बिहार में बाढ़ है लेकिन मीडिया और सरकार मस्त नींद में पड़ी है

बाढ़ की मार, बिहार में बुरा हाल

बिहार में बाढ़ का कहर अभी भी जारी है। कुछ क्षेत्रों में भले ही पानी कम हुआ हो पर अभी भी ऐसे है जहां पानी लाबलब भरा है और लोगों का बुरा हाल है। राज्य के 16 जिलों के 130 प्रखंडों में अभी भी बाढ़ का पानी फैला हुआ है, जिससे करीब 83 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हैं। बाढ़ से अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि आठ लाख हेक्टेयर में लगी फसल पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूब गए हैं।


और पढ़ें- बिहार में बाढ़ है लेकिन नीतीश कुमार को सिर्फ़ चुनाव की चिंता है


शनिवार को बिहार के कोसी नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। वीरपुर बैराज के पास सुबह छह बजे कोसी का जलस्तर जहां 1.91 लाख क्यूसेक था, वही आठ बजे तक यह बढ़कर 1.95 लाख क्यूसेक हो गया था। इधर गंडक नदी का जलस्तर भी 2 लाख क्यूसेक पर स्थिर बना हुआ है। और बागमती नदी के जलस्तर में मामूली सी गिरावट आई है। फिर भी राज्य की सारी नादिया जलस्तर में खतरे के निशान से ऊपर है।

आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव रामचंद्र नायडू ने बताया कि बिहार के 16 जिलों के कुल 130 प्रखंडों की 1,303 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हुई है। जिस कारण यहां रहने वाले करीब 83 लाख लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि इन इलाकों में 11 राहत शिविर खोले गए हैं, जहां करीब 12 हजार से ज्यादा लोग रह रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि बाढ़ के दौरान इलाकों में विभिन्न घटनाओं में 25 लोगों की मौत हुई है। बाढ़ में सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्र दरभंगा रहा जहां 11 लोगों की मौत हुई है।

मुज़फ्फरपुर में छह, पश्चिम चंपारण में चार और सारण, सिवान तथा खगड़िया में दो-दो लोगों की मौत हुई है। दरभंगा में जहा बाढ़ से 20.82 लाख लोग प्रभावित हैं वही मुजफ्फरपुर में 19.69 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। अन्य प्रभावित 16 जिलों में सीतामढी, शिवहर, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, खगड़िया, सारण, समस्तीपुर, सिवान, मधुबनी , मधेपुरा और सहरसा शामिल हैं।

ये बात छुपी नही है कि बिहार की ज़्यादातर आबादी किसानी कर के अपना पेट पालती है, और बाढ़ ने आठ लाख हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन पर लगी फसल बर्बाद की है। कृषि विभाग के मुताबिक, राज्य के 251 प्रखंडों में आठ लाख हेक्टेयर से ज्यादा में लगी फसलों को अतिवृष्टि और बाढ़ से नुकसान पहुंचा है। इसमें सबसे अधिक क्षति मुज़फ्फरपुर जिले में हुई है, जहां 16 प्रखंडों के 1.08 हेक्टेयर भूमि में लगी फसलों को नुकसान पहुंचा है। उल्लेखनीय है कि विभाग ने सभी जिलों से फसलों के नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग ने 10 अगस्त को खरीफ अतिवृष्टि एवं बाढ़ग्रस्त प्रखंड की रिपोर्ट तैयार की है। कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में किसानों को हुए इस नुकसान का आकलन अभी प्रारंभिक है। फसलों को कितना नुकसान हुआ, इसका सही आकलन बाढ़ का पानी उतरने के बाद ही आएगा। यह भी संभव है कि पानी उतरने पर पता चले कि पूरे खेत में बालू पड़ गया है, जिससे किसानों को आगे भी खेती करना कठिन हो जाएगा।

क्या कर रही सरकार

नीतीश सरकार ने बाढ़ से प्रभावित 9,62,617 परिवारों के खाते में 577.57 करोड़ की राशि स्थानांतरित की है। प्रत्येक परिवार को राहत के तौर पर 6 हज़ार रुपये दिए गए हैं। अपर सचिव ने ये बताया कि सभी बाढ़ प्रभावित जिलों में एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की 33 टीमें राहत एवं बचाव का कार्य कर रही हैं। इसके अलावे बाढ़ प्रभावित इलाकों में कुल 198 सामुदायिक रसोई घर चलाए जा रहे हैं, जिसमें प्रतिदिन करीब 1 लाख 60 हज़ार लोग भोजन कर रहे हैं। बिहार सरकार ने 5 लाख 47 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है, पर ये अकडे प्रभावित आकड़ो से काफी कम है। आपको बता दें कि राहत शिविर के नाम पर बिहार में फिलहाल सिर्फ 11 शिविर चलाए जा रहे हैं, जिसमें 12 हजार 479 लोगों ने शरण ली है।

लेकिन सवाल ये है कि जहां पर बिहार में 83 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं वहां पर सिर्फ़ और सिर्फ़ 6 लाख लोगों के लिए ही सामुदायिक किचन का निर्माण किया गया है। राहत शिविर के नाम पर सिर्फ़ 6 राहत शिविर ही बनाये गए हैं। 83 लाख लोग और सिर्फ़ 6 राहत शिविर, अच्छा मज़ाक है मुख्यमंत्री जी। अभी राहत शिविर में 6 हज़ार से भी कम लोग रह रहे हैं।

Digiqole Ad Digiqole Ad

Kritika Gupta

Related post