मिजोरम के विस्थापित ब्रू समुदाय ने त्रिपुरा सरकार से आवासीय प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की

मिजोरम के विस्थापित ब्रू समुदाय 

वर्ष 1997 में  मिजोरम में  हुई जातीय हिंसा के दौरान ब्रू समुदाय के 30 हज़ार से भी ज्यादा लोग लोग मिज़ोरम छोड़कर त्रिपुरा के कुछ ज़िलों में बस गए थे।आपको बता दें सरकार ने इसी साल जनवरी में उनको त्रिपुरा में ही बसाने के निर्णय के बाद उन्होंने सरकार से अनुसूचित जाति और स्थायी आवासीय प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की है।

(फोटोः पीटीआई)

मिजोरम ब्रू विस्थापित पीपुल्स फोरम (एमबीडीपीएफ) के महासचिव ने  लिखा पत्र

ब्रू शरणार्थियों का मुद्दा कई वर्षों से लंबित था, वर्ष 1997 में जातीय तनाव के कारण बड़ी संख्या में ब्रू परिवारों ने मिज़ोरम से भागकर त्रिपुरा में शरण ली थी। त्रिपुरा में इन परिवारों को स्थायी शिविरों में रखा गया था। 16 जनवरी 2020 को केंद्र सरकार, त्रिपुरा तथा मिज़ोरम की राज्य सरकारों व ब्रू समुदाय के प्रतिनिधियों के मध्य ब्रू शरणार्थियों से जुड़ा एक चतुर्पक्षीय समझौता हुआ। इस समझौते के अनुसार लगभग 34 हज़ार ब्रू शरणार्थियों को त्रिपुरा में ही बसाने का निर्णय लिया गया था। इसके साथ ही उन्हें सीधे सरकारी तंत्र से जोड़कर राशन, यातायात, शिक्षा आदि की सुविधा प्रदान कर उनके पुनर्वास में सहायता प्रदान का वादा किया गया था।

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नागरिक सुरक्षा फोरम और उपमंडल का मिजो कन्वेंशन शामिल संगठन उत्तर त्रिपुरा जिले के कंचनपुर उपमंडल की जॉइंट मूवमेंट कमेटी (जेएमसी) ने उपमंडल में छह हजार ब्रू परिवारों को बसाने के सरकार के फैसले के खिलाफ बेमियादी प्रदर्शन करने का निर्णय किया है। उनकी मांग है कि ब्रू समुदाय के लोगो को त्रिपुरा के सभी आठ जिलों में बसाया जाए।


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 त्रिपुरा सरकार ने तकरीबन 33,000 ब्रू लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की

जेएमसी के प्रमुख डॉ. जेड पचुउ ने कहा कि उनकी उत्तर त्रिपुरा के जिलाधिकारी से मुलाकात हुई है और उन्हें आश्वस्त किया गया कि अधिकतम 1,500 परिवारों को ही यहां बसाया जाएगा लेकिन वे अब 6,000 परिवारों को बसाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि त्रिपुरा सरकार पड़ोसी राज्य मिजोरम से विस्थापित तकरीबन 33,000 ब्रू लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी है।

ब्रू शरणार्थियों को बसाने के लिए त्रिपुरा ने शुरू किया सर्वेक्षण - tripura  begins survey to settle bru refugees

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पुनर्वास प्रक्रिया के तहत त्रिपुरा सरकार ने कानून मंत्री रतन लाल नाथ और मुख्य सचिव मनोज कुमार के साथ चर्चा के बाद 19 सितंबर को पुनर्वास के लिए 15 क्षेत्रों को मंजूरी दी थी। कुछ पुनर्वास स्थलों पर अभी भी विचार चल रहा है। इसमें से कुछ पर प्रवासियों की आपत्तियां हैं जबकि कुछ को लेकर स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं।

बीते 10 महीनों में उत्तरी त्रिपुरा के दो स्थानीय जातीय फोरम- कंचनपुर नागरिक मंच और मिजो कन्वेंशन ने पुनर्वास के खिलाफ कई प्रदर्शन किए हैं। ये दोनों संगठन 23 साल पहले त्रिपुरा आए इन शरणार्थियों पर स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बनने का आरोप लगाते रहे हैं।

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इस संबंध में मिजोरम ब्रू विस्थापित पीपुल्स फोरम (एमबीडीपीएफ) के महासचिव ब्रूनो मशा ने 29 सितंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कहा कि दो संगठन सांप्रदायिक गलतफहमी पैदा कर रहे हैं।हाल ही में उत्पन्न हुए इस संघर्ष के बाद पिछले  दो दशक से अधिक समय से चली आ रही इस समस्या का समाधान संभव होने की उम्मीद खत्म होती दिख रही हैं।

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Shreya Sinni

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