एडिटर्स गिल्ड ने मुंबई पुलिस द्वारा पत्रकारों पर दर्ज FIR पर उठाए सवाल, साथ ही रिपब्लिक टीवी को भी लगाई फटकार

एडिटर्स गिल्ड ने मुंबई पुलिस द्वारा पत्रकारों पर दायर FIR  पर उठाए सवाल

रिपब्लिक टीवी द्वारा फेक टीआरपी के लिए मीटर लगे घरों से साठगांठ सामने आने के बाद से शुरू हुई रिपब्लिक टीवी के टीम की मुश्किल दिन प्रति दिन  बढ़ती ही जा रही। इस मामले में रिपब्लिक टीवी और  मुंबई पुलिस कई दिनों से आमने-सामने हैं। इस मामले में अब एडिटर्स गिल्ड का भी बयान सामने आया हैं। गिल्ड ने अपने बयान में  मुंबई पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने से साथ ही रिपब्लिक टीवी को भी मर्यादा में रहकर रिपोर्टिंग करने की हिदायत दी हैं।

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एडिटर्स गिल्ड ने कहा अभिव्‍यक्ति के अधिकार का मतलब हेट स्‍पीच को बढ़ावा देने का लाइसेंस मिल जाना नहीं

सोमवार को एक बयान में गिल्‍ड ने कहा है कि पुलिस द्वारा ‘पत्रकारों को परेशान करना तत्‍काल बंद होना चाहिए।’ गिल्‍ड ने कहा है कि राज्‍य की ताकत का मनमाना इस्‍तेमाल पत्रकारों के हित में कभी नहीं हुआ है, न हो रहा है।

वहीं रिपब्लिक टीवी को हिदायत देते हुए गिल्‍ड ने सलाह दिया की, मीडिया की स्‍वतंत्रता और उसके कानून के दायरे में रहकर काम करने के बीच बैलेंस को बनाकर रखना जरूरी है।


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रिपब्लिक टीवी के एंकर-संपादकों पर भी केस दर्ज़ 

ज्ञात हो कि टीआरपी घोटाले में मुंबई पुलिस की तरफ से आरोपी बनाए जाने के बाद अब  मुंबई पुलिस ने  कथित तौर पर खुद  को  बदनाम करने का आरोप  लगाते हुए  रिपब्लिक टीवी के चार पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

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मुंबई पुलिस द्वारा दायर एफआईआर में  रिपब्लिक टीवी की एडिटोरियल टीम  शामिल हैं, जिन पर एनएम जोशी मार्ग पुलिस ने  एडिटोरियल टीम के खिलाफ पुलिस ऐक्ट 1922 की धारा 3 (1) और आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।  मुंबई पुलिस  के कर्मियों के बीच वैमनस्यता फैलाने के आरोप यह   केस दर्ज किया गया है। इस मामले में पत्रकारों को तीन साल तक हो सकती है सजा।

रिपब्लिक टीवी को गिल्‍ड से ‘फटकार’

एडिटर्स गिल्‍ड ने बयान में रिपब्लिक टीवी की कवरेज पर भी सवाल उठाते  मुंबई हाईकोर्ट, एनबीए द्वारा पहले दिए गए हिदायतों का ज़िक्र क़िया।  मुंबई हाई कोर्ट द्वारा कि गई टिप्पणी जिसमें सुशांत को  मौत की रिपोर्टिंग को लेकर कोर्ट ने  चैनल से सवाल किया था कि ‘क्या ये खोजी पत्रकारिता का हिस्सा है? लोगों से ये पूछना कि किसे गिरप्तार किया जाना चाहिए?’

हाईकोर्ट की टिप्पणी के साथ ही गिल्ड ने   न्‍यूज ब्रॉडकास्‍टर्स एसोसिएशन (NBA) के चैनल की रिपोर्टिंग से इत्‍तेफाक न रखने का भी जिक्र भी किया है। गिल्ड ने आगे कहा कि  रिपब्लिक टीवी के पत्रकारों के खिलाफ सैकड़ों एफआईआर देखकर उन्हें दुख है, और  अब  वक्‍त आ गया है कि चैनल जिम्‍मेदारी से व्‍यवहार करे और अपने पत्रकारों की सुरक्षा के साथ-साथ मीडिया की साख से समझौता न करे। गिल्‍ड ने पुलिस से भी यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उसकी जांच चैनल के पत्रकारों को नुकसान न पहुंचाए और गिरफ्तारी न हो।

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Shreya Sinni

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