बिहार चुनाव: तेजस्वी और नीतीश कुमार का आमना सामना, चुनावों में कितने सफल होंगे तेजस्वी यादव ?

31 साल के तेजस्वी का नीतीश से मुकाबला

बिहार चुनावों को लेकर जहां दिन करीब आ रहे हैं वही चुनावी सभाओं में नेताओं के बीच सियासी वार का दौर भी तेज होता जा रहा है। सभी उम्मीदवार सीटें हथियाने के लिए पुरज़रोर कोशिश करते हुए एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। बिहार चुनाव में सियासत के जंग के लिए दो चेहरे लोगों के समक्ष है। मुकाबला भाजपा-जदयू के गठबंधन एनडीए और राजद-कांग्रेस, वाम दलों के महागठबंधन के बीच है।मुख्यमंत्री पद पर काबिज नीतीश कुमार फिर से चुनावों में खड़े हैं। वहीं उनके समक्ष अब महागठबंधन का चेहरा यानी कि तेजस्वी यादव है, जिनकी उम्र सिर्फ 31 साल है।

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बिहार में तेजस्वी यादव आखिर कितने प्रभावी हैं। इस संबंध में कुछ पत्रकार अपनी राय देते है। पत्रकार उर्मिलेश का कहना है कि, “सत्ता विरोधी लहर के चलते नीतीश कुमार बहुत कमजोर विकेट पर खड़े हैं, लेकिन विपक्ष काफी कमजोर है जो एक और लोकप्रिय सरकार का कारगर ढंग से विरोध नहीं कर पा रहा। इसकी एक वजह तेजस्वी भी है क्योंकि आबादी के एक हिस्से को छोड़ दिया जाए तो बिहार में उनके व्यापक स्वीकार्यता नहीं है।

उप मुख्यमंत्री के तौर पर उनका बहुत छोटा कार्यकाल था, तो उनकी क्षमताएं सामने कभी नहीं आई। अगर उनके पिता लालू मैदान में होते तो भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद भी लोगों के प्रति अधिक भरोसा होता क्योंकि वह एक मंझे हुए नेता थे। लेकिन तेजस्वी के प्रति लोगों में अभी थोड़ा संकोच है इसकी एक वजह यह भी है कि उन्होंने कभी जमीन पर काम नहीं किया। विपक्षी नेता को गांव-गांव घूमना चाहिए लेकिन वह गायब रहे।“


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तेजस्वी ने उठाया रोजगार का मुद्दा

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तेजस्वी ने नीतीश सरकार की दुखती नस पर हाथ रख कर 10 लाख लोगों को रोजगार देने का वादा कर दिया है। बता दे, नीतीश सरकार पर रोजगार के मुद्दे को लेकर सवाल उठाया जाता है। वहीं अब तेजस्वी का यह दाव कितना सफल हो पाता है यह तो चुनावों में ही देखने को मिलेगा। जानकार कहते हैं कि 10 लाख युवाओं को रोजगार देने के तेजस्वी के दावे से उनकी छवि मतदाताओं के बीच में बदल रही है।

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लेकिन अब भाजपा-जदयू भी रोजगार के मुद्दे पर बैठ गई है। इस संबंध में पत्रकार उमेश कहते हैं कि, “तेजस्वी ने रोजगार का मुद्दा उठाया तो भाजपा-जदयू उनकी पिच पर आकर खेलने के लिए मजबूर हो गए हैं और कह रहे हैं कि हम भी रोजगार देंगे। सुशील मोदी एक भाषण में ढाई-तीन लाख लोगों को नौकरी देने की बात कह चुके हैं।“

लालू प्रसाद की छवि तेजस्वी की ताकत बनेगी या कमजोरी?

बिहार चुनावों में अब यह फैसला लेना कठिन हो गया है कि लालू प्रसाद यादव की छवि तेजस्वी के लिए एक वरदान बनेगी या उनकी कमजोरी। दरअसल, लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले पर सजा काट रहे हैं तथा चुनावी पोस्टरों में भी उनका चेहरा नहीं दिखाया गया है।

जानकारों का कहना है कि लालू के पुत्र होने का लाभ तेजस्वी को मिला है। जिस वजह से वह मुख्यमंत्री का चेहरा बन गए हैं। हालांकि, इसके साथ ही लालू के पुत्र होने का नुकसान भी है।

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