि स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के तहत एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था होगी।”

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