बिहार में महागठबंधन को बहुमत नहीं मिल पाया, लेकिन तेजस्वी यादव ने पिता की अलग छवि बनाने में कामयाब

बिहार चुनाव में तेजस्वी यादव ने पिता लालू यादव से अलग छवि बनाने में कामयाब

बिहार विधानसभा चुनाव के इतिहास में 2020 का यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक रहेगा। कोरोना महामारी के बीच देश यह पहला चुनाव था। और इस संकट के बावजूद लोग अपने घरों से निकाल एक बेहतर भविष्य के लिए बूथ पर वोट करने गए।

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इसके साथ ही यह शायद पहली बार ही ऐसा चुनाव हुआ जो विकास, बेरोजगारी, गरीबी, नौकरी आदि पर लड़ा गया। और इस बात का श्रेय कहीं ना कहीं लालू यादव के बेटे और राजद के नेता तेजस्वी यादव को जाता है।

बिहार चुनाव के नतीजे साबित करते है कि राज्य ने युवा नेता तेजस्वी के वादों पर भरोसा जताया

लालू यादव के राज को आज भी लोग जंगलराज के नाम से याद करते है। लेकिन तेजस्वी यादव ने इस चुनाव में अपने पार्टी का एजेंडा युवाओं का रोजगार और विकास को रखा। विपक्ष के नेताओं ने लगभग हर रैली में तेजस्वी को उनके पिता लालू यादव और उनके राज्य से तुलना करते हुए उनके द्वारा किए गए वादों को दिखावा बताया।

लेकिन चुनाव नतीजे से साफ हो गया है कि भले ही उनके महागठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिली लेकिन उन्होंने एनडीए को कड़ी टक्कर दी और उन्हें एक मजबूत नेता के तौर पर स्थापित किया है।


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तेजस्वी के नेतृत्व ने राजद को सबसे बड़ी पार्टी बनाया

दिन और रात भर सबकी निगाहें नतीजे पर थी जहां दोनों ही गठबंधन एक दूसरे को लगातार कड़ी टक्कर दे रहे थे। और फिर चुनाव आयोग द्वारा  विधानसभा की सभी 243 सीटों के परिणाम बुधवार को तड़के चार बजे के बाद घोषित किए गए जिसमें एनडीए ने 125 सीटें जीतकर बहुमत का जादुई आंकड़ा प्राप्त कर लिया। लेकिन  तेजस्वी यादव की आरजेडी 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। 

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शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि एक युवा लड़का जिसने कल ही अपनी जिंदगी के 30 साल पूरे किए और वो बिहार में जिस तरह से टक्कर दे रहा है। ये आने वाली राजनीति के लिए अच्छा संकेत है। तेजस्वी के नेतृत्व में मंगलराज शुरू होगा।

महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव ही सबसे बड़ा चेहरा साबित हुए

राजद नेता लालू यादव इन दिनों चारा घोटाले के मामलों में झारखंड के राँची में जेल में हैं। ऐसे में उनके बेटे तेजस्वी यादव ने पूरा चुनाव प्रचार अभियान ख़ुद ही संभाला था। उन्होंने राजनीतिक तौर पर राष्ट्रीय जनता दल के पोस्टरों से लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की तस्वीरों की जगह नहीं दी और केवल ख़ुद को रखा और खुद को अलग साबित करने की कोशिश की जिसका परिणाम सामने है।

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बिहार की जनता ने उनको पसंद किया। इस पूरे चुनाव के दौरान उन्होंने अकेले 251 से भी ज्यादा चुनावी सभाओं को संबोधित किया था। राजद 144 सीटों पर, कांग्रेस 70 सीटों पर और वाम दल 29 सीटों पर चुनाव मैदान में थी।

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भले ही सबसे बड़ी पार्टी बनाने और बहुमत के लिए 122 में से सिर्फ 110 सीटें ही तेजस्वी के नेतृत्व में आ सकी लेकिन आने वाले चुनाव काफी निर्णायक होंगे। क्यों की नीतीश ने पहले ही इस चुनाव को अपना आखिरी चुनाव बता चुके है, ऐसे में तेजस्वी एक युवा नेता के तौर पर राज्य की पहली पसंद हो सकते है।

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Shreya Sinni

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