हमने चे की क्रांति को सिर्फ टी-शर्ट तक ही सीमित कर दिया है.

चे ग्वेरा, एक डॉक्टर, लेखक, गुरिल्ला युद्ध में पारंगत, सामरिक विशेषज्ञ, कूटनीतिज्ञ एवं दुनिया के महान क्रांतिकारी युवा (जिन्होंने अमेरिकी साम्राज्यवाद  का 50 और 60 के दशक में नींव हिलाकर रख दिया था) अर्नेस्टो चे ग्वेरा को उनकी जयंती पर सलाम पेश करते हैं।
 जिस उम्र में लोग ऐशो-आराम की जिंदगी जीना पसंद करते हैं उस उम्र में इन्होंने अपनी डॉक्टरी पेशा को छोड़कर लैटिन अमेरिका में गरीबों और मजदूरों के साथ हो रहे शोषण को देखकर क्रांति का पथ अख्तियार किया।

अर्नेस्टो चे ग्वेरा का जन्म 14 जून 1928 को अर्जेंटीना के रोज़ारियो शहर में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था।स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद इन्होंने अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की और यहीं डॉक्टर बन गए। चिकित्सीय शिक्षा के दौरान चे ग्वेरा ने पूरे लैटिन अमेरिका का दौरा किया। इस दौरान पूरे महाद्वीप में व्याप्त गरीबी और शोषण ने उनकी मानसिकता को हिलाकर रख दिया। 

इसके बाद इन्होंने ये निष्कर्ष निकाला कि इस गरीबी और आर्थिक विषमता का मुख्य कारण एकाधिपत्य पूंजीवाद, नव उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद है जिससे छुटकारा पाने का एक मात्र तरीका क्रांति है। इसी निष्कर्ष का अनुसरण करते हुए इन्होंने गुआटेमाला के राष्ट्रपति यकोबो आरबेंज गुजयान के द्वारा किये जा रहे समाज सुधारों में भाग लिया। उनकी क्रांतिकारी सोच तब और मजबूत हो गई जब गुजमान को राष्ट्रपति पद से अमेरिका की मदद के द्वारा हटा दिया गया।

इसके कुछ ही समय बाद 1955 में मात्र 27 वर्ष की उम्र इनका मुलाकात मेक्सिको सिटी में राउल कास्त्रो और फिदेल कास्त्रो से हुई। तत्पश्चात ये 26 जुलाई वाली  की विश्व प्रसिद्द क्यूबा क्रांति में शामिल हो गए और इस क्रांति में इनका अहम योगदान रहा। इसी क्रांति ने  इन्हें विश्व ख्याति प्रदान की। क्यूबा क्रांति के पश्चात चे ग्वेरा नई सरकार में उद्योगमंत्री बने, मंत्री बनने के बाद इन्होंने कई सारे महत्वपूर्ण कार्य किये और साथ ही साथ सारे विश्व में घूम-घूम कर क्यूबा के समाजवाद के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाया।

1964 में चे जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्यूबा की ओर से भाग लेने गए तो दुनिया के तमाम वरिष्ठ ने 36 वर्षीय चे को सुनने के लिए आतुर थे। 

1965 में चे ग्वेरा क्यूबा से निकलकर कांगो जहां पर उन्होंने क्रांति लाने का असफल प्रयास किया। इसके बाद वे बोलिविया पहुंचे और क्रांति तथा सामाजिक बदलाव की कोशिश की लेकिन दुर्भाग्यवश अमेरिकी खुफिया एजेंसी के हत्थे चढ़ गए और 9 अक्टूबर 1967 को मात्र 39 वर्ष की उम्र में इनकी हत्या कर दी गई। इस तरह से एक महान क्रांतिकारी नेता का अंत हो गया।

चे ने बहुत कुछ लिखा भी इनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियां हैं ‘गुरिल्ला युद्ध के नियम’ और दक्षिण अमेरिका में इनकी यात्राओं पर आधारित ‘मोटर साइकिल डायरियां’ इनके ऊपर कई सारी फिल्में भी बनी है।
यह बात बहुत कम ही लोग जानते हैं कि चे ग्वेरा ने भारत की भी यात्रा की थी और तब वे क्यूबा सरकार में उद्योगमंत्री थे।

(भारत यात्रा के दौरान चे और जवाहरलाल नेहरु)

 चे ने भारत की यात्रा के बाद एक रिपोर्ट लिखी थी जो उन्होंने फिदेल कास्त्रो को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में उन्होंने ने लिखा कि 39 करोड़ आबादी और 32 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले विशाल देश भारत की यात्रा काफी रोमांचक भरा रहा।

इस यात्रा के दौरान हमने भारत के सभी प्रमुख राजनीतिज्ञों से मुलाकात किया। नेहरू ने ना सिर्फ हमारा पूरी आत्मीयता के साथ स्वागत किया बल्कि क्यूबा की जनता के समर्पण और उसके संघर्ष में भी अपनी पूरी रुचि दिखाई। चे ने अपनी रिपोर्ट में लिखा नेहरू ने हमे बेशकीमती मशविरे दिए और हमारे उद्देश्य की पूर्ति में बिना शर्त अपनी चिंता का प्रदर्शन भी किया।

भारत की यात्रा से कई लाभदायक बातें हमें सीखने को मिली। सबसे महत्वपूर्ण बात हमने यह जाना कि एक देश का आर्थिक विकास उसके तकनीकी विकास पर निर्भर करता है और इसके लिए वैज्ञानिक शोध संस्थानों का निर्माण बहुत जरूरी है। मुख्य रूप से शिक्षा,स्वास्थ,रसायन विज्ञान,भौतिक विज्ञान और कृषि। अपनी विदाई को याद करते हुए चे ने लिखा कि जब हम भारत से लौट रहे थे तो स्कूली बच्चे ने हमें जिस नारे के साथ विदाई दी उसका तजुर्बा कुछ इस तरह है ‘क्यूबा और भारत भाई।’ सचमुच क्यूबा और भारत भाई भाई है।


अर्नेस्टो चे ग्वेरा की तस्वीरों को देखने से किसी हॉलीवुड स्टार की तरह लगते हैं। चे आपको आज दिल्ली के नगर पालिका बाजार में बिक रहे टी शर्ट पर मिल जाएंगे,लंदन में किसी फैशनेबल जीन्स और टी शर्ट पर, दुनिया के बड़े बड़े रेस्टोरेंट के दीवारों पर। आज बहुत से युवा ऐसे मिलेंगे जो उनकी तस्वीर टी शर्ट पहने रहते हैं और पूछने पर कहते हैं कि कोई पॉप सिंगर या हॉलीवुड अभिनेता हैं।
चे ग्वेरा एक प्रतीक है व्यवस्था के खिलाफ युवाओं के गुस्से का,उसके आदर्शों की लड़ाई का।

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Akshay Kumar

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