बिहार में बाढ़ है लेकिन नीतीश कुमार को सिर्फ़ चुनाव की चिंता है

बिहार में बहार नहीं है, बिहार में बाढ़ है. बिहार में बाढ़ से अब तक बिहार की 81 लाख से भी ज़्यादा की जनसंख्या प्रभावित हो चुकी है. लेकिन क्या इससे सरकार को कोई फ़र्क पड़ता है? जहां तक मेरा मानना है सरकार को इससे कोई भी फ़र्क नहीं पड़ता है. अभी तक 13 साल से भी ज़्यादा पंचायत बाढ़ में डूबे हुए हैं और मौत का आंकड़ा 25 तक पहुंच चुका है.

लेकिन सरकार को इन आंकड़ों की परवाह कतई नहीं है. 81 लाख की प्रभावित जनसंख्या के लिए सरकार ने अभी तक सिर्फ 653 सामुदायिक किचनों की व्यवस्था की है. यानी 81 लाख लोग सिर्फ 653 सामुदायिक किचनों में ही खाना खा सकते हैं और राहत शिविर अभी तक सिर्फ 10 ही बनाए गए हैं.


और पढ़ें- जानें आखिर हर साल उत्तर बिहार में बाढ़ का प्रकोप क्यों रहता है?


क्या यह एक मजाक नहीं है कि 81 लाख जनसंख्या के सिर्फ़ 10 राहत शिविर बनाए जाएं और उनमें अभी तक 13 हज़ार से भी कम जनसंख्या के लोग उस राहत शिविर में रह रहे हैं. सरकार अभी सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही चीज़ के ऊपर अपना ध्यान दे रही है, वह है तय समय पर चुनाव करवाना. लेकिन यह सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाती है कि क्या सरकार को जनता की कोई परवाह है? अभी मौसम विभाग ने फिर से 72 घंटे का अलर्ट जारी किया है .और कहा है कि पटना समेत 28 जिलों में जमकर बारिश होगी.

मौसम विभाग के पूर्वानुमान अनुसार पटना, नालंदा, मुज़फ्फ़रपुर, नवादा सहित बिहार के 28 जिलों में तेज़ हवा के साथ बारिश की संभावना जताई गई है. लेकिन इन सारी चीज़ों के बाद भी सरकार कोई मुकम्मल तैयारी के साथ नज़र नहीं आ रही है.

सामुदायिक किचन की संख्या घटी है इसको लेकर आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव रामचंद्रडू ने बताया कि कई क्षेत्रों में बाढ़ का पानी काफ़ी कम हुआ है. इसीलिए सामुदायिक किचन की संख्या कम की गई है.


और पढ़ें- बिहार में बाढ़ है लेकिन राज्य में बेपरवाह सरकार है


नीतीश सरकार ने ढिंढोरा पीटा था कि प्रभावित लोगों को ₹6000 सहायता राशि प्रदान की जाएगी. लेकिन नीतीश सरकार अपने वादों को अधूरा रखने के लिए जानी जाती है इसीलिए अभी तक सिर्फ 8 लाख 45 हज़ार परिवारों के खाते में ₹6000 की सहायता राशि प्रदान की गई है.

बिहार में बाढ़ का मुख्य कारण बागमती, कोसी, बूढ़ी गंडक और गंगा की अन्य सहायक नदियां हैं, जो अपना प्रकोप हर साल दिखाती है लेकिन हर साल सरकार इस आपदा को अवसर के तौर पर देखती है. अगर सरकार बाढ़ का कोई परमानेंट इलाज कर देगी तो हर साल रोड बनाने और बांध बनाने का टेंडर नहीं निकल पायेगा जिससे राजनेताओं की जेब भरे.

Digiqole Ad Digiqole Ad

Amir Abbas

Related post

Leave a Reply