क्या हमें सच में अभी राम मंदिर चाहिए या कोरोना से लड़ने के लिए अस्पताल?

क्या हमें सच में अभी राम मंदिर चाहिए या कोरोना से लड़ने के लिए अस्पताल? 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन है. बहुत अच्छी है है, आखिर इसी के लिए ही तो इतना खून-ख़राबा और दंगें करवाए गए थे. उस दौरान नारे लगते थे:-

तेल लगाओ डाबर का 
नाम मिटा दो बाबर का 

लेकिन बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया जिसे सबने माना. हालांकि उस फ़ैसले की काफी आलोचना हुई लेकिन फिर भी वो सर्वमान्य रहा. अभी पूरा देश कोरोना महामारी के काल से जूझ रहा है और देश की स्थिति हर दिन ख़राब होते जा रही है. भारत पूरी दुनिया में कोरोना केसेस में तीसरे नंबर पर आ गया है.
“चलो कहीं तो भारत पूरी दुनिया में नंबर तीन पर आया. बधाई हो मोदी जी, इसके लिए आपने कठिन तपस्या की, स्वास्थय व्यवस्था की बत्ती लगा दी और बढ़ाना था जीडीपी बढ़ा ली अपनी दाढ़ी.”

खैर,

आज सुबह का अखबार जब पढ़ रहा था तब ख़बर पढ़ी कि भूमि पूजन के लिए 2 पंडाल बनेंगे जिसमें 600 लोग बैठेंगे.
600!!

मतलब कोरोना को थोड़ा तो सीरियसली ले लो यार. अभी तो मतलब  भारत में कोरोना अपने चरम सीमा पर है लेकिन नहीं हमें तो 600 लोगों को बुला कर कोरोना को फैलाना है. ऐसे भी राम मंदिर पर शायद ही मीडिया कुछ बोले या लिखे क्योंकि मीडिया अभी एक ऐसे प्रेमी का रोल कर रहा है जिसकी खोयी हुई प्रेमिका मिल गयी है. 

दीपक चौरसिया ने अपने चैनल पर साफ़ तौर पर कहा कि वो सेक्युलर नहीं हैं, अगर लोग उन्हें चाहे तो कम्युनल बोल सकते हैं.

ऐसे में हिंदी मीडिया की विश्वसनीयता पर शक होता है कि वो किस तरह से निष्पक्ष पत्रकारिता करेंगे? और सबसे बड़ा सवाल क्या उन्हें देश के संविधान पर भरोसा है भी या नहीं?

भारत का संविधान पंथनिरपेक्ष और धर्मनिरपेक्ष है. अर्थात, वो सेक्युलर है. लेकिन अगर मीडिया ही ये बोले कि वो सेक्युलर नहीं है तब समझ लेना चाहिए कि मीडिया का स्तर पूरे तरीके से गिर चुका है.

अभी मीडिया में कहीं भी इस पर चर्चा नहीं हो रही है कि भारत को मंदिर नहीं हॉस्पिटल चाहिए. अभी भी हिंदी मीडिया सिर्फ़ पाकिस्तान, चीन, हिन्दू-मुस्लिम डिबेट ही करवा रही है. कोरोना पर कोई भी चर्चा नहीं करना चाह रहा है. क्योंकि अगर वो कोरोना की चर्चा करेंगे तब उन्हें सरकार की खामियों पर भी नज़र डालनी होगी.

राम मंदिर का भूमि पूजन होना अच्छी बात है लेकिन इतने बड़े स्तर पर भूमि पूजन करवाना जिसमें लगभग 1000 लोगों के आने की संभावना है कितना सही है? अभी हमें सच में राम मंदिर की ज़रुरत है या अस्पताल की?

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Amir Abbas

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