निजीकरण के खिलाफ बैंकों ने खोला मोर्चा, 2 दिन की हड़ताल में शामिल होंगे 50,000 से ज्यादा कर्मचारी 

2 दिन की हड़ताल में शामिल होंगे बैंकों के कर्मचारी

सरकार प्राइवेटाइजेशन की दिशा में लगातार अपने कदम बढ़ा रही है। इसी के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में ऐलान किया था कि इस साल सरकार दो सरकारी बैंक समेत एक इंश्योरेंस कंपनी का निजीकरण करेगी।

सरकार के इसी फैसले के खिलाफ यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) जो कि देश की सबसे बड़ी बैंक कर्मचारी संगठन है ने 2 दिन के हड़ताल का आह्वान किया। इस फोरम में भारत के बैंक कर्मचारी तथा अफसरों के 9 संगठन शामिल है।

वित्त मंत्री के ऐलान के बाद बनी हड़ताल की रणनीति

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दरअसल हड़ताल की रणनीति बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के ऐलान के बाद बनी उन्होंने ऐलान किया था कि सरकार दो सरकारी बैंक और एक इंश्योरेंस कंपनी का निजीकरण करेगी।

ग़ौरतलब है कि पिछले 4 सालों के दौरान 14 सार्वजनिक बैंक को मर्ज किया गया। अभी करीब 12 सरकारी बैंक है यदि इनमें से भी दो बैंकों का निजीकरण किया जाता है तो इनकी संख्या बस 10 रह जाएगी।

इस संबंध में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ऑफीसर्स एसोसिएशन के महासचिव अजीत कुमार मिश्रा का कहना है कि हड़ताल की वजह से स्टेट बैंक और व्यवसायिक बैंकों की 3978 तथा ग्रामीण बैंकों की 2110 शाखाओं से 70 हजार करोड़ का कारोबार बंद रहेगा।

3 दिन की छुट्टी के बाद 2 दिन का हड़ताल

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आज का दौर मोबाइल बैंकिंग का दौर है जिस वजह से आप अपने मोबाइल के जरिए बैंक से संबंधित कई काम कर लेते हैं। हालांकि अभी कुछ चीजें ऐसी होती है जिनके लिए आपको बैंक में जाना पड़ता है।

ऐसे में यदि आपको बैंक से संबंधित कोई जरूरी काम करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको और 2 दिन का इंतजार करना पड़ेगा। बता दे इससे पहले शिवरात्रि की छुट्टी थी तथा शनिवार व रविवार बैंकों की छुट्टी के बाद अब सोमवार और मंगलवार को भी बैंक में हड़ताल रहेगी जिससे आप बैंक से जुड़े काम बुधवार से ही कर सकेंगे। हालांकि यदि सरकार इन बैंक कर्मचारियों की मांगों को मान लेती है तो हड़ताल वापस भी ली जा सकती है।


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सरकारी बनाम निजीकरण की लड़ाई

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सरकार द्वारा किए जा रहे हैं निजीकरण को लेकर सरकारों तथा विभिन्न कंपनियों और लोगों में द्वंद्व जारी है। निजीकरण के पक्ष में सरकार कहती है कि सरकारी संस्थानों को चलाने के लिए निजीकरण जरूरी है क्योंकि इन संस्थानों का निजीकरण ना करने पर कर्मचारियों को सैलरी देना मुश्किल होगा।

सरकार सभी क्षेत्रों में निजीकरण करने का काम जोर-शोर से कर रही है जिसके तहत एयर इंडिया, भारतीय पैट्रोलियम, एलआईसी का नाम अग्रणी है। इसके अलावा अब सरकार का यह भी कहना है कि व रणनीति के रूप में स्ट्रैटेजिक सेक्टरों में भी कंपनियों को अपने पास रखने पर दबाव नहीं डाल रही। इसके अलावा एक और समस्या जो सामने दिखाई देती है वह यह है कि निजी क्षेत्र के बैंक और विदेशी बैंकों के मुकाबले सरकारी बैंक पिछड़ते जा रहे हैं।

कई बार सुधार तथा सरकार की तरफ से पूंजी डालने के बाद भी इन बैंकों में समस्याएं बरकरार हैं। निजी क्षेत्र के बैंक लगातार सरकारी क्षेत्रों के बैंकों को हर मोर्चे पर पछाड़ रहे हैं जिस वजह से यह बैंक सरकार के लिए बोझ बनते जा रहे हैं। यदि इन बैंकों का निजीकरण किया जाता है तो सरकार को इनमें पूंजी डाल कर इन्हें वापस खड़ा करने की चिंता से मुक्ति मिल जाएगी।

वहीं दूसरी और निजीकरण के खिलाफ बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का यह कहना है कि निजी बैंक देश के लिए काम न करके मालिक के हित में काम करते हैं जो कि देश के लिए खतरनाक है।

अब तक निजी क्षेत्रों के बैंकों जैसे कि आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक, एक्सिस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक में बड़ी -बड़ी गड़बड़ी सामने आई। जिससे निजी क्षेत्र के बैंक को लेकर सरकार का दावा कमजोर पड़ता दिखाई देता है। वही स्वतंत्रता के बाद से अब तक कोई भी शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक डूबने के कगार पर नहीं पहुंचा।

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