क्या महागठबंधन का बिहार में सरकार बनाना बदलाव का संकेत है?

लगभग सारे एग्जिट पोल में महागठबंधन को है बड़ी बढ़त

बिहार चुनाव का तीनों चरण समाप्त हो चुका है और इसके नतीजे 10 नवंबर को आने बाकी हैं। यह चुनाव आरोप-प्रत्यारोप वाला चुनाव था जहां पक्ष विपक्ष ने कोई मौका नहीं छोड़ा एक-दूसरे पर निशाना साधने का। एक ओर जहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने कार्य के दम पर वोट मांगने की कोशिश की और जंगलराज को याद दिलाते हुए विरोधियों पर निशाना साधा तो दूसरी ओर महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार की दुखती नस पर हाथ रख दिया, जो थी बेरोजगारी और लगभग अपने सारे जनसभाओं में सरकार बनने के साथ ही 10 लाख नौकरी देने का वादा कर बिहारियों को लुभा लिया।

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हालांकि जनता किसके समर्थन में है और किसके‌ खिलाफ यह तो 10 नवंबर को ही पता चलेगा लेकिन नतीजों से पहले किए गए एग्जिट पोल में लगभग हर जगह महागठबंधन को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है।

बिहार में महागठबंधन की सरकार बनते दिखाई दे रही है और एनडीए की करारी हार देखने को मिल सकती है अगर परिणाम एक्जिट पोल के नतीजों से मेल खाएं।

हालांकि कुछ महीने पहले‌ तक किए गए ओपिनियन पोल में एनडीए की सरकार बनती दिखाई दे रही थी लेकिन बिहार चुनाव को समझना इतना सरल नहीं है। कहीं ना कहीं बिहारी नीतीश कुमार के शासनकाल से परेशान थे और बदलाव चाहते थे।


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मुख्यमंत्री पद की पहली पसंद बन गए हैं तेजस्वी यादव

नीतीश कुमार के 15 वर्ष के शासनकाल में यूं तो उन्होंने कई बिहारियों के दिल में अपनी जगह बना ली। बिहार में उनके जैसा कद्दावर नेता मिलना मुश्किल हो चुका था। कई वर्षों से चली आ रही ट्रेंड में नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री पद की पहली पसंद हुआ करते थे लेकिन इस वर्ष मामला थोड़ा अलग है।

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किए गए सर्वे के मुताबिक आज़ के दिन में मुख्यमंत्री की पहली पसंद तेजस्वी यादव है ना कि नीतीश कुमार। यह थोड़ा अटपटा लगता है क्योंकि नीतीश कुमार की व्यक्तित्व एक साफ छवि वाले नेता की है। उन्होंने अपने सारे कार्यकाल में बिहार की जनता को कई तोहफे दिए फिर चाहे वह सड़क का मामला हो या बिजली का लेकिन कहते हैं ना अगर जेब में पैसे नहीं होंगे तो लोग सड़क और बिजली का करेंगे क्या? कुछ यही हाल है।

बिहार में बिहारी जनता का बेरोजगारी के दांतो तले दबे हुए आज़ सारे बिहारी बदलाव चाहते हैं और शायद इसीलिए उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर तेजस्वी यादव को अपनी पहली पसंद घोषित कर दी है।अगर यह सर्वे के नतीजे सही साबित होते हैं तो नीतीश कुमार समेत पूरे एनडीए को आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है।

लगभग सभी एग्जिट पोल में महागठबंधन को बढ़त मिलती दिखाई दे रही

आपको बता दें एग्जिट पोल लोगों के अनुमान के मुताबिक दिखाया जाता है और इसी के मद्देनजर सर्वे होते हैं इससे चुनावी नतीजों का कोई लेना देना नहीं है। कई बार एक्जिट पोल में आए नतीजों से उलट चुनावी नतीजे होते हैं लेकिन यह कहना भी एग्जिट पोल के नतीजे और चुनावी रिजल्ट एक जैसे होते हैं।

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ख़ैर बिहार की जनता ने तो अपना फैसला सुनिश्चित कर लिया है जिसे सार्वजनिक आगामी 10 नवंबर को कर दिया जाएगा लेकिन उससे पहले किए गए लगभग सभी एग्जिट पोल में महागठबंधन को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। एवीपी-सी वोटर के पोल के मुताबिक एनडीए को 108 से 128 के बीच सीटें मिली है और महागठबंधन को 108 से 131 सीटें।

रिपब्लिक जन टीवी में एनडीए को 91 से 117 सीटें मिलती दिखाई दे रही है दूसरी तरफ महागठबंधन को 118 से 138 सीटें मिलती दिखाई दे रही है। एग्जिट पोल में भी यही आंकड़ा दिखाई दे रहा है। इंडिया टीवी के सर्वे में एनडीए को 116 सीटें वही महागठबंधन को 120 सीटें मिलती दिखाई दे रही है।

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Aparna Vatsh

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