कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के बाद 41% लड़कियाँ स्कूल लौटने को तैयार नहीं

राज्य में हर पांच में से 2 लड़की स्कूल लौटने के लिए तैयार नहीं 

2020 के मार्च महीने में लगे लॉकडाउन के कारण देश के सभी स्कूल एवं कॉलेज बंद कर दिए गए थे। अब धीरे-धीरे जिंदगी जब पटरी पर लौटने लगी है तो राज्य सरकार भी विद्यालयों एवं कॉलेज को खोलने पर विचार कर रही है। इसी बीच विद्यार्थियों की वापसी को लेकर सर्वे किया गया। तीन एजेंसियों के सर्वे में यह नतीजा निकला है कि करीब 41% लड़कियाँ कोरोना काल के बाद स्कूल जाने को तैयार नहीं है। आपको बता दें यह सर्वे देश के कुल 5 राज्यों में किया गया जिसमें बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडु एवं असम शामिल थे।

लड़की स्कूल

तीन एजेंसियों ने मिलकर किया यह सर्वे

राइट टू एजुकेशन फोरम, सेंटर फॉर बजट एंड पॉलिसी स्टडीज एवं चैंपियंस फॉर गर्ल्स एजुकेशन जैसी संस्थाओं ने मिलकर इस सर्वे का नतीजा निकाला। सर्वे मूल रूप से स्कूल जाने वाली 6 से 18 वर्ष की लड़कियों को ध्यान में रखकर किया गया। रिपोर्ट में नतीजा निकला की प्रतिशत लड़कियाँ अब स्कूल नहीं जाना चाहती।


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ऑनलाइन पढ़ाई का लाभ नहीं उठा पा रही गरीब घर की लड़कियाँ

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सर्वे में यह पाया गया कि ऑनलाइन पढ़ाई का लाभ गरीब घर की लड़कियों तक नहीं पहुंच पा रहा है इसका कारण घरों के काम में व्यस्त होना हैं। ऐसा कहा गया कि लड़कियाँ जब घर से निकलकर स्कूल जाती थी तो वहां थोड़ी पढ़ाई हो जाती थी लेकिन अब क्योंकि विद्यालय बंद है और ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है इसका लाभ गरीब घर की लड़कियों तक नहीं पहुंच पा रहा। घर में रहने के कारण वह घरेलू काम में ही अपना पूरा दिन निकाल देती हैं जिस वजह से वह पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं।

सभी का कहना बाहर आने-जाने पर पाबंदी

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भारतीय समाज में लड़कियों पर बचपन से ही कई पाबंदियाँ लगाई जाती है। इनमें से एक बाहर आने-जाने पर पाबंदी है। सर्वे में पाया गया है कि लड़कों के मुताबिक लड़कियों पर कोरोना महामारी का ज्यादा असर पड़ा है। लड़कियों का कहना है कि उन्हें कहीं आने जाने पर पाबंदी है। 89 प्रतिशत लड़कियाँ मानती हैं कि कोरोनावायरस महामारी से पहले उनकी जिंदगी बेहतर थी।

बिहार के कई इलाकों में किया गया सर्वे

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बिहार के ग्रामीण एवं कस्बाई पृष्ठभूमि से आने वाले 1470 परिवारों को सर्वे में शामिल किया गया। यह परिवार मूल रूप से बिहार के किशनगंज, पूर्वी चंपारण, पटना, नालंदा एवं अन्य जगह के निवासी हैं। इनमें से 14% परिवार मुस्लिम समाज से है वहीं 38% अनुसूचित जनजाति से ताल्लुक रखते हैं। इनमें से 42% परिवार अति पिछड़ी जाति से आते हैं। इन परिवारों की सिक्सिक्सिक्स प्रतिशत महिलाएं घरेलू काम करती हैं वहीं 70% पुरुष अकुशल श्रमिक हैं।

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Aparna Vatsh

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