किसान आंदोलन से जुड़े मुख्य तीन सवाल क्या हैं?

पिछले 2 हफ्ते से चला आ रहा किसान आंदोलन हर बीतते दिन के साथ तेजी पकड़ता जा रहा है। दिल्ली में फिलहाल जो देखने को मिल रहा है वह पिछले 32 साल में कभी देखने को नहीं मिला। इस आंदोलन से जुड़ा तीन मुख्य सवाल आज हर किसी के जेहन में है। उनमें से पहला सवाल लिया है।

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क्या भारतीय किसान ने नई कृषि कानून की मांग की या नहीं?

भारत में किसान आंदोलन बेहद पुराना है। पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पिछले 100 वर्षों में किसानों द्वारा कई बार सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। सरकार द्वारा बनाया गया कृषि कानून किसानों को रास नहीं आ रहा है। उनका साफ कहना है कि यह कानून उनके लिए मौत की लिखित गारंटी है।

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किसानों की फिलहाल की मांग है कि कृषि कानून को रद्द कर दिया जाए। इस पर सवाल यह उठता है कि अगर सरकार द्वारा बनाया गया यह कृषि कानून किसानों को उनके हक में नहीं लग रहा है तो क्या उन्होंने सरकार से कृषि कानून बनाने की मांग की थी? केंद्र सरकार का साफ कहना है कि यह कानून किसानों के हित को ध्यान में रखकर ही बनाया गया है तो वहीं दूसरी तरफ किसान वर्ग इस कानून के सख्त खिलाफ है।


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किसानों की मांग क्या है और नए कृषि कानून से उन्हें मिला क्या है?

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केंद्र सरकार का यह कहना है कि नए कानून से किसानों को अधिक लाभ होगा। किसानों के लिए ज्यादा विकल्प भी खुलेंगे और बाजारों में अच्छी प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिलेगी। कृषि बाजार, प्रोसेसिंग और आधारभूत संरचना में निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। दूसरी तरफ किसान वर्ग का यह कहना है कि नए कानून से उनका सुरक्षा का हक छीन जाएगा।

इन बातों से कुछ सवाल और बाहर निकल कर आते हैं जैसे किसान संगठन के अंदर क्या बात चल रही हैं यह स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ रहा। इस आंदोलन से महिला किसान गायब नजर आ रही हैं। एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि क्या सरकार और किसान के बीच सुलह होने का कोई फार्मूला है या नहीं?

मौजूदा व्यवस्था पर अगर नजर डालें तो किसानों का कहना है कि अभी बहुत सारी चीजें लागू नहीं हुए हैं जैसे उन्हें कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए  सुरक्षा देने वाला कानून चाहिए।दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि खराब मार्केटिंग के चलते किसानों को अच्छा दाम नहीं मिल पा रहा है।

क्या हो सकता है आगे का रास्ता?

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भारतीय कृषि क्षेत्र में बढ़ती हुई चुनौती डिमांड से अधिक सप्लाई की है। किसान तो भारी मात्रा में उपज कर रहे हैं लेकिन उन्हें इसे बेचने के लिए बाजार की भी जरूरत है। नए कानून से मंडी के प्रभाव को कम करने के पीछे सरकार का यही कहना है कि वह चाहती हैं किसानों के लिए बाजार उपलब्ध हो और उन्हें उनकी उपज का अच्छा कीमत मिल सके। किसान संगठन और सरकार अगर अच्छे से बातचीत कर एक दूसरे की समस्या को समझें और हल निकालने की कोशिश करें तो शायद इस आंदोलन पर विराम लग सकता है।

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Aparna Vatsh

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