सुप्रीम कोर्ट के बालगृहों के बच्चों को उनके घर भेजने के मामले में एनसीपीसीआर ने जारी किया नोटिस

बच्चों को घर भेजने के संबंध में नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कमिशन फॉर प्रोडक्शन आफ चाइल्ड राइट्स (एनसीपीसीआर) को 8 राज्यों, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मिज़ोरम, महाराष्ट्र, मेघालय और केरल में रहने वाले बच्चों को घर भेजने के संबंध में नोटिस जारी किया है। 

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दरअसल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) में तमिलनाडु, मिज़ोरम, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल, मेघालय, महाराष्ट्र और तेलं


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 पीठ ने पत्र का संज्ञान लेते हुए एनसीपीसीआर को नोटिस जारी किया

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की अगुवाई वाली पीठ ने पत्र का संज्ञान लेते हुए एनसीपीसीआर को नोटिस जारी किया और मामले को 24 अक्टूबर को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया। 

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पीठ ने अपने आदेश में कहा, “राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को नोटिस जारी किया जाये। एनसीपीसीआर को निर्देश दिया जाता है कि वह न्याय मित्र के 8 अक्टूबर, 2020 के परिपत्र पर अपना जवाब दे।”

एनसीपीसीआर ने 24 सितंबर को जारी इस पत्र में कहा था कि प्रत्येक बच्चे को पारिवारिक वातावरण में बड़े होने का अधिकार है। आयोग ने कहा था कि इन संस्थाओं में रहने वाले बच्चों की हिफाज़त को लेकर व्यक्त चिंता के मद्देनज़र यह निर्णय लिया गया है।

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आपको बता दें, इस समय देश में 2.56 लाख बच्चे बाल गृहों में रह रहे हैं जिनमें से 1.84 लाख बच्चे (करीब 72%) इन आठ राज्यों के हैं।इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका में वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने न्यायालय के संज्ञान में पत्र लाते हुए कहा कि इन राज्यों में कोविड-19 महामारी अब भी है और नेशनल कमिशन फॉर प्रोडक्शन आफ चाइल्ड राइट्स (एनसीपीसीआर) को ऐसी स्थिति में यह पत्र जारी नहीं करना चाहिए था।

उन्होंने बाल गृहों में रह रहे बच्चों को वापस भेजने तथा उनके माता पिता को सौंपने के निर्देश पर चिंता जताई और कहा कि बच्चों को अभिभावकों के सुपुर्द करने का अधिकार किशोर न्याय कानून, 2015 की धारा 40(3) के प्रावधान के अनुरूप, माता पिता की बच्चे की देखभाल करने की स्थिति के निर्धारण के बाद ही आ सकता है।

अडिशनल सॉलिसिटर जनरल को जाँच के आदेश

शीर्ष अदालत ने केन्द्र की ओर से पेश अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्य भाटी से कहा है कि वह इस मामले में कोर्ट को केंद्र सरकार से निर्देश लेकर अवगत कराए। पीठ ने कहा, “अतिरिक्त सालिसीटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को निर्देश दिया जाता है कि वे निर्देश प्राप्त करें कि क्या बाल गृहों में रहने वाले बच्चों को वापस भेजने और परिवार को सौंपने के बारे में इस तरह का सामान्य निर्देश दिया जा सकता है?”

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सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के मद्देनज़र चिल्ड्रेन होम की स्थिति पर संज्ञान लिया था और सुनवाई का फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने मामले में संज्ञान लेते हुए गौरव अग्रवाल को कोर्ट सलाहकार बनाया था।

इस मामले में कोर्ट सलाहकार गौरव अग्रवाल ने अदालत को बताया कि कोविड महामारी का प्रकोप अभी देश भर में जारी है ऐसे में एनसीपीसीआर को इस तरह का लेटर नहीं जारी करना चाहिए।

कोरोना महामारी के मद्देनज़र देश भर में चिल्ड्रेन होम में बच्चों की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया था इसी मामले की सुनवाई चल रही है।

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sneha singh

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