सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के 2 करोड़ रुपये के लोन पर कामत कमेटी की रिपोर्ट पेश करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश 

सुप्रीम कोर्ट ने  न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने आरबीआई की किस्त स्थगन की योजना के तहत एक मार्च से 31 अगस्त के दौरान कर्जदारों की बकाया मासिक किस्तों पर बैंकों द्वारा ब्याज लगाए जाने के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अपना वक्तव्य रखा।

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और यही नहीं एक हफ्ते के अंदर केन्द्र और रिजर्व बैंक से कहा कि वे कर्ज पुनर्गठन के बारे में के वी कामत समिति की सिफ़ारिशें कोर्ट के समक्ष पेश करें।

ICICI बैंक के पूर्व सीईओ केवी कामत की अध्यक्षता में गठित की 

ज्ञात हो  कि भारतीय रिजर्व बैंक ने कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा मुश्किल वाले 26 सेक्टर के बारे में केवी कामत समिति की रिपोर्ट जारी की थी। इस समिति ने अपने रिपोर्ट में 26 सेक्टरों के कर्जदारों के कर्ज की रीस्ट्रक्चरिंग के बारे में कई सुझाव दिए थे। 


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इन 26 सेक्टर में ऑटो, एविएशन, रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन, पावर, हॉस्पिटलिटी आदि शामिल हैं। कामत समिति के रिपोर्ट के अनुसार  कर्जधारकों के लिए कोई समाधान को अंतिम रूप देने से पहले बैंकों को इन 26 सेक्टर के वित्तीय पैरामीटर का खास ध्यान रखना होगा। 

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ये निर्देश महामारी की वजह से 6 महीने के लिये ऋण की किस्त स्थगन की घोषणा के तहत 2 करोड़ रुपये तक के व्यक्तिगत कर्ज तथा छोटे एवं मझोले उद्योगों के कर्ज पर चक्रवृद्धि ब्याज माफ कर उन्हें राहत देने के वित्त मंत्रालय के निर्देश के बाद दिये गए हैं।

बैंक 24 घंटे के भीतर जरूरी कदम उठाएंगे

रियल एस्टेट क्षेत्र की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी ए सुन्दरम ने कहा कि इस क्षेत्र को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने  भारतीय बैंक संघ, कंफेडरेशन आफ रियल एस्टेट डिवलेपर्स एसोसिएशन और अन्य पक्ष कारों को न्यायालय ने केन्द्र के हलफ़नामे पर अपने अपने जवाब दाखिल करने की छूट दी है।

सरकार ने अपने हलफ़नामा में कहा था कि वह इस संबंध में अनुदान के लिये संसद से मंजूरी प्राप्त करेगी और उसका यह प्रयास एमएएमई के लिये 3.7 लाख करोड़ रुपये के समर्थन के अतिरिक्त होगा।

कोर्ट द्वारा यह पूछे जाने पर कि बैंक योजना को कैसे और कब लागू करेंगे, आईबीएम की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि आरबीआई के इस मुद्दे पर परिपत्र जारी करने के बाद बैंक 24 घंटे के भीतर जरूरी कदम उठाएंगे।

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