सांसद कैंटीन की जिम्मेदारी अब भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) को सौंपी जा रही

सांसद कैंटीन के लिए नए वेंडरों की खोज खत्म

सांसद में खाना खिलाने की जिम्मेदारी आखिरकार जुलाई में शुरू हुई सांसद कैंटीन के लिए नए वेंडरों की खोज खत्म हुई। अब सांसद को कैंटीन और रसोई घरों में खाना बनाने की जिम्मेदारी सौंपने के लिए दावेदार मिल गया है।

संसद भवन (फाइल फोटो)

आपको बता दें, सांसद कैंटीन की जिम्मेदारी अब भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) को सौंपी जा रही है। भारतीय रेलवे इस जिम्मेदारी को सन् 1968 से निभा रहा था। ज्ञात हो, भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) केंद्र सरकार की ही पर्यटन विंग है जो अशोका होटल समूह का संचालन भी करती है।

भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) पर सांसद में खाना परोसने का जिम्मा

दरअसल,सन् 1968 से लेकर अब तक भारतीय रेलवे करीब 52 साल से संसद परिसर में नेताओं को भोजन खिलाने की जिम्मेदारी उठा रहा था। लेकिन अब भारतीय रेलवे अगले महीने की 15 तारीख से इस जिम्मेदारी से मुक्त हो रहा है। आपको बता दें, अब या रसोईघर एवं कैंटीन को संभालने की जिम्मेदारी भारतीय पर्यटन निगम आईटीडीसी को दे दी गई है। 15 नवंबर से सांसद परिसर में राजनेताओं को भोजन कराने का जिम्मा अब केंद्र सरकार की ही पर्यटन बैंक भारतीय पर्यटन विकास निगम आईटीडीसी को सौंपा गया है।

52 साल तक संसद की कैंटीन चलाने के बाद अब खाना नहीं परोसेगा रेलवे, जानिए वजह | Railways will no longer serve food after running the canteen of Parliament for 52 years - Hindi Oneindia

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी है कि उत्तर रेलवे, जो पार्लियामेंट हाउस एस्टेट- कैंटीन, एनेक्सी, लाइब्रेरी भवन और विभिन्न पैंट्रियों- में खाना परोसने का सभी इंतजाम देखता था, उसे लोकसभा सचिवालय से एक पत्र मिला है। जिसमें उससे 15 नवंबर तक परिसर खाली कर कंप्यूटर, प्रिंटर, फर्नीचर सहित सभी तरह के उपकरण आईटीडीसी को सौंपने को कहा है। आपको बता दें, संसद और रेलवे के अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि करी है। उन्होंने बताया है कि फिलहाल आईटीडीसी सांसद परिसर में कैंटीन चलाएगा।


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सांसद की कैंटीन से सालाना 15 से 18 करोड़ रुपये का राजस्व

ख़बरों के मुताबिक, सांसद परिसर की कैंटीन, मेहमानों एवं हाउसस्टाफ के लिए भोजन काफी ठीक दामों में दिया जाता है और सांसदों की समिति ही सांसद में उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की देखरेख करती है। यह भी ज्ञात हो कि सांसदों की ही एक समिति संसद परिसर की कैंटीन के भोजन की दरें निश्चित करती है और इसी के साथ क्या भोजन दिया जाएगा, यह भी समिति ही निश्चित करती है।

संसद में भोजन परोसने की 52 साल पुरानी परंपरा का अंत, अब रेलवे नहीं चलाएगी कैंटीन

लेकिन मौजूदा लोकसभा की समिति का गठन अभी तक नहीं हुआ है, अधिकारियों ने बताया है कि सचिवालय प्रशासन के स्तर पर इस फैसले को अंतिम रूप दिया गया है। अधिकारियों ने बताया है कि संसद की कैंटीन से सालाना 15 से 18 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है

लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने संसद परिसर की कैंटीन पर पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल और आईटीडीसी के अधिकारियों से मुलाकात भी की थी। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि कैंटीन के लिए रेलवे के स्थान पर अन्य विकल्पों पर यूपीए के कार्यकाल में ही विचार शुरू हो गया था, उस समय मीरा कुमार लोकसभा अध्यक्ष थीं। संसद के एक अधिकारी का कहना है, “रेलवे के भोजन को लेकर आमतौर पर गुणवत्ता का सवाल उठता रहा है।”

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sneha singh

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