भारत में बेरोज़गारी चरम सीमा पर लेकिन अभी 13 करोड़ लोग और होंगे बेरोज़गार

भारत की अर्थव्यवस्था कोरोना से पहले भी फिसलती जा रही थी और सरकार की तमाम कोशिश के बावजूद हम अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर तक नही कर पा रहे थे, उसके ऊपर कोरोना की मार। कोरोना वायरस के चलते बिगड़ते हालात के असर देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ लोगों के रोज़गार पर भी पड़ी। कोरोनावायरस और इसे रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन का आर्थिक प्रभाव काफ़ी बुरा रहा। एक तरफ जहां कंपनियों को भारी नुकसान झेलने की वजह से छटनी करनी पड़ी वही असंगठित क्षेत्रो को भी या तो कम वेतन में या बेरोज़गार होने पर मजबूर होना पड़ा।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार मई 2020 में भारत की बेरोज़गारी दर 23.5 फीसदी पर स्थिर रही। मई में बेरोज़गारी दर में अप्रैल के मुकाबले कोई फर्क नहीं आया है। अप्रैल में भी यह 23.5 फीसदी ही रही थी। भारत में बेरोज़गारी अप्रैल से ही बढ़ी। फ़रवरी में ये दर 7.8 फीसदी और मार्च में 8.8 फीसदी थी। मगर लॉकडाउन शुरू होते ही ये अप्रैल में 23.5 फीसदी पर पहुंच गई।


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राज्यों का हाल

उन राज्यों का हाल सबसे बुरा रहा जहां लोग पलायन कर के अन्य राज्यो में निम्न वर्ग की नौकरियां करते हैं। जिसमे झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे कई अन्य राज्य भी शामिल हैं। झारखंड में जहां 59.2 फीसदी बेरोज़गारी दर रही। वहीं बिहार और दिल्ली में क्रमशः 46.2 फीसदी और 44.9 फीसदी बेरोजगारी दर रही। एक लंबे समय अवधि को देखे तो 2017 की जुलाई में भारत मे बेज़ोरगरी दर जहां 1.6 फीसदी थी वो अब 2020 में बढ़ के 59.2 फीसदी है।

नज़र डालते है राज्यों पर

यूपी : 20.8 फ़ीसदी

महाराष्ट्र : 16.5 फ़ीसदी

राजस्थान : 14.1 फ़ीसदी

गुजरात : 13.6 फ़ीसदी

कर्नाटक : 20.4 फ़ीसदी

तमिलनाडु : 33 फ़ीसदी

पश्चिम बंगाल : 17.4 फ़ीसदी

आंध्र प्रदेश : 17.5 फ़ीसदी

वही कुछ ऐसे भी राज्य रहे जिनमे ये दरें सबसे कम थी

उत्तराखंड: 8.0 फीसदी

आसाम: 9.6 फीसदी

उड़ीसा: 9.6 फीसदी

 

क्या कहती है रिपोर्ट

एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना की वजह से भारत में 13.5 करोड़ लोगों का रोज़गार छिन सकता है तो 12 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे चले जाएंगे।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के अनुसार कोरोना वायरस महामारी की वजह से पैदा हुए संकट के कारण लगभग 1.9 करोड़ लोग अपनी नौकरियां गंवा चुके हैं। केवल जुलाई के महीने में 50 लाख लोग बेरोज़गार हुए हैं। हालांकि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के अनुसार, जून में 4.98 लाख लोग औपचारिक कार्यबल से जुड़े हैं।

संस्थान के अनुसार जून में चालीस लाख लोगों को नौकरी वापस मिली थी, वहीं जुलाई में पचास लाख लोग नौकरी से हाथ धो बैठे। इनके सर्वे के अनुसार ये संख्या इजराइल और स्वीडन की कुल जनसंख्या से भी ज़्यादा है।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन और एशियाई विकास बैंक के जॉइंट रिपोर्ट के मुताबिक बरोज़गारी का सबसे ज़्यादा असर युवाओ पर पड़ा है, ये अकड़ा लगभग 60 लाख युवाओ का है।

क्या कर रही सरकार

केंद्र सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जुलाई को एक जॉब पोर्टल की शुरुआत की थी. इसपर 40 दिनों में 69 लाख लोगों ने नौकरी के लिए अप्लाई किया लेकिन नौकरी पानेवालों की संख्या बहुत ही कम है।

मोदी सरकार की तरफ से आत्मनिर्भर स्किल्ड इंप्लॉय इंप्लॉयर मैपिंग (ASEEM) पोर्टल लॉन्च किया गया था. इसपर काम ढूंढनेवाले और काम देनेवाले दोनों थे. खबर के मुताबिक, नौकरी ढूंढ रहे सिर्फ 2 प्रतिशत लोगों को काम मिल पाया. वहीं 69 लाख प्रवासी मजदूरों में से 1.49 लाख लोगों को काम की पेशकश हुई लेकिन कोरोना काल में सिर्फ 7,700 ही जॉइन कर पाए।

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक, 14 अगस्त से 21 अगस्त के बीच 7 लाख से ज्यादा लोगों ने रजिस्टर किया. वहीं इस हफ्ते में सिर्फ 691 को नौकरी मिली। डेटा के मुताबिक, इस पोर्टल पर 514 कंपनियां रजिस्टर हैं. इनमें से 443 ने 2.92 लाख जॉब्स पोस्ट कीं. इसमें से 1.49 लाख को नौकरी की पेशकेश की गई. इस जॉब पोर्टल पर 77 फीसदी नौकरियां 5 राज्यों के लिए हैं. इसमें कर्नाटक, दिल्ली, हरियाणा, तेलंगाना और तमिलनाडु शामिल हैं।

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