बिहार में नीतीश कुमार ने लगाया परियोजनाओं का अंबार, जनता सभी को ‘चुनावी जुमला’ ही समझें

बिहार विधानसभा चुनाव के दिन नज़दीक आ रहे है जिसके लिए सभी दल कमर कस तैयारी कर रहे है। इसी के उपरांत बीते शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पंचायत प्रतिनिधियों को याद दिलाया कि क्या हाल था पहले और उसके बाद वार्ड सदस्य से लेकर हर घर नल का जल से सम्बंधित अनुरक्षकों का अनुदान दोगुना कर दिया।


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उन्होंने ‘हर घर नल का जल’ योजना के अंतर्गत और हर घर तक पक्की गली नाली’ योजना के तहत विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन किया. हालााकि, ये परियोजनाओं उनके दावे के अनुसार इस साल के अक्टूबर महीने तक पूरी कर ली जाएगी. हालांकि, उन्होंने माना कि जब इस परियोजना पर काम शुरू किया गया था, विभिन्न एजेंसियों और विभागों के बीच तालमेल के अभाव के कारण कई जगहों पर काम की गति काफ़ी धीमी रही। गौरतलब है कि जल संसाधन विभाग की 23 योजनाओं का उद्घाटन करने के साथ-साथ 7 अन्य योजनाओं का शिलान्यास और कार्य आरंभ किया। इनमें सिंचाई और बाढ़ प्रक्षेत्र की कई योजनाएं शामिल है, यह सारी बाते उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कही।

अपने भाषण में उन्होंने कहा कि विभिन्न परियोजनाओं जैसे विद्यालय का निर्माण हो या नली गली या हर घर नल का जल का काम हो, इसके पूरा हो जाने से पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियो का मान सम्मान बढ़ा है।

किनकिन योजनाओं की हुई घोषणाएं?

नीतीश कुमार ने इस कार्यक्रम में वार्ड क्रियान्वयन समिति के लिए वार्षिक सहायता 12 हज़ार से 24 हज़ार करने की घोषणा की। वहीं हर घर के पेय जल के रेटेनर को मासिक एक हज़ार से दो हज़ार की बढ़ोतरी की। नीतीश हर कार्यक्रम के मंच से जैसे जैसे उनकी मांगों को मानते जा रहे हैं, उससे साफ़ है कि वो पूरी तरीक़े से चुनावी मोड में हैं।

उन्होंने यह भी आश्वासन दिलाया कि राज्य के सभी घरों में इस वर्ष के अंत तक स्वच्छ पेयजल की सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी. कुमार ने कहा कि यह कार्य राज्य के कई हिस्सों में महामारी और बाढ़ के कारण बाधित था, लेकिन अभी भी राज्यभर में कुल 89 लाख घरों में पाइप से जलापूर्ति उपलब्ध करने का लक्ष्य है।

नीतीश कुमार इन सब वादों के बीच ये बोलना भी नही भूले की कुछ कार्य वो अपने “अगले कार्यकाल” में पूरा करेंगे।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि देश के लिए 2024 तक इसी तरह के लक्ष्य के निर्धारित किये गए हैं।

विदेशी विशेषज्ञों से वर्चुअल बातचीत के दौरान नीतीश कुमार ने कहा कि हर खेत तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाना उनका लक्ष्य है, जिसे वह अगले कार्यकाल में पूरा करेंगे।

