गुजरात यूनिवर्सिटी में छात्रा को नागरिकता साबित करने के लिए कहा गया

 छात्रा को नागरिकता साबित करने को कहा गया

गुजरात विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त एक कॉलेज की एक लॉ ग्रेजुएट छात्रा ने इंटर्नल परीक्षा के मार्कशीट की प्रतियां मांगने के लिए आरटीआई दायर की थी। परन्तु संस्थान ने छात्रा से कहा कि वह पहले अपनी भारतीय नागरिकता साबित करें इसके बाद ही उनकी याचिका पर जवाब दिया जाएगा। 

RTI से जानकारी मांगा तो विश्विद्यालय ने कार्यकर्ताओं से नागरिकता साबित करने के लिए कहा! - The Siasat Daily Hindi | DailyHunt

नागरिकता साबित करने के विरोध में हाईकोर्ट में देंगी चुनौती 

इस पूरे मामले पर गुजरात विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त गांधीनगर स्थित सिद्धार्थ लॉ कॉलेज की छात्रा तनाज़ नागोरी ने कहा कि संविधान या आरटीआई एक्ट में ऐसा कोई नियम नहीं है जहां उन्हें जवाब जानने से पहले नागरिकता साबित करना पड़े, इसलिए वह इसके हाईकोर्ट के चुनौती देंगी। 

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छात्रा ने इस पूरे मामले में आगे बताया की उन्होंने 19 अक्टूबर को आरटीआई दायर कर एलएलबी के छठे सेमेस्टर के इंटर्नल एग्जाम की मार्कशीट की प्रतियां मांगी थीं। इसके जवाब में विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग के जन सूचना अधिकारी (पीआईओ) ने तीन दिसंबर को भेजे अपने जवाब में कहा कि आरटीआई एक्ट 2006 की धारा 6 के तहत भारतीय नागरिक जानकारी मांग सकता है। आपसे गुजारिश की जाती है कि ये साबित करें कि आप भारतीय नागरिक हैं। आपसे भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र मिलने के बाद सूचना देने की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।


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गुजरात विश्वविद्यालय के वाइस-चांसलर हिमांशु पांड्या ने किसी प्रकार की टिप्पणी से क़िया इंकार

इस पूरे मामले पर गुजरात विश्वविद्यालय के वीसी ने कहा कि यह मामला पीआईओ तक सीमित है। मैंने न तो आवेदन और न ही जवाब देखा है इसलिए मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता हूं। लेकिन यह निश्चित है कि हम इस तरह के कदम नहीं उठाते है।

छात्रा ने कहा कॉलेज द्वारा मार्क्स में गड़बड़ी की आशंका के चलते डाली आरटीआई

आवेदनकर्ता छात्रा तनाज़ नागोरी  का कहना है कि कॉलेज के इंटर्नल एग्जाम में गड़बड़ियों की आशंका के चलते उन्होंने आरटीआई दायर कर जानकारी मांगी थी। सबसे पहले उन्होंने अपने कॉलेज में आरटीआई दायर की लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के कारण उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय का रुख किया।

छात्रा ने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी तो गुजरात विश्वविद्यालय ने कहा- पहले नागरिकता साबित करें

छात्रा ने कहा कि कॉलेज द्वारा भेजा गया इंटर्नल मार्क्स और विश्वविद्यालय द्वारा घोषित मार्क्स में अंतर है वे एक जैसे नहीं है। उन्होंने आगे बताया कि वह गोल्ड मेडलिस्ट हैं और उन्हें जनवरी में गुजरात विश्विद्यालय के 60वें दीक्षांत समारोह में पांच सेमेस्टर के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन के लिए चार गोल्ड मेडल मिले थे।

छात्रा हाईकोर्ट में चुनौती देने के लिए तैयार वहीं यूनिवर्सिटी भी अपने  मांग पर कायम

विश्वविद्यालय ने कहा है कि आवेदनकर्ता या तो ऑफिस में आकर या फिर ई-मेल से अपनी नागरिकता प्रमाण पत्र भेज सकते हैं। यह नियमों के अनुसार है। वहीं छात्रा का कहना है कि संविधान या आरटीआई एक्ट में कोई भी ऐसा क्लॉज नहीं है जहां आरटीआई आवेदन फाइल करने के लिए भारतीय नागरिकता साबित करनी पड़े इसलिए वह  इसे हाईकोर्ट में चुनौती देंगी।

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Shreya Sinni

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