फ्लोराइड का समस्या झेल रहा बिहार को क्यों नहीं बनाया किसी ने चुनावी मुद्दा

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में यूं तो कई सारे मुद्दे हैं लेकिन एक अहम मुद्दे पर कोई बात नहीं कर रहा। गया शहर से 8 किलोमीटर दूर चूड़ी पंचायत के चुड़ामननगर गांव में हर परिवार का लगभग एक व्यक्ति पानी में मिले फ्लोराइड के चलते बीमार है। नीता बड़े-बड़े चुनावी वादे तो कर लेते हैं लेकिन साफ पानी जैसा बुनियादी सुविधा मुहैया नहीं करा पाते हैं।

बिहार: फ्लोराइड से बर्बाद होती पीढ़ियां चुनावी मुद्दा क्यों नहीं है

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग एक हफ्ता भी नहीं रह गया है। सारी पार्टियों ने अपनी एड़ी चोटी की जोड़ लगा दी है चुनाव को जीतने के लिए। लगभग सभी पार्टी का अपना अपना चुनावी मुद्दा है और वह उसी के सहारे चुनाव में अपना दांव पेंच पेश कर रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच एक बहुत अहम बाद सामने निकल कर आई और वह है फ्लोराइड की समस्या।


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गांव में पनप रही फ्लोराइड की समस्या

गया से थोड़ी ही दूर चुड़ामननगर गांव में लगभग हर परिवार का एक व्यक्ति पानी में मिले फ्लोराइड के कारण शारीरिक रूप से बीमार है। इस गंभीर समस्या पर ना तो राज्य सरकार ध्यान दे रहे हैं और ना ही कोई विपक्षी पार्टी इसके बारे में बात कर रहे हैं। चुनाव आते ही सारी पार्टियों के प्रतिनिधि अपनी घोषणा पत्र लेकर तो आ जाते हैं जिसमें कई तरीके के वादे सुनिश्चित किए जाते हैं लेकिन अंदर से वह कितने खोखले होते हैं या आज के जमाने में किसी से छुपा नहीं है।

बिहार: फ्लोराइड से बर्बाद होती पीढ़ियां चुनावी मुद्दा क्यों नहीं है

गांव के ही एक व्यक्ति की बात करते हैं जिनका नाम है कृष्णा मांझी। उनकी उम्र महज 35 साल की है लेकिन इतनी कम उम्र में भी वह बहुत ज्यादा उम्र दराज लगते हैं। उनकी गर्दन तक झुकी हुई है जिसकी वजह से वह किसी से नजर मिला कर बात तक नहीं कर पाते। वह कमर सीधी कर चल नहीं पाते और पैर की हड्डियां विचित्र ढंग से मुड़ी हुई एवं पतली है। कृष्णा की मां बाप नहीं है दो भाई तो है लेकिन वह साथ नहीं रहते। बीमार होने के कारण की शादी तक नहीं हो पाई। गांव की दूसरे व्यक्ति कृष्णा के बारे में बताते हैं कि वह 7-8 साल पहले बिल्कुल स्वास्थ्य थे। वह हमारे साथ फुटबॉल खेला करते थे लेकिन धीरे-धीरे वह बीमार पड़ते चले गए एवं शरीर में कई तरीके की परेशानियां आ गई जिसके बाद आज वह लाठी के सहारे चलते हैं।

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आपको बता दें कि इस गांव में कृष्णा मांझी जैसे एक व्यक्ति तो हर परिवार में मौजूद है। आज उन्हें विकलांग होने की समस्या साफ पानी ना मिलने के चलते हुई। दरअसल गांव के जल में जिसका सेवन गांव निवासी करते हैं उस में फ्लोराइड की मात्रा जरूरत से बहुत ज्यादा है। फ्लोराइड एक ऐसा मिनिरल है जो पृथ्वी के भीतरी भाग में पाया जाता है। जब यहां से पानी निकलता है तो इसके साथ फ्लोराइड भी आ जाता है। इसी का सेवन अगर अधिक मात्रा में किया जाए तो यह हमारे शरीर के लिए काफी हानिकारक साबित होता है। फ्लोराइड एक स्वस्थ व्यक्ति को भी विकलांग बनाने जितना खतरनाक है। इससे हड्डियां कमजोर और टेढ़ी हो जाती है।

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Aparna Vatsh

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