रघुवंश बाबू का जाना एक अभिभावक को खोने जैसा है

बीते रविवार यानी 13.09.2020 को महान समाजवादी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रघुवंश सिंह (रघुवंश बाबू) का दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एआईआईएमएस) में 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मृत्यु से तीन दिन पहले ही उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने लालू प्रसाद यादव जो की राजद के प्रमुख है उन्हें पत्र लिख कर इस्तीफा दिया था।

                                  (लालू प्रसाद के साथ रघुवंश बाबू)

रविवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार में शुरू होने वाली पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की कुछ योजनाओं का वर्चुअल समारोह कर रहे थे तभी उन्हें डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह के निधन की खबर मिली तो उन्होंने इस पर गहन शोक संवेदना प्रकट की और कहा कि रघुवंश बाबू के जाने से बिहार एवं देश की राजनीति में शून्य उत्पन्न हुए है। वे गरीबी को करीब से जानते थे, उन्होंने हमेशा ज़मीन से जुड़कर ही राजनीति की है, गरीबों का भला समाज की उन्नति और विकास का ही काम किया है।

पिछले दिनों रघुवंश बाबू का एक पत्र काफी चर्चा में रहा है, उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी एक पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने वैशाली जो की दुनिया का सबसे पहला गणतंत्र है उसके सामना का मुद्दा उठाया। इस पत्र के बाद पूरे देश में गणतंत्र कि जननी वैशाली की चर्चा जोरों से होने लगी।

रघुवंश बाबू ने कल भी एक पत्र मुख्य मंत्री नीतीश कुमार के नाम आईसीयू से ही लिखा था। उस पत्र में उन्होंने वैशाली में कई सारे विकास और वैशाली को एक उच्च स्तर दिलाने की बात की थी। उन्होंने लिखा कि वैशाली के तालाबों को जल जीवन हरियाली अभियान से जोड़ कर उनका विकास एवं विस्तार करने का आग्रह किया। और उन्होंने लिखा कि विश्व के प्रथम गणतंत्र होने के सम्मान में महात्मा गांधी सेतु रोड पर हाजीपुर के पास एक भव्य द्वार बनाकर उस पर मोटे अक्षरों में “विश्व का प्रथम गणतंत्र वैशाली द्वार” अंकित करने का आग्रह किया।

इसी के साथ उन्होंने राष्ट्रीय कवि दिनकर को भी संबोधित करते हुए कहा कि उनके द्वारा रचित वैशाली से संबंधित कविताओं को बड़ी बड़ी दीवारों पर मोटे अक्षरों में लिखवाय जाए ताकि लोग उन्हें दूर से ही पढ़ सके और उनकी इच्छा है कि ‘बज्जीनां सत अपरीहानियम् धम्मा’ के अनुसार सातों धम्मों का उल्लेख जगह जगह पाली हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा में हो साथ ही वैशाली के उद्धारक जगदीशचंद्र माथुर की प्रतिमा लगाने का भी आग्रह किया  था।

डॉ. रघुवंश बाबू की कुछ आखिरी इच्छाएं भी थी, जिनका उन्होंने उल्लेख किया था। वो चाहते थे कि मनरेगा योजना के  तहत किसानों के खेतों में काम करने की व्यवस्था की जाए। और उन्होंने कहा कि वैशाली चोदते समय भगवान बुद्ध ने एक भिक्षा पात्र स्मृति के रूप में दिया था, जो कि इस समय अफगानिस्तान में है वो मुख्य मंत्री से आग्रह करते हैं कि उससे वापिस लाया जाए। तथा वे वैशाली को उसके अधिकार का सम्मान भी दिलाना चाहते हैं, उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को मुख्य मंत्री खुद आकर वैशाली में राष्ट्रीय ध्वज फहराए, और साथ में राजकीय समारोह का आयोजन भी हो।

इन बातों को जानने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार से आग्रह किया कि रघुवंश बाबू ने पत्रों में जो भी इच्छाएं प्रकट की है वैशाली के सम्मान एवं विकास के लिए उन सभी पहलुओं पर चिंता व्यक्त करें और सभी लोग मिलकर उन्हें पूरा करने का हर संभव प्रयास करें।

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Shriya Mishra

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