बिहार चुनाव की  रैलियों में उमड़ती भीड़ – क्या होंगे नतीजे?

बिहार चुनाव के रैली में उमड़ी भीड़

बिहार राज्य में महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव की सभाओं में विशाल जनसमूह देखा जा रहा है। अब प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या रैलियों में उमड़ रही भीड़ के आधार पर जीत-हार का अंदाज़ा लगाया जा सकता है?

large number of people gathered at yogi adityanath rally in kaimur of bihar| बिहार चुनाव: योगी आदित्यनाथ की रैली में उमड़ी लोगों की भीड़, लोगों ने लगाए जय श्री राम के नारे |

भीड़ ने किया ध्यान आकर्षित

बिहार  राज्य  में  तेजस्वी यादव की सभाओं में जुटने वाली भारी भीड़ सबका ध्यान खींच रही है।केवल बिहार ही नहीं, तेजस्वी की भीड़ भरी सभाओं की चर्चा पूरे देश में है जिससे राज्य में सत्ता परिवर्तन की अटकलों को बल मिल रहा है।

अगर हम पुराने अनुभवों की बात करें तो चुनावी सभाओं और रैलियों की भीड़ का गणित रोचक रहा है। कई मौकों पर इसने सत्ता परिवर्तन करके भी दिखाया है, तो अनेक मौके ऐसे हैं जहां यह वोट में नहीं बदली है और भीड़ जुटाने वाले नेता की बुरी हार हुई है।

Tejashwi Yadav Rahul Gandhi BiharHisua Election Rally Update; Coronavirus Social Distancing In Bihar Assembly Election 2020 | अब तेजस्वी-राहुल की रैली में उमड़ी लोगों की भीड़, मास्क ना दूरी, यहां ...

क्या चुनाव एकतरफा है?

अगर हम देखे तो जान पायेंगे कि भीड़ तो बाकी नेताओं की सभाओं में भी अच्छी-खासी उमड़ रही है। चिराग पासवान और असदुद्दीन औवेसी की सभाओं में बहुत भीड़ दिखती है, इसलिए सभी जगह भीड़ का होना इस दावे को खारिज करता है कि चुनाव तेजस्वी या महागठबंधन के पक्ष में एकतरफा है।


और पढ़ें :दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमण लोगों की संख्या बढ़कर 44,772,845 हो गई


अगर हम स्थानीय पत्रकार विष्णु नारायण से सुने तो जान पायेंगे  कि भीड़ सिर्फ तेजस्वी की सभाओं में ही नहीं जुट रही है। पप्पू यादव हो या चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा, सबकी सभाओं में भारी भीड़ है।विष्णु जो की स्थानीय पत्रकार हैं वे बताते हैं कि भीड़  कई जगह बंट रही है। जिसका अर्थ है वोट भी बंट रहा है।

rjd leader tejashwi yadav campaign in biharBihar assembly election 2020: क्या चुनाव प्रचार में उमड़ी भीड़ को वोट में तब्दील कर पाएंगे तेजस्वी? - rjd leader tejashwi yadav campaign in bihar

जैसे कि पप्पू यादव, उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान की सभाओं में भी भारी भीड़ हो रही है. जिसे देखकर लगेगा कि यह बदलाव वाली भीड़ है और संबंधित नेता ही बदलाव का असली चेहरा है। यही तेजस्वी के मामले में है।

राज्य पत्रकारों का वक्तव्य

जैसे  की वरिष्ठ पत्रकार निराला जी  कहते हैं कि, सिर्फ चुनावी सभाओं की भीड़ के आधार पर यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि बिहार की जनता का रुझान किस ओर है।उदाहरण के तौर पर हम देख सकते हैं कि 2015 में जब राजद और जदयू साथ मिलकर चुनाव लड़े थे, तब भी भाजपा की सभाओं में भीड़ में कोई कमी नहीं थी, लेकिन वह भीड़ भाजपा के लिए नतीजों में तब्दील नहीं हुई।

Massive crowd gathered at Muzaffarnagar Save Democracy rally Jayant Chaudhary reached the stage with Khap Chowdhury - मुजफ्फरनगर में लोकतंत्र बचाओ रैली में उमड़ी भीड़, खाप चौधरियों के साथ मंच ...

साथ ही साथ वे यह भी कहते हैं कि यदि भीड़ से ही चुनावी नतीजों का अनुमान लगाएं तो  चिराग पासवान की सभाओं में जुट रही भीड़ तेजस्वी की सभाओं की भीड़ को पार कर रही है, तो क्या मानें कि चिराग सरकार बनाने वाले हैं?

अगर पत्रकार उमेश कुमार रे की सुने तो वे बताते हैं कि, ‘तेजस्वी ने जिन मुद्दों को उठाया है, उनसे लोग खुद को जुड़ा पा रहे है।वे मुद्दे लोगों के ज़हन में उतर गए है। हर आदमी रोजगार की बात कर रहा है। यह भी बड़ी वजह है कि लोग बड़ी संख्या में तेजस्वी को सुनने जा रहे है।’वे अपनी बात पूरी करते हुए आगे कहते हैं, ‘लेकिन भीड़ देखकर चुनावी नतीजों का आकलन नहीं लगा सकते।

Bihar Election 2020 Update, Patna Coronavirus News; BJP JDU RJD Leaders Not Mainteins Maintain Social Distancing | दिल्ली से पटना की दौड़ में भूल गए कोरोना, चुनाव में न जांच का समय

तेजस्वी ने जब रोजगार की बात शुरू की, तो खासकर युवा वर्ग को कुछ उम्मीद दिखी मगर फिर भी वोट पाने का पैमाना भीड़ से नहीं हो सकती। भीड़ तो लोकसभा चुनावों के दौरान कन्हैया कुमार की रैलियों में भी थी,वह वोट में नहीं बदली।

कई बार तो मतदाता वोटिंग लाइन में खड़े-खड़े ही अपना मन यह देखकर बदल लेता है कि पोलिंग बूथ पर हवा किसके पक्ष में है। फिर यह भीड़ तो सभाओं की है।इस बात पर सभी एकमत हैं कि भीड़ मतदाता का मानस बनाने और बदलने का काम करती है और इस लिहाज से तेजस्वी ने एनडीए पर बढ़त बना रखी है।

Digiqole Ad Digiqole Ad

democratic

Related post