भारत- एक ऐसा देश जहां औरतें देवी मानी जाती हैं और फिर उन्हीं का बलात्कार होता है

आज की तारीख़ में भारत एक ऐसा मुल्क बन चुका है जहां अपराधों की गिनती नहीं की जा सकती, रोज़ हज़ारों-सैकड़ों मामले दर्ज होते हैं, मुकदमे शुरू होते हैं, सालों केस चलते हैं, किसी को न्याय मिल जाता है, किसी को नहीं मिल पाता किसी को मिल कर भी कहीं विलुप्त हो जाता है। क्या यही है प्रजातंत्र? क्या यही है सुशासन? लोगो की संवेदनशीलता कहां गई?भारत- एक ऐसा देश जहां औरतें देवी मानी जाती हैं और फिर उन्हीं का बलात्कार होता है।


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महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध तो अनन्त लगते हैं, जो कभी ख़त्म हो नए हो सके। यौन शौषण, बलात्कार, छेड़छाड़ जैसे संगीन अपराधों के लिए देश की न्याय प्रणाली के पास कोई कड़ा कानून नहीं है। कभी यदि इन मामलों पर ज़ोर दिया जाता है तो मंत्रिमण्डल केवल कानून को बदलने की बात करता है, कोई कहता है कि सहमति से यौन सम्बन्ध बनाने की उम्र घटाकर 16 साल की जाए तो कुछ लोग इसका विरोध करके मामला ही बन्द करवा देते हैं। पर मामला ये है कि इस बात से इन अपराधों को रोकने या ख़त्म करने का हल कहां निकलता है।


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महिलाओं की सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी?

सवाल उठता है एफ़आईआर की क्या देख कि आधी आबादी की सुरक्षा की जिम्मेदारी क्या केवल सरकार और पुलिस की बनती है। महिलाओं की सुरक्षा में समाज का क्या कर्तव्य बनता है। हम एक ऐसे समाज में रहते है जहां साड़ियों से महिलाओं का शोषण किसी नए किसी रूप में होता चला आए रहा है, महिलाएं कभी खुद को किसी पुरुष से प्रधान होने का हक नहीं मांगती हैं बल्कि वो तो केवल अपना अधिकार मांग रही हैं, क्योंकि इस समाज में केवल पुरुष नहीं महिलाएं भी रहती हैं और उनके अधिकारों की रक्षा करना इस सभी का धर्म है।

इनकी गिनती में कोई सुधार नहीं:-

  • 30साल में कन्या भ्रूण हत्या के 1.2 करोड़ मामले दर्ज हुए।
  • दिल्ली में बलात्कार के मामले और तेज़ी से बढ़े हैं।
  • महिलाओं का देह व्यापार और भीख मंगवाने जैसे गंभीर अपराधों के लिए महिलाओं का अपहरण हुआ।
  • साल 2018 में कुल मिलाकर देश में 50.74 लाख अपराध दर्ज किए गए हैं।

यूपी में तेज़ी से घटनाओं में वृद्धि हुई है जहां साल 2015 में अपराधों की कुल संख्या 35,908 रही वहीं साल 2017 में कुल संख्या 56,011 मामले दर्ज किए गए।

दिल्ली में महिलाओं के प्रति अपराधों के मामलों में कुछ गिरावट देखने को मिली जैसे की साल 2015 और 2016 में संख्या 17,222 और 15310 दर्ज की गई जबकि 2017के मामले और कम होकर 13,076 सामने आई।

एमपी में अपराध बढ़े हैं और वहीं राजस्थान में कम मामले सामने आए, 2017 में एमपी में 29788 मामले दर्ज हुए जबकि राजस्थान में 25,993मामले देखने को मिले। इन जगहों पर पिछले दो सालों में 2017की अपेक्षा ज्यादा मामले सामने आए थे।

बच्चे नहीं हैं सुरक्षित:-

भारत में साल 2016 में एक लाख पांच हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए और वहीं 2017 में ये मामले एक लाख तीस हजार तक पहुंच गए, यानी कि कुल 28%बढ़कर मामले सामने आए।

महिलाएं यकीनन आत्मा निर्भर हुई है, जिस तरह से वे है क्षेत्र में आगे बढ़ी हैं और बाढ़ रही हैं, पुरुषों से कंधे से कन्धा मिलाकर चलना सीख रही हैं उसी प्रकार वो अपने खिलाफ हो रहे अपराधों समझ कर उनके खिलाफ आवाज़ उठाना भी सीख रही हैं। पर हमारे समझ की सोच महिलाओं को आगे नहीं बढ़ने दे रही अन्ततः उन्हें चूल्हा चौका सीखा कर परिवार संभालना सीखते हैं कभी ये नहीं सिखाया कि आगे बढ़ के किसी का विरोध कैसे किया जाए हमेशा ये कहते है कि शान रहना सीखो,

समझ जो संवेदनशीलता महिलाओं से उम्मीद करता है उन्हें वहीं संवेदनशीलता पुरुषों में जागृत करनी चाहिए।

– श्रिया मिश्रा 

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