हरियाणा जातीय हिंसा: 10 साल बाद मिर्चपुर के दलितों को मिले प्लॉट, लेकिन लाखों की कीमत पर न्याय का सफर अधूरा

 10 पहले मिर्चपुर में लोगो ने किया था पलायन

हरियाणा के मिर्चपुर गांव में आज से 10 साल पहले यानी कि 21 अप्रैल 2010 को जातीय हिंसा हुई थी। जहां पर दलित परिवारों के 18 घरों को आग के हवाले कर दिया गया, जिसमें एक 70 वर्षीय बुजुर्ग और उनके 17 साल के दिव्यांग बेटी कि उस आग में जलकर मौत हो गई। यह घटना लंबे समय तक अखबारों पर सुर्खियां बनी रही लेकिन इन लोगों को कई सालों तक न्याय नहीं मिला।

इस घटना की वजह से वहां के वाल्मीकि समाज के लोगों के मन में भय बैठ गया था। जिस वजह से 258 परिवार अपनी जान बचाने के लिए वहां से पलायन कर गए। इनमें से 100 परिवारों ने जहां हिसार शहर के बाहरी इलाके के सामाजिक कार्यकर्ता वेदपाल तंवर के फार्म हाउस में शरण ली। वहीं अन्य आजीविका की तलाश में शहर के अन्य जिलों में चले गए।

वेदपाल तंवर के फार्म हाउस में 100 परिवारों को मिली शरण

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बता दे, वेदपाल तंवर 10 सालों से इन पीड़ितों को अपनी तरफ से बिजली पानी की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इस विषय पर वे कहते हैं कि, “आज विजयश्री का दिन है, लेकिन इसके साथ ही वे यह भी कहते हैं कि सरकार ने प्लॉट देकर अच्छा काम किया है लेकिन अभी भी पीड़ित परिवारों को उनकी योग्यताओं के अनुसार नौकरी देने का काम भी किया जाना चाहिए।“


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मिर्चपुर में 10 साल बाद पीड़ितों को प्लॉट मिले, पर लाखों की कीमत पर

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इस घटना के 10 साल बाद अब वर्तमान सरकार ने 102 पीड़ित परिवारों के लिए प्लॉट्स की व्यवस्था की है। यह प्लॉट से हिसार शहर से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ढंढूर गांव कि साढ़े आठ एकड़ जमीन पर बसी है।इस कॉलोनी का नाम दीनदयाल पुरम है।दीनदयाल उपाध्याय RSS के विचारक और BJP के संस्थापक हैं।

हरियाणा सरकार ने पुनर्वास के लिए 4.56 करोड़ रुपए का बजट रखा है, जिसके तहत 258 दलित परिवारों का पुनर्वास करवाया जाएगा। सरकार पीड़ितों को कलेक्टर रेट पर प्लॉट मुहैया करा रही है जिसके तहत 80 गज प्लॉट के लिए 820रुपये  और 600 गज प्लॉट के लिए 5,778 के EMI का भुगतान करना होगा। यानी कि पीड़ितों को यह प्लॉट ब्याज पर उपलब्ध करवाए जाएंगे।

10 साल पहले यह हुआ था

आज से 10 साल पहले जो कुछ भी हुआ इसका डर साफ तौर पर पीड़ितों के चेहरों पर देखा जा सकता है। इस पूरे प्रकरण की शुरुआत के संबंध में 60 वर्षीय ओमप्रकाश बताते हैं कि कुछ नशे में धुत जाटों ने एक कुत्ते को ईंट से मारने की कोशिश की जिस पर मामूली कहासुनी हुई थी।

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लेकिन इसके बाद यह विवाद इतना बढ़ गया कि सैकड़ों जाटों ने वहां के दलित समाज के लोगों के घरों में आग लगा दी जिसमें झुलस कर एक विकलांग लड़की और उनके पिता की मृत्यु हो गई। इस मामले में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 33 युवकों की सजा हुई अन्य को बरी कर दिया गया।

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