बताया गया कि सिंचाई की प्रमुख परियोजनाओं के तहत ढाढर अपसरण योजना का भी उद्घाटन किया, इसके अंतर्गत गया जिला के फतेहपुर, वजीरगंज, टांकुप्पा और मोहरा प्रखंड में 6931 क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के अंतर्गत झंझारपुर मुख्य शाखा नहर का भी उद्घाटन किया। यह योजना विभाग द्वारा तय समय से पहले ही पूरी कर ली गई थी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगे बताया कि तटबंध पर सड़क निर्माण से बाढ़ में राहत, सुरक्षा और आवागमन और भी सुलभ हो जाएगा। इसके तहत पटना मुख्य नहर के बारून से भूसौली तक 122 किलोमीटर के पथ का चौड़ीकरण और पक्कीकरण का कार्य पूरा किया गया है। इससे पटना से औरंगाबाद के बीच एनएच 98 पर चलने वाले छोटे वाहनों के लिए यातायात का एक अलग सड़क भी उपलब्ध हो गया है। इस योजना से औरंगाबाद, अरवल और पटना जिला के लोगों को लाभ मिलेगा।


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बाढ़ प्रबंधन की बाढ़ प्रबंधन सुधार की योजना के तहत बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायक केंद्र अनिसाबाद पटना में स्थापित डेटा केंद्र का भी मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया। बताया गया कि इस वर्ष कई नदियों का जलस्तर रिकॉर्ड पर पहुंचने के बावजूद, राज्य में बाढ़ की विषम परिस्थिति को संभालने में बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायक केंद्र और गणितीय प्रतिमान केंद्र (मैथमेटिकल मॉडलिंग सेंटर) का काफी योगदान रहा है। जल संसाधन विभाग के कई अभिनव (इनोवेटिव) प्रयोग जल संसाधन विभाग द्वारा स्थापित मैथमेटिकल मॉडलिंग सेंटर ने इस बार मॉडल स्टडीज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग करते हुए, सभी प्रमुख नदियों के जलस्तर और जलस्राव के अलावा बारिश का अगले 72 घंटे तक सटीक पूर्वानुमान जारी कर रहा है। इसकी वजह से विभाग के इंजीनियर, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों को समय रहते अलर्ट प्राप्त हो रहा है। यही वजह है कि तटबंध को सुरक्षित रखने और आवश्यकतानुसार लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद मिल रही है।

फिजिकल मॉडलिंग सेंटर की स्थापना के तहत इसी कड़ी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत वीरपुर और सुपौल में एक फिजिकल मॉडलिंग सेंटर की स्थापना की जा रही है। पहले जब भी किसी नदी से जुड़ी योजना पर कार्य होता था तब, जल संसाधन विभाग के इंजीनियर को सीडब्ल्यूपीआरएस पुणे जाना पड़ता था। बिहार में भारत के दूसरे भौतिक प्रतिमान केंद्र की स्थापना के बाद हिमालय से बहने वाली नदियों से होने वाले बाढ़ की समस्या के निदान के साथ-साथ, सिंचाई सृजन परियोजना के मॉडलिंग का कार्य अब यही हो जाएगा। इससे ना केवल बिहार बल्कि उत्तर भारत के सभी राज्यों को मॉडलिंग संबंधित सुविधा प्राप्त होगी।

गौरतलब है कि बाढ़ प्रबंधन की बाढ़ प्रबंधन सुधार की योजना के तहत बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायक केंद्र अनिसाबाद पटना में स्थापित डेटा केंद्र का भी मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया।

 

आपको बता दें कि इस साल के अंत तक बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में हर राजनीतिक दल जनता को लुभाने की कोशिश में जुटी हुई है। अभी तो चुनाव की तारीखों का भी ऐलान नहीं हुआ है लेकिन बिहार में चुनावी बयानबाजी, चुनावी वादे और चुनावी सरगर्मी साफ तौर पर दिखने लगी है। इसी को आगे बढ़ते हुए सीएम नीतीश कुमार ने एक और घोषणा की थी कि यदि उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आती है तो वह राज्य के सभी गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ेंगे। वहीं बिहार में हर घर के पेय जल के रेटेनर को मासिक एक हज़ार से दो हज़ार की बढ़ोतरी की. नीतीश हर कार्यक्रम के मंच से जैसे जैसे उनकी मांगों को मानते जा रहे हैं, उससे साफ़ है कि वो पूरी तरीक़े से चुनावी मूड में हैं।

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Kritika Gupta

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