पत्रकार प्रशांत कनौजिया इलाहाबाद हाईकोर्ट से 2 महीने बाद मिली ज़मानत

पत्रकार प्रशांत को मिली जमानत 

पत्रकार प्रशांत को 2 महीने बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट से ज़मानत मिल गई है। लखनऊ की सत्र अदालत ने उनकी जमानत को पहले खारिज कर दिया था जिसके बाद प्रशांत कनौजिया ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत अर्ज़ी दाख़िल की थी।

प्रशांत कनौजिया मामले में कौन सही कौन ग़लत - BBC News हिंदी

आपत्तिजनक ट्वीट करने के मामले में पत्रकार प्रशांत कनौजिया को 2 महीने बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है जिसके बाद उन्होंने राहत की सांस ली है। इससे पहले उन्होंने लखनऊ की सत्र अदालत में ज़मानत अर्ज़ी दाखिल की थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। 18 अगस्त को आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में दिल्ली में उनके आवास से उनकी गिरफ़्तारी हुई थी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में उन्हें गिरफ़्तार किया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट से प्रशांत को ज़मानत मिली 

जानकारी के अनुसार अब जाकर मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई है। पिछले महीने उत्तर प्रदेश सरकार ने पत्रकार की हाई कोर्ट में दायर ज़मानत याचिका पर विचार करने के लिए 4 हफ्ते का समय मांगा था। इसी कारण के चलते उन्हें 1 महीने और जेल में रहना पड़ा था।

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प्रशांत कनौजिया ने पहले अपनी ज़मानत याचिका लखनऊ के सत्र अदालत में दायर की थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था इसके 8 सितंबर को उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा 18 अगस्त को पत्रकार की गिरफ्तारी उनके दिल्ली के आवाज से हुई थी।हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद पत्रकार की पत्नी जगिशा अरोड़ा मीडिया से मुखातिब हुई और इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने इस कठिन वक्त में साथ देने वाले अपने तमाम शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया।


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प्रशांत द्वारा एक चित्र को छेड़छाड़ करके सुशील तिवारी को बदनाम करने की साजिश का आरोप

आपको बता दें कि इसी वर्ष 17 अगस्त को एक पुलिसकर्मी द्वारा पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज़ कराया गया था। कथित तौर पर एफआईआर में यह बातें सामने आई थी कि प्रशांत द्वारा एक चित्र को छेड़छाड़ करके सुशील तिवारी को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।

आपत्तिजनक ट्वीट में प्रशांत ने लिखा था कि “यह तिवारी का निर्देश है कि अयोध्या के राम मंदिर में शूद्र, ओबीसी, अनुसूचित जाति और जनजाति का प्रवेश निषेध होना चाहिए और सभी लोग इसके लिए आवाज उठाए”। जिसके बाद उन पर उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कार्रवाई की गई।

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पत्रकार पर कंप्यूटर संबंधित मामले में आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत भी मामला दर्ज करवाया गया था। गिरफ्तारी को लेकर प्रशांत कनौजिया का इतिहास पुराना रहा है। इससे पहले भी‌ 2019 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर किया गया एक पोस्ट को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार किया था। उस वक्त सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशांत को रिहा कर दिया गया था।

गौरतलब हो कि उस समय भी हजरतगंज थाना में उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था।उन पर आरोप लगा था कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आपत्तिजनक पोस्ट से उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। पत्रकार प्रशांत वर्ष 2016 से 2018 तक रिपोर्टर के तौर पर द वायर हिंदी की टीम का हिस्सा रह चुके हैं।

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Aparna Vatsh

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