आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि

लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि 

आज 15 दिसंबर 2020 को भारत के पहले उपप्रधानमंत्री,गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 70 वीं पुण्यतिथि है। एवं इस शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए शतशत नमन किया है। भारत को सशक्त, सुदृढ़ और समृद्ध बनाने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के दिखाए गए मार्ग हमें हमेशा ही देश की एकता,अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए सदा ही प्रेरित करते हैं।

लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि पर सीएम शिवराज समेत भाजपा नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

दरसअल देश की आजादी में पटेल का जितना योगदान था उससे कई गुना अधिक उनका योगदान आजाद भारत को एक करने में था। जब 15 अगस्त 1947 को  देश आजाद हुआ था। उस समय  देश में छोटीबड़ी 562 रियासतें थीं। जिनमें से  कई रियासतों ने तो आजाद रहने का निर्णय कर लिया था। मगर सरदार पटेल की ज़ोर और प्रखर बुद्धि ने सभी को देश में मिला ही डाला।


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शासन तंत्र को वैधता प्रदान करने में गाँधी,नेहरू और पटेल की त्रिमूर्ति की बहुत अहम भूमिका

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्तूबर 1875 को गुजरात के खेड़ा में हुआ था  एवं उनका क़द 5 फ़ीट 5 इंच था। और  पटेल नेहरू से उम्र में 14 साल बड़े थे। पटेल युवाओं के बीच नेहरू की तुलना में उतने लोकप्रिय नहीं थे साथ ही नेहरू का रंग गोरा था एवं दिखते भी आकर्षक  थे वहीं पटेल गुजराती किसान परिवार से थे एवं थोड़े चुपचाप स्वभाव के बलिष्ठ दिखने वाले व्यक्ति थे। मगर पटेल के चेहरे पर थोड़ी कठोरता हमेशा ही दिखाई देती थी।

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पटेल की जीवनी लिखने वाले राजमोहन गांधी ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि भारत जो कुछ भी है उसमें सरदार पटेल का बहुत बड़ा योगदान है। पर  इसके बावजूद भी  हम उनकी उपेक्षा करते हैं। उन्होंने बताया है कि आज़ाद भारत के शासन तंत्र को वैधता प्रदान करने में गाँधी,नेहरू और पटेल की त्रिमूर्ति की बहुत अहम भूमिका रही है। पर जाने क्यों ये शासन तंत्र भारतीय इतिहास में गांधी और नेहरू के योगदान की तो गुणगान करता है मगर पटेल की तारीफ़ करने में हमेशा ही कंजूसी कर देता है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल के पैर हमेशा ज़मीन पर 

इस विषय को समझने के लिए  सुनील खिलनानी की मशहूर किताब आइडिया ऑफ़ इंडियाकी ओर हम देख सकते हैं। जिस किताब में नेहरू का ज़िक्र  65 बार आता है पर वहीं पटेल का ज़िक्र मात्र 8 बार आया है। इसी तरह रामचंद्र गुहा की किताबइंडिया आफ़्टर गाँधीमें पटेल के मात्र 48 बार ज़िक्र की तुलना में नेहरू का ज़िक्र 4 गुना ज्यादा यानी 185 बार दिखता है। पटेल में हमेशा एक  किसान जैसी ज़िद, रूखा संकोच और दरियादिली मौजूद थीं।

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हम आपको बता दें कि सरदार पटेल की मत्यु से पहले एवं बाद में नेहरू छह बार कांग्रेस के अध्यक्ष बने पर। वहीं पटेल मात्र एक बार 1931 में कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए गए।साथ ही बता दें कि इस दौरान मौलाना आज़ाद एवं मदनमोहन मालवीय जैसे नेता दो या उससे ज्यादा बार कांग्रेस अध्यक्ष बने थे।

स्वदेशी आँदोलन से हुए प्रभावित पटेल

हम आपको बता दें कि दुर्गा दास अपनी पुस्तकसरदार पटेल्स कॉरेसपॉन्डेंसमें लिखते हैं कि पटेल को अपने अंग्रेज़ी कपड़ों से बहुत अधिक प्रेम था। इतना ही नहीं इस प्रसंग में दुर्गा दास ने अपनी पुस्तक सरदार पटेल्स कॉरेसपॉन्डेंस में लिखा है कि पटेल को अपने अंग्रेज़ी कपड़ों से बहुत अधिक प्रेम था। उन्होंने अहमदाबाद में अच्छा ड्राई क्लीनर होने के कारण से  बंबई में ड्राईक्लीन करवाना शुरु किया था। लेकिन बाद में सरदार वल्लभभाई पटेल गांधी के स्वदेशी आँदोलन से  इतने अधिक प्रभावित हुए कि उन्होंने यह त्याग कर साधारण भारतीय कपड़े पहनने शुरू कर दिया था।

बहुत दुख की बात है कि  ‘लौह पुरुषके नाम से मशहूर सरदार वल्लभभाई पटेल का 15 दिसंबर 1950 को मुंबई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।एवं उस दिन उन्हें सुबह तीन बजे  दिल का दौरा पड़ा एवं वे बेहोश हो गए थे। जिसके बाद उन्हें चार घंटो बाद थोड़ा होश आया मगर करीबन 9 बज कर 37 मिनट पर सरदार पटेल ने अंतिम साँस ली और वे हमें अलविदा कह कर चले गए।

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