गिरती जीडीपी से मोदी जी हार गए लेकिन जीविका दीदी संभाल रही हैं आर्थिक मोर्चा

देश आज कोरोना के साथ साथ डूबे जीडीपी से भी लड़ रहा है। बाज़ारो का खस्ता हाल, पसरा सन्नाटा और रोज़गार के लिए धक्के खाते लोग। ऐसे विषम परिस्थितियों में बिहार में जीविका दीदी ने नई मिसाल कायम की है। उन्होंने बाज़ार में उतर कर राज्य में मास्क की आपूर्ति की स्थिति को संभाला, मास्क बनाने वाली बड़ी कंपनियों को चुनौती दी, ख़ुद की आर्थिक स्थिति को संभाले रखा और बीते मई माह में 2,346 जीविका समूह ने 24 लाख से अधिक मास्क का निर्माण कर दो करोड़ 30 लाख का कारोबार भी किया।

सस्ती दर पर बेहतर मास्क तैयार कर बाजार में उतार आपूर्ति की स्थिति को संभाला। इसके साथ ही अपनी आर्थिक स्थिति को भी बेहतर किया। पिछले चार महीने के दौरान दीदियों ने नौ लाख मास्क तैयार किया। इससे करीब 80 से 90 लाख रुपये का कारोबार किया है। इससे इन्हें करीब 40 लाख रुपये की अमदनी हुई है। जीविका दीदियों द्वारा बनाये गये मिथिला पेंटिंग वाले मास्क पूरे देश भर में धूम मचा रहे हैं।


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और भी कामो की मिली ज़िम्मेदारी

मई की अद्यतन रिपोर्ट में श्रवण कुमार की समीक्षा के अनुसार, जीविका समूह के महिलाओं को भुगतान भी हो चुका है। समूह की महिलाएं प्रतिदिन 5.6 हजार मास्क तैयार कर रही हैं। उन्होंने कई संस्थान, बैंक, दवा दुकान अन्य प्रतिष्ठानों में इसकी सप्लाइ भी की है। इनके मास्क की मांग धीरे-धीरे बाज़ार में बढ़ रही है। शनिवार को ग्रामीण विकास मंत्री ने लॉकडाउन में विभाग से संबंधित चलाये जा रहे कामों की समीक्षा की। उन्होंने मनरेगा के कार्यक्रम पदाधिकारी, जीविका के डीपीएम, बीपीएम एवं जिलों के उप विकास आयुक्तों से भी फोन पर जानकारी प्राप्त की। मनरेगा योजना से गरीबों को मिल रहे रोज़गार की जानकारी ली।

इतना ही नहीं थाना क्षेत्र के लेंगुरा पंचायत के माधोरामपुर गांव में शराब की बिक्री पर पाबंदी लगाने की गुहार जीविका दीदी ने रजौली थाना प्रभारी से आवेदन देकर की। जीविका दीदी माधो रामपुर की रीना कुमारी, रीता देवी, किरण देवी, सबरी देवी, पुनीता देवी के अलावा विक्की यादव समेत दर्जनों लोगों ने आवेदन देकर शराब की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है। जीविका दीदियों ने बताया कि हमारे गांव के ग्रामीण जनता एवं जीविका दीदी के कहने पर भी गांव के शराब धंधेबाज धंधा बंद करने के बजाय और ज़ोर शोर से चला रहे हैं।

कठिन समय से जूझते हुए भी जीविका दीदियों ने अपनी उद्यमिता बनाए रखी है। गया में अब उन्होंने एलईडी बल्ब बनाने की एक फैक्ट्री डाली है। सरकार ने इस फैक्ट्री के लिए डोभी (गया) में 18 हजार वर्ग फुट जमीन और भवन भी दे दिया है। अगले महीने से यहां 9 वाट के एलईडी बल्ब का उत्पादन शुरू हो जाएगा। खास बात है कि यह बल्ब बाज़ार में प्रचलित अन्य ब्रांडों के बल्ब से काफी सस्ता और टिकाऊ होगा। उन्होंने  बल्ब के उत्पादन के लिए अपनी कंपनी के वायर (जीविका वूमेन इनीसिएटिव रिन्यूवल एनर्जी) नाम की कंपनी भी निबंधित करा ली है। ग्रामीण महिलाओं की यह कंपनी ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण को बचाते हुए ग्रीन ऊर्जा की अवधारणा को साकार करेगी। आम लोगों को महंगे बिजली उपकरण खरीदने से बचाने के लिए उनकी फैक्ट्री में होम लाइटिंग सिस्टम का भी उत्पादन होगा, जिसे वे रियायती दरों पर बचेंगी।

दुकानों पर भी जीविका दीदियों की धाक

राज्य के विभिन्न स्थानों जैसे गया, नवादा , भोजपुर, औरंगाबाद आदि स्थानों में जीविका दीदियां सौर ऊर्जा के उपकरणों से संबंधित दुकानें चला रही हैं। 224 दुकानें चल रही हैं। यहां कार्यरत दीदियों को सौर उपकरणों की एसेम्बलिंग में महारत हासिल है। तकनीकी जानकारी आईआईटी मुंबई से दी गई है।

अब महिलाओं पर किसी भी तरह की आथिक पाबंदी नहीं

जब अपनों ने साथ छोड़ा, उस वक्त जीविका ने हाथ थामा। यह कहानी है गया जिले के मोहनपुर प्रखंड के करजरा गांव की सविता देवी की। पति और पत्नी बचपन से ही दिव्यांग हैं। ऐसे में शादी के कुछ साल तक ससुराल और मायके लोगों ने संभाला, लेकिन बाद में उन्होंने भी साथ छोड़ दिया. उस वक्त से सविता जीविका समूह से जुड़ी है और सतत् जीविकोपार्जन योजना (एसजेवाइ) का लाभ लिया। एक समय ऐसा था, जब वह दाने-दाने को मोहताज थीं। लेकिन, आज उनकी खुद की किराने की दुकान है। बेहतर आमदनी के कारण आज उनके दो बच्चे स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं।

वैसे तो 2019 में सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत कम्यूनिटी रिसोर्स पर्सन का एक समूह उनके घर आया  इस योजना में सविता देवी का चयन हुआ, जिसके बाद उन्हें किराना दुकान खोलने के लिए 20 हज़ार रुपये दिये गये। इन पैसों की मदद से उन्होंने किराना दुकान खोली और आज उनकी यह दुकान काफी बेहतर कर रही हैं।

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