रिया चक्रवर्ती मामले की रिपोर्टिंग में जो जुनून मीडिया दिखा रही है वो बाकी मुद्दों में गायब है

बीते रविवार को जब रिया चक्रवर्ती सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) पहुंची तब वहां पर मीडिया कर्मियों की भीड़ जमा थी। रिया के पहुंचते ही सभी मीडियाकर्मी अपना अपना कैमरा और माइक लेके उनको चारों ओर से घेर लिया और धक्का मुक्की करने लगे। मीडियाकर्मियों ने कोरोना के सारे नियम तोड़ते हुए भीड़ जमा की और ना ही कोई फिज़िकल डिस्टेंस था और ना ही कीजिए तरह का सेनिटाइज़ेशन, साथ ही उन लोगों ने पुलिस और एक्ट्रेस रिया को भी नियमों का पालन करने नहीं दिया। एनसीबी के दफ़्तर के बाहर का नज़र देखकर है अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वहां पर मौजूद लोगो की क्या दशा हुई होगी।


और पढ़ें- मीडिया ने जितनी फ़ेक न्यूज़ सुशांत सिंह राजपूत के मामले में फैलाई है उससे अब मीडिया पर भरोसा करना मुमकिन नहीं है


कवरेज में क्या है ट्रेंडिंग?

आज कल न्यूज़ चैनलों में आप केवल सुशांत सिंह राजपूत को जस्टिस दिलाने की बातें चाल रही हैं, और यहां तक ही कई चैनलों ने तो एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती को अभी से आरोपी घोषित भी कर दिया है। लेकिन किसको पूरी सच्चाई पता है, कौन जनता है सुशांत कि मृत्यु के पीछे का कारण, कौन जानता है कि सुशांत ने आत्महत्या की है या फिर उनका मर्डर हुआ है? कोई कुछ नहीं जानता, सीबीआई अपने पैमाने पर इस मामले की जांच में लगी हुई है पर मीडिया ने तो इस मामले का फैसला भी कर दिया है, मीडिया चैनलों की माने तो उन्होंने रिया चक्रवर्ती को इतना टेलीकास्ट कर दिया है कि ना चाहते हुए भी लोग उससे ही गलत समझने लगे है। हम भारत में रह रहे हैं और भारतीय कानून के अनुसार किसी को भी तब तक दोषी नहीं माना जा सकता जब तक उसका पूरा गुनाह साबित ना हो जाए। तो मीडिया रिया को इतना प्रताड़ित कैसे कर सकती है, उनके हर वीडियो और फोटो को आधार बना कर उन्हें कैसे ट्रोल कर सकती है। भारतीय संविधान के अनुसार भारत में रहने वाले हर भारतीय को अपनी स्वतंत्रता से जीने का अधिकार है, और मीडिया कर्मियों ने उससे अधिकार का हन्नन किया है।

माल्या और मोदी के समय कहां था ये पत्रकारिता का जुनून?

पत्रकारिता का को यह जुनून है, जो मीडिया वाले आज इतना बढ़ चढ़कर हर चीज हर एक्शन को टीवी पर दिखा रहे हैं, जो हर एक सुबूत के अलग-अलग एंगल खोज के उन्हें सामने पेश कर रहे हैं, जनता को और राजनीतिक पार्टियों को उकसा रहे हैं। ये मीडिया वाले और इनका चैनल तब कहां था, जब देश को लूट कर देश का ही व्यक्ति भाग गया। जब ये खबर मिलती है कि विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी समेत 31 और कारोबारी देश का पैसा लूट कर भाग गए। ये जर्नलिस्ट तब क्यों नहीं थे इतने जोश और होश में कि ये इन सारे मामलों को भी इतनी ही गंभीरता से देख सके और इनकी भी इतनी बेफिक्री से कवरेज कर सके।

ये जो मीडिया का तरीका है, जिससे वे लोगों को अपनी ओर आकर्षित करना चाहते है, उसमे ये क्यों भुल जाते हैं कि लोगो तक सिर्फ़ मसाला है नहीं खबरें और जागरूकता फैलाना उनका पहला काम है। मीडिया ने तो कल रिया चक्रवर्ती के साथ किया ये कोई नई बात नहीं है, पहले भी जब कभी इन्हें कोई मसालेदार ख़बर मिलती है तो वे अपना सामान उठाकर पहुंच जाते हैं ग्राउंड लेवल कवरेज करने। मीडिया को अपने चैनल पर दिन भर कुछ दिखाने को चाहिए जिससे लोग देखे और पसंद करे, पर क्या हर ख़बर या ख़बर को दिखाने का हर तरीका सही होता है। सभी लोग टीवी देखते है, सबका अपना अपना पसंद होता है, पर सबको कुछ ऐसा चाहिए होता है जो देखने में मज़ा आए, और मीडिया इसी कर फोकस करती है।

– श्रिया मिश्रा

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