नीतीश जी, अगर आप कोरोना योद्धाओं को वेतन नहीं दे सकते हैं तो आप भी वेतन लेना बंद कर दें

भारत में कहा जाता है कि डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं. लेकिन क्या हम डॉक्टरों को कोरोना से जंग लड़ने के लिए पर्याप्त मात्रा में संसाधन दे रहे हैं? या फिर डॉक्टरों को भी बस भगवानों की तरह ही फूल चढ़ाकर कह रहे हैं कि आप कोई चमत्कार करके दिखाइए.
बिहार में कोरोना की स्थिति क्या है वह किसी से भी छुपी हुई नहीं है. कल 24 घंटे के अंदर भी 300 से अधिक मरीज सिर्फ पटना में मिले हैं.

लेकिन इसके बावजूद सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जो लचर व्यवस्था मौजूद है उसका कोई इलाज नहीं मिल रहा है. इन्हीं बदइन्तेज़ामी से परेशान होकर पटना एम्स के इंटर्न डॉक्टर्स हड़ताल पर जा चुके हैं. इंटर्न डॉक्टर्स का कहना है कि बिना किसी पीपीई किट के और बिना किसी प्रोत्साहन राशि के इनसे काम करवाया जा रहा है. इन डॉक्टर्स के अनुसार यह किसी भी सीनियर डॉक्टर के आदेश के बिना किसी का इलाज भी नहीं कर सकते हैं. बिना सीनियर डॉक्टर के आदेश के इंटर्न किसी भी तरह के मरीज़ का इलाज नहीं कर सकते हैं.

(पटना एम्स में हड़ताल पर बैठे इंटर्न डॉक्टर्स)

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यह इंटर्न डॉक्टर अप्रैल 2020 से बिना किसी शिकायत, विपरीत परिस्थितियों में भी कोविड-19 की ड्यूटी कर रहे हैं और कभी भी इन्होंने ड्यूटी करने में कोई कोताही नहीं की है. अगर किसी से कोताही हुई है तो वह स्वास्थ्य मंत्रालय से हुई है.

सरकार ने इन इंटर्न के लिए अगर कोई प्रोत्साहन का काम किया तो वह सिर्फ़ थाली बजवा देना और फूल बरसा देना है. लेकिन फूल बरसा देने से और थाली बजवा देने से इन इंटर्न को किसी भी तरह की सुविधा नहीं मिलने वाली है. बाकी राज्यों में इंटर्न डॉक्टर्स को प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है. लेकिन बिहार सरकार को इतनी फुरसत नहीं कि वो डॉक्टर्स की मांग पर ध्यान भी दे सकें. 

वहीं दूसरी तरफ एम्स में कोरोना से मरीज़ों की मौत का सिलसिला रुक नहीं रहा है. कल कोरोना से 8 मरीज़ों की मौत हो चुकी है और एनएमसीएच में भी कोरोना से एक मरीज़ की जान जा चुकी है. आईजीआईएमएस के 4 मरीज़ कोरोना पॉजिटिव मिले हैं.

पीएमसीएच में भी स्वास्थ्य कर्मियों सहित 19 कोरोना पॉजिटिव पेशेंट मिले हैं. आप इसी बात से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मियों की स्थिति राज्य में क्या बनी हुई है. जब ये कोरोना योद्धा ख़ुद कोरोना संक्रमित हो जाते हैं तब इनके इलाज के लिए भी सरकार ने कोई गाइडलाइन्स नहीं तैयार की है. ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल क्या रहेगा? इससे पहले आशा कार्यकर्ता भी कम मानदेय के कारण हड़ताल पर जा चुकी हैं.

(बिहार में कोरोना की सबसे बड़ी आर्मी, आशा वर्कर्स)

आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय 2000 से 3000 रूपए प्रतिमाह ही है. इतने में किसी का भी घर चलना तो दूर 2 वक़्त का खाना भी नहीं हो सकता है. अगर सरकार को ये लगता है कि कोरोना योद्धाओं को पैसे की ज़रूरत नहीं है तो फिर नीतीश कुमार ख़ुद अपनी तनख्वाह भी लेना बंद कर दें.

 

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Amir Abbas

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