छत्तीसगढ़ भूमिहीन अनुसूचित जनजाति और परंपरागत वन निवासियों को ज़मीन उपलब्धता के मामले में सबसे ऊपर

छत्तीसगढ़ के भूमिहीन अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी   

भारत  के कई प्रमुख राज्य जैसे मिज़ोरम,आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ , झारखंड एवं अन्य राज्यों  में आदिवासियों के हित व आज़ादी से पहले उनसे लिए गए जंगलों में रहने का अधिकार और उनकी स्थिति सुधारने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए व कानून बनाए।

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उनमें से  एक वनाधिकारी अधिनियम 2006 भी हैं। इसके तहत भूमिहीन आदिवासियों और परंपरागत वनवासियों को भू स्वामित्व देने का प्रावधान है। 

इस मामले में अब कांग्रेस शासित प्रदेश छत्तीसगढ़ अग्रणी राज्य बन गया है। इस राज्य में अब तक कुल 4 लाख 41 हजार से अधिक व्यक्तिगत और 46 हजार से अधिक सामुदायिक वन अधिकार पत्र जारी कर 51.06 लाख ग्रामीणों को भू स्वामित्व का लाभ दिया गया है।

छत्तीसगढ़ में  प्रति व्यक्ति वन अधिकार पत्र धारक को औसतन 1 हेक्टेयर वन भूमि पर मान्यता प्रदान की गई है, जो देश के अन्य राज्य की तुलना में सबसे अधिक है।


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किसानों और आदिवासियों के विकास के प्रति छत्तीसगढ़ का सकारात्मक रुप

छत्तीसगढ़ में नए सरकार के गठन के बाद से ही किसानों और आदिवासियों के विकास के प्रति सरकार सकारात्मक रुप से काम कर रही है। हाल ही में महात्मा गांधी के 151 वी जयंती पर प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से 5 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र के लगभग 13 सौ सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण अधिकार पत्रों का वितरण किया था।

और इसके साथ ही सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों को ग्राम सभाओं को प्रदान किया गया था।वितरित किए गए 4 लाख 41 हजार से अधिक व्यक्तिगत वन अधिकार पत्रों का रकबा 9 लाख 41 हजार 800 एकड़ से अधिक है। और  इसी प्रकार 46 हजार से अधिक सामुदायिक वन अधिकार पत्रों का रकबा 41 लाख 64 हजार 700 एकड़ से अधिक है।

इन सब में सबसे ख़ास बात यह है कि सरकार सिर्फ खेती के लिए जमीन ही नहीं दे रही बल्कि इसके साथ ही साथ खेती के लिए कई योजनाओं के तहत सिंचाई की व्यवस्था, खाद-बीज तथा  कृषि उपकरण की उपलब्धता  का भी पूरा ध्यान रख रही है। इसी कड़ी में सरकार ने  एक लाख 49 हजार 762 लाभार्थी भूमि  का समतलीकरण एवं मेढ़ बंधान कार्य भी पूरा करवाया है। इस पूरी भूमि का  का रकबा 58 हजार हेक्टेयर से अधिक है।  

आजीविका में स्थायित्व के साथ आमदनी में  वृद्धि के लिए भी छत्तीसगढ़ ने कई कदम उठाए 

छत्तीसगढ़ सरकार ने इस सब के अलावा गरीब परिवारों  के हित के लिए और भी बहुत से काम करवा रही है और इन सब में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 95 हजार से अधिक ग्रामीणों को आवास उपलब्ध करवाना,  2 लाख से अधिक किसानों सम्मान निधि प्रदान करवाना, उनके भूमि में फसल की उत्पादकता क्षमता बढ़ाने के लिए सही तरीके से सिंचाई की व्यवस्था,  वन अधिकार पत्र धारकों के खेतों के मेढ़ों पर फलदार और वनोपज के पौधे लगवाना  आदि शामिल है।

एक तरफ जहां किसान अपने अधिकारों और अन्याय के विरोध में सड़को पर उतरने को मजबुर है, वहां छत्तीसगढ़ में सरकार द्वारा उठाएं जा रहे किसानों के हित में यह कदम बहुत ही सराहनीय है।

और उम्मीद की जा सकती है कि दूसरे राज्य भी अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी परिवारों को उनके अधिकार देकर  उनके आय बढ़ाने और  सम्मान से जीने के अधिकार उन्हें देंगे।

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