इतिहास में पहली बार जीडीपी में इतनी अधिक गिरावट, सरकार की लापरवाही सामने आई

सरकार ने सोमवार को लॉकडाउन तिमाही यानी अप्रैल-जून 2020 के जीडीपी आंकड़े जारी किए. चालू वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी ग्रोथ रेट -23.9 फीसदी दर्ज की गई। भारतीय अर्थव्यवस्था में बीते 40 साल में पहली बार इतनी बड़ी गिरावट आई है। कोरोना महामारी के चलते देशभर में लागू लॉकडाउन से पूरी तरह ठप पड़ी आर्थिक गतिविधियों ने अर्थव्यवस्था को ज़ोरदार झटका दिया है।


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गौरतलब है कि सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 25 मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने 20 अप्रैल से विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए धीरे-धीरे लॉकडाउन में ढील देना शुरू किया था।

देश में साल 1996 में जीडीपी के तिमाही आंकड़े जारी होना शुरू हुए थे। तब से लेकर अब तक यह देश की जीडीपी में सबसे बड़ी गिरावट है। साथ ही यह एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से भी सबसे अधिक गिरावट है।

राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (NSO) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 5.2 फीसदी रही थी। अधिकांश रेटिंग एजेंसियों ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही की जीडीपी में गिरावट का अनुमान जताया था। बता दें, सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए 25 मार्च से देशभर में लॉकडाउन का एलान किया था। केंद्र सरकार ने 20 अप्रैल के बाद कुछ निश्चित आर्थिक गतिविधियों में लॉकडाउन से ढील देने की शुरुआत की थी। वित्त वर्ष 2018-19 में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.1 फीसदी की दर से बढ़ी थी. जबकि 2019-20 में अर्थव्यवस्था की विकास दर 4.2 फीसदी रही थी।

NSO द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक पहली तिमाही के दौरान इंडस्ट्री में 38.1 फीसदी, सर्विस सेक्टर में 20.6 फीसदी, मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में 39.3 फीसदी ट्रेड और होटल में 47 फीसदी की  गिरावट रही है। वहीं एग्री सेक्टर में 3.4 फीसदी की बढ़त रही।

इसी तिमाही के दौरान कारोबारी गतिविधियों पर कोरोना संकट का सबसे गहरा असर देखने को मिला था, जिसका असर आंकड़ों के रूप में अब सबके सामने है। तिमाही के दौरान कई सेक्टर में लगभग शून्य गतिविधियां देखने को मिली। वहीं इस दौरान कृषि को छोड़कर कोई भी सेक्टर ऐसा नहीं रहा जिसमें कारोबारी गतिविधियां महामारी के पहले के स्तर के करीब भी पहुंच सकीं हों।

वैसे पिछले कुछ समय में भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। जो कि कोरोना संकट के साथ और बढ़ता जा रहा है। जीडीपी के आंकड़ों में कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिसिटी, गैस सप्लाई, खनन, कंस्ट्रक्शन, ट्रेड और कम्युनिकेशन, इंश्योरेंस, बिजनेस सर्विस, फाइनेंस और सार्वजनिक सेवाओं को शामिल किया जाता है।

सरकार गिरावट का दोष कोरोना को देगी लेकिन इससे सरकार की लापरवाही पर पर्दा नहीं पड़ेगा। इस पहले भी जीडीपी में गिरावट देखने को मिली है लेकिन सरकार उस समय भी सिर्फ़ 5 ट्रिलियन इकॉनमी का सपना दिखा रही थी। अब जब जीडीपी पूरे तरह से गिर चुकी है तब सरकार उसे कोरोना पर दोष दे रही है।

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