बिहार में बाढ़ है लेकिन राज्य में बेपरवाह सरकार है

पिछले दिनों उत्तर बिहार और नेपाल में भारी बारिश और कोसी में पानी छोड़े जाने के कारण कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक, गंगा, घाघरा कमला बलान, महानंदा इत्यादि नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है जिस कारण बिहार के कई जिलों में बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो गई है।

बिहार में बाढ़ से 15 लाख की आबादी प्रभावित है लेकिन राहत शिविर बस 26 बनाये गए हैं। क्या ये बिहार की जनता से भद्दा मज़ाक नहीं है? 11 ज़िले, 15 लाख आबादी और सिर्फ़ 26 राहत शिविर। ना खाने की कोई व्यवस्था ना ही कोई और राहत सामग्री।

नेपाल सीमा से रक्सौल व अन्य इलाके जलमग्न हो चुके हैं। बागमती का जलस्तर बढ़ने से उसका पानी पूर्वी चंपारण और शिवहर को जोड़ने वाली सड़क से होकर गुजर रहा है जिस कारण लोगों को रोड पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

पूर्णिया कटिहार अररिया और किशनगंज में भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। पूर्णिया और अररिया के तो कई हिस्सों में बाढ़ का पानी प्रवेश भी कर चुका है यह सभी जिले सीमांचल क्षेत्र के है, यहां हर साल बाढ़ आती है।

कई जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। गोपालगंज में गंडक की तबाही जारी है। सारण तटबंध के बाद बैकुंठपुर में सात जगहों पर बांध टूटने से इलाकों में पानी तेजी से प्रवेश कर रहा है। गोपालगंज के कुचायकोट मांझा बरौली सिधवलिया व बैकुंठपुर समेत छह प्रखंड बाद से प्रभावित है। वही पानी के दबाव के कारण मुज़फ्फरपुर-नरकटियागंज रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन ठप्प पड़ गया है। सुगौली मझौलिया स्टेशन के बीच पुल संख्या 248 पर पानी का दबाव पड़ने के बाद शुक्रवार को देर रात से रेलवे प्रशासन ने गाड़ियों के परिचालन पर रोक लगा दी है। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि मुज़फ्फरपुर, नरकटियागंज, समस्तीपुर, दरभंगा स्टेशन की कई रेलगाड़ियों का मार्ग बदलना पड़ा।

समस्तीपुर के कल्याणपुर प्रखंड में बागमती नदी का कहर ऐसा टूटा है कि कई गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूट चुका है लोगों ने एक स्कूल की इमारत को  ठिकाना बनाया हुआ है लेकिन स्कूल के आसपास  बाढ़ का पानी भर गया है जिससे वहां ठहरे लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया है।

मोतिहारी में बाढ़ से तबाही का सिलसिला जारी है उसी बीच एक महिला ने एनडीआरएफ की नाव पर ही नवजात बेटी को जन्म दिया उन्हें प्रसव पीड़ा की सूचना पर एनडीआरएफ टीम लेने पहुंची थी लेकिन गंडा के कहर के चलते पहुंचने में वक्त लगा और फिर अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्ची का जन्म हो गया गनीमत है कि आप अस्पताल में दोनों स्वस्थ हैं मगर इस पर भी सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंगी।

वही गंगा का जलस्तर भी 1.71  सीएम के दर से बढ़ रहा है जिससे परेशानी बढ़ सकती है कोसी के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है । बिहार के अब तक 12 जिले बाढ़ प्रभावित हैं और करीब 14 लाख की आबादी पर असर डाला है लोग जान बचाने के लिए घर घर का सामान और मवेशी चोर ऊंचाई वाले स्थानों पर शरण ले रहे हैं नदिया रौद्र रूप दिखा रही हैं गांव के गांव पानी में समाते जा रहे हैं।


