यूपी में मोहब्बत पर पहरा के लिए योगी कैबिनेट ने नए कानून पर मुहर लगायी

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद और धर्म परिवर्तन की घटना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 को मंजूरी दे दी गई है। सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों में 3 से 10 वर्ष की सजा का प्रावधान रखा गया है।

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद पर जल्द बनेगा कानून, गृह ने कानून मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव - UP Government CM Yogi Adityanath Love Jihad Law home ministry - AajTak

जबरन या कोई प्रलोभन देकर किसी से धर्म परिवर्तन करवाना भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि कानून व्यवस्था को सामान्य बनाने के लिए और महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए इस अध्यादेश का पास होना जरूरी था।

उन्होंने यह भी कहा कि 100 से ज्यादा ऐसी घटनाएं सामने आई थी जिसमें जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाया गया। मंगलवार को इस अध्यादेश को योगी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

लव जिहाद के स कानून पर उठ रहे हैं कई प्रकार के सवाल

एक तरफ योगी कैबिनेट ने बनाए गए अध्यादेश पर मुहर लगा दी लेकिन समाज का एक वर्ग आज भी योगी सरकार से यह पूछने की हिम्मत रखता है कि दो व्यक्ति की शादी का फैसला उनका निजी फैसला होता है इसमें किसी तीसरे को क्या परेशानी हो सकती है।

एक सवाल यह भी उठता है कि क्या कोई व्यक्ति अपने पसंद से अपना जीवनसाथी का चुनाव नहीं कर सकता अगर यहां धर्म आड़े आता है तो शादी जैसा निजी फैसला भी हर व्यक्ति को कानून के दायरे में रहकर करना होगा।

cm yogi said his government will formed law against Love jihad | मजहबी जेहादियों को CM Yogi की कड़ी चेतावनी, लव जिहाद पर कानून बनाने का ऐलान | Hindi News, राष्ट्र

यह अपने आप में एक गंभीर समस्या है। अभिव्यक्ति की आजादी भारतीय संविधान का प्रथम कर्तव्य है और हर भारतीय नागरिक का मौलिक अधिकार भी है।

अभिव्यक्ति के निजी फैसलों को राजनीति के गंदे खेल में शामिल किया जाना निंदनीय है। सवाल यह उठता है कि गलत को गलत कहा जाए इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन इसे धर्म के चश्मे से ना देखा जाएशादी एवं विवाह दो व्यक्ति का निजी फैसला होता है इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप करना अपने आप में शर्मनाक है।


और पढ़ें:बीफ के लिए गोमाता शब्द इस्तेमाल करने से कोर्ट ने रेहाना के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगाई रोक


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा अपने साथी का चुनाव मौलिक अधिकार है 

इलाहाबाद हाई कोर्ट की पीठ ने हाल ही में कहा कि वह इस बात को समझने में असमर्थ है कि जब कानून दो व्यक्ति को भले ही वह समलैंगिक ही क्यों ना हो उन्हें साथ में बने रहने की अनुमति देता है तो फिर दो लोगों के संबंध से किसी को क्या आपत्ति है?

लव जिहाद अध्यादेश को योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी - Media Mantra

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फैसले के दौरान कहा कि अपने पसंद के व्यक्ति के साथ जीवन गुजारना किसी का भी मौलिक अधिकार है इस पर धर्म और राजनीति का खेल नहीं होना चाहिए। इलाहाबाद हाई कोर्ट की पीठ ने उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें न्यायालय ने कहा था कि शादी के लिए धर्म परिवर्तन नहीं होना चाहिए।

पीठ ने इस फैसले को खारिज करते हुए यह बात कही की यह दो लोगों का स्वतंत्र फैसला है कि उन्हें शादी के बाद अपना धर्म परिवर्तन करवाना है या नहीं इस पर कानूनी हस्तक्षेप सही नहीं है।

पीठ ने यह भी कहा कि अपने पसंद के व्यक्ति के साथ रहना भले ही वह उसके धर्म का नहीं हो या उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न अंग है इसमें दखल देना शोभा नहीं देता।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय न्यायालय ने हमेशा ही अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान किया है। जीवनसाथी चुनने के फैसले को धर्म और संप्रदाय के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

क्या योगी सरकार का इस कानून को पास करना अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है?

मंगलवार को जब से योगी कैबिनेट ने लव जिहाद पर बने अध्यादेश‌ पर मुहर लगाई है तब से ही इस अध्यादेश पर कई प्रश्न चिन्ह भी उठने लगे हैं। 21वीं सदी में भी दो लोगों को अपने जीवनसाथी का चुनाव कानूनी दायरे में रहकर करना होगा तो यह हमारे समाज के लिए खतरे की निशानी है।

लव जिहाद के खिलाफ योगी सरकार ने पास किया अध्यादेश, अब होगी 10 साल की सजा - Agniban

आज हम सभी कहते हैं कि भारत अपनी सोच में परिवर्तन ला रहा है और तरक्की हासिल कर रहा है लेकिन ऐसे फैसले लेकर हम दोबारा से 100 वर्ष पहले भूतकाल में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसा माना जाता था कि क्रूर शासक हिटलर ने सबसे पहले धर्म परिवर्तन को लेकर सख्त फैसले लिए जिसके बाद हश्र क्या हुआ यह पूरी दुनिया ने देख लिया।

भारत में धर्म परिवर्तन के मुद्दों से भी ज्यादा आवश्यक और गंभीर मुद्दा है जैसे कि मौलिक शिक्षा का अधिकार, रोजगार, भ्रष्टाचार आदि। सरकार को इस संबंध में कानून लाने की आवश्यकता अधिक है ना कि किसी की व्यक्तिगत आजादी पर हमला करने की।

भारत एक लोकतांत्रिक देश है जो संविधान के हिसाब से चलता है। लोकतंत्र का अभिन्न अंग है अभिव्यक्ति की आजादी परंतु 21वीं सदी में भी आकर अगर इस मौलिक अधिकार पर हमला हो रहा है तो यह ना समाज के लिए और ना हमारे लोकतंत्र के लिए सही है।

Digiqole Ad Digiqole Ad

Aparna Vatsh

Related post