बिहार के गांव ने बिजली के लिए किया सालों इंतज़ार, विकास के लिए भी इंतज़ार नहीं करना चाहते

बिहार के गांव देश के अति पिछड़े राज्यों की सूची में

बिहार के युवा काफी मेहनती माने जाते है, उनकी भागीदारी सेना, आईएस ऑफिसर या किसी भी बड़े सरकारी पद में बहुत अधिक होती है। इन सबके बावजूद बिहार देश के अति पिछड़े राज्यों की सूची में आता है। यहां सभी लोगो को आधारभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है।  लगभग सभी गांव की यही है हालत।

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यह कहानी है भागलपुर के दो गांव कोयली और खुटहा की, इन्हे लोग सैनिक गांव के नाम से भी जानते है। यहां लगभग सभी घर पक्के के बने हुए हैं। हर घर के सामने मोटरसाइकिल या कार नजर आ जाएगी और इनपर बिहार पुलिस या फिर इंडियन आर्मी की प्लेट भी लगी होगी। इस गांव के लोगों ने अपनी जीवन शैली का विकास तो लोगों ने कर लिया है लेकिन गांव का हाल बिल्कुल ठीक नहीं है। पूरे जगह में  नाले खुले पड़े हुए है,  स्वास्थ्य सेवा और स्कूल भी सिर्फ नाम मात्र  है। दोनो गांवों में लगभग 10 हजार लोग रहते हैं लेकिन यहां एक भी एटीएम मौजूद नहीं हैं।

1991 के खूनी संघर्ष के बाद से चर्चा में 

1991 कोइली-खुटहा के गांव के लोगों के बीच संघर्ष की शुरुआत बिजली के खंभे से शुरू हुई थी जिसके दर्द अब भी लोग नहीं भूले है। कोइली में बिजली लगनी थी जिसके लिए पोल गिराए गए थे लेकिन खुटहा के कुछ लोगों ने रातों रात पोल अपने गांव के रास्तों में गड़वा लिया। इसके विरोध में  कोइली के कुछ लोगों ने खुटहा के कुछ ग्रामीणों पर केस दर्ज करा दिया था।


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दोनों गावों के 20 लोगों की हत्या  और 27 को उम्रकैद की सजा हो चुकी

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थाने में केस दर्ज होने के बाद यह  विवाद बढ़ गया। एक दिन दोनों जगह के लोगों में बहस होने पर दोनों गांव के लोग समचिचोरी पोखर के पास इकट्ठा हुए और फिर लड़ाई बढ़ते बढ़त  हिंसा पर बात आ गई , उस दिन पूरे दिन-रात गोलीबारी होती रही। दोनों ओर से राइफल, मास्केट समेत अन्य हथियारों से जमकर फायरिंग हुई।  पुलिस सूचना मिलने पर गांव आने के लिए निकली। लेकिन अंदर प्रवेश की हिम्मत नहीं कर सकी। पुलिस बाहर ही खड़ी रही। इस खूनी संघर्ष में कोइली गईं  के  एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई थी। इसके बाद यह  दुश्मनी सालों तक चलती रही और कई लोगों ने अपनी जान गंवाई।

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दोनों  ही गांव अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। कोयली  नाथनगर और खुटहा कहलगांव में है  और दोनों ही गांवो में यादव जाती के लोगों की बहुमत है, और सालो से  यादव वोट ज्यादातर आरजेडी के पक्ष में हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में जदयू राजद के गठबंधन की वजह से यहां जेडीयू उम्मीदवार लक्ष्मीकांत मंडल ने जीत दर्ज़ की थी।

इस बार यहां के जदयू विधायक को एलजेपी प्रत्याशी अमर सिंह कुशवाहा से  कड़ी टक्कर मिल रही है। वहीं राजद ने  यहां से अली अशरफ सिद्दीकी को उतारा है। कहल गांव में कांग्रेस के शुभानंद मुकेश चुनाव लड़ रहे हैं तो वहीं एनडीए की तरफ से बीजेपी के पवन कुमार मैदान में हैं। 

पहले से लोगों में एक दूसरे के प्रति दुश्मनी अब कम हो चुकी है और उन्हें अफसोस है कि लड़ाई झगड़े की वजह से दोनों गांवों में पिछले 30 साल में विकास नहीं हो सका। ग्रामीणों का  कहना है, नीतीश ने बिजली तो दे दी लेकिन यह तो देनी ही थी। हमने सालों तक बिजली का इंतजार किया लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर चीज के लिए इंतजार ही करना होगा।

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Shreya Sinni

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