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बिहार में बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है यह प्रतिवर्ष उत्पन्न होने वाली एक प्राकृतिक आपदा है जिस से निपटने के लिए सरकार करोड़ों रुपए तो हर साल खर्च करती है मगर जमीनी स्तर पर उसका कोई फायदा नजर नहीं आता है शायद वह रुपया बांध बांधने कैनाल बनाने एंबेंकमेंट बनाने के अलावा बाकी कामों में इस्तेमाल कर लिए जाते हैं ऐसी आशंका बिहार के लोग जता रहे हैं।

बिहार में पिछले साल भी बाढ़ का कोहराम आया था राज्य के 17 जिलों में बाढ़ का पानी घुस गया था बाढ़ से करीब 1.71 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे। बाढ़ के कारण 8.5 लाख लोगों के घर टूट गए थे और उत्तर बिहार में 514 लोगों की मौत हो गई थी बाढ़ के कारण फसलों को भी नुकसान हुआ था आंकड़ों के अनुसार करीब 800000 एकड़ में लगी खरीफ की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी।

वही उत्तर बिहार में 700 किलोमीटर स्टेट हाईवे और डेढ़ दर्जन नेशनल हाईवे बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो गए थे रोड बर्बाद होने से करीब 1000 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ था।इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह समस्या कितनी बड़ी है।

बाढ़ का हवाई सर्वेक्षण करने गए नीतीश कुमार ने बाढ़ पीड़ितों को ना केवल समुचित आर्थिक मदद का भरोसा दिया था उन्होंने यह भी आश्वासन दिया था कि अगले साल से प्रशासन पहले से जरूरी कदम उठाएगा ताकि जान माल का कम से कम नुकसान हो। सोच की बात यह है कि यह शायद बाकी राजनेताओं से प्रेरित एक सियासी जुमला ही था क्योंकि कहीं पर भी ऐसा नजर नहीं आ रहा यह किसी प्रकार का कोई बचाव इंतजाम किया गया हो।

वही जिस आर्थिक मदद का आश्वासन दिया गया था वह भी अब तक लोगों को नहीं मिला है प्रभावी लोगों को आज तक सरकारी सहायता का इंतजार है।

यह तो पिछले साल की बात थी जो बीत गई सो बात गई मगर इस साल भी अब तक 10 से अधिक जिले बाढ़ ग्रस्त हो चुके हैं इसके बावजूद बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित जिलों के बारे में कोई घोषणा नहीं की है अलबत्ता अब तक यही आश्वासन दिया जा रहा है कि राज्य सरकार बाढ़ से निपटने को पूरी तरह तैयार है। शायद इन हेलीकॉप्टर से जायजा लेने वाले राजनेताओं को यह मालूम नहीं कि जमीनी स्तर पर क्या हाल है।

बाढ़ ग्रस्त इलाके में बसे लोग प्रभावित लोग इन आश्वासनों को खूब समझते हैं। “लोगों को अब सरकारी मशीनरी पर किसी भी तरह का भरोसा नहीं रह गया है आश्वासन केवल हलवे परियों की तरह परोस दिया जाता है सरकार जब भी यह कहती है कि हमने बात से राहत देने की तैयारी कर ली है तो इसका अर्थ यह है कि इस साल बाढ़ से राहत के नाम पर खूब लूट खसोट होने वाली है।” मुजफ्फरपुर के औराई ब्लॉक के एक परिजन ने यह बात कही।

बिहार में अब तक 1495132 प्रभावित लोगों में 136464 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है जन संसाधन से प्राप्त जानकारी के मुताबिक बागमती नदी बूढ़ी गंडक कमला बलान लाल बतिया पुनपुन अधारा सिरोही महानंदा तथा घाघरा नदी विभिन्न स्थानों पर अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

बिहार के बाढ़ प्रभावित जिलों में बचाव और राहत कार्य चलाए जाने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कुल 25 टीमों की तैनाती की गई है वायुसेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा रविवार को भी बाढ़ प्रभावित जिलों में खाने के पैकेट गिराए गए।

कौन के गम में डिनर करते हैं हुकम के साथ,

रंज  लीडर को बहुत है मगर आराम के साथ

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Sabeeh Akhter

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