सीवर मज़दूर, जिनके लाशों के ऊपर चढ़कर प्रधानमंत्री सेल्फ़ी लेते हैं

सफाई कर्मचारियों की क्यों हो रही मौत?

भारत में पिछले कुछ सालों में सीवर में साफ़-सफ़ाई करने के दौरान ज़हरीली गैस से दम घुटने से हज़ारों सफाई कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। देश में लगातार सफ़ाई कर्मचारियों की मौत हो रही है, सरकार के आदेशों के अनुसार इनकी जान जोखिम में डाली जा रही है, और जबकि इनके सुरक्षा के लिए कोई भी इंतज़ाम नहीं किए जा रहे हैं, परिवार के सवाल उठाने पर परिवार वालों को मुआवज़ा देने की बात तो होती है लेकिन कितने कर्मचारियों की मौत हुई है इसका सही-सही आंकड़ा सामने नहीं रखा जाता है।


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इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश:-

जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मार्च 2014 में सफाई कर्मचारी आन्दोलन बनाम भारत सरकार मामले में आदेश जारी किया था कि 1993 से अब तक सीवर में दम घुट कर मरने वाले लोगो की पहचान की जाए और उनके परिवारों को खोज कर उन्हें 10 लाख रुपए का मुआवज़ा दिया जाए। परन्तु अभी तक सरकार ने मृतकों की जानकारी ना ही खोजी और ना ही जारी किया है, आयोग के पास भी सिर्फ मृतकों की गिनती है उनके पहचान का कोई अता पता नहीं है।

आयोग को पता ही नहीं है कि मृतक कौन है क्या नाम है इनके किनको मुआवज़ा मिला और किनको देना अभी बाकी है, जबकि आयोग की असिस्टेंट डायरेक्टर यासमीन सुल्ताना का कहना है कि धीरे धीरे इन लोगो की पहचान और मुआवज़े से जुड़ी जानकारी निकलने का कान हो रहा है। उन्होंने बताया कि आयोग ने राज्यों को पत्र लिख कर मरने वाले लोगो की जानकारी मांगी है और किन्हें कितना मुआवज़ा देना है उसका भी हिसाब मांगा है लेकिन अबतक राज्यों ने केवल संख्या ही भेजी है।

ये हैं आंकड़े:-

  • आंकड़ों के हिसाब से सीवर में दम घुटने से सबसे ज़्यादा सफ़ाई कर्मियों की मौत तमिलनाडु में हुई है जो कि 194 है।
  • जबकि दूसरे स्थान पर गुज़रा है, जहां पर 122 कर्मचारियों की मौत सीवर में दम घुटने के कारण हो गई है।
  • आयोग के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में 54, कर्नाटक में 69, उत्तर प्रदेश में 61, दिल्ली में 39, राजस्थान में 38, पंजाब में 29, और पश्चिम बंगाल में 10, सफाई कर्मचारियों की सीवर की सफाई करते हुए मौत हो गई।
  • हाल ही में दिल्ली के मोती नगर इलाके के डीएलएफ ग्रीन्स के परिसर में पांच सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि ताज्जुब की बात ये है कि उनमें से कोई भी व्यक्ति पेशे से सफ़ाई कर्मचारी नहीं था।

समाज की सोच उन्नति या पतन:-

समाज में रहते है समाज को वो भी भारतीय समाज को समझना बहुत मुश्किल कार्य है, जहां आप एक तरफ से देखे तो ऐसा लगेगा कि समाज में बहुत बदलाव आ रहा है, जबकि वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कह रही है। हमारे समाज में सफाई करने के लिए एक वर्ग को चुन लिया गया है और साड़ियों से यही होता आ रहा है। जो समाज उन्नति की बात करता है, जो समाज बेटियों और पिछड़े वर्गों को आगे लाने की बात करता है वहीं समाज ऐसे कार्य भी करता है। इनमे अन्तर क्या इनमे सच्चाई क्या ये आप लोग तय कीजिए कि आगे आपको करना क्या?

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Shriya Mishra

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