ज़मींदार से प्रवासी मज़दूर बनने की हैरान करने वाली यूपी-बिहार के किसानों की कहानी

ज़मींदार से प्रवासी मज़दूर बनने की कहानी

पिछले लगभग बीस दिनों से हज़ारों की संख्या में किसान दिल्ली जाने वाले रास्ते में सिंघु बॉर्डर पर धरने पर बैठे हुए हैं। उनकी एक ही मांग है कि केंद्र के नए कृषि कानूनों को रद्द किया जाए। इस बात में कोई शंका नहीं है कि प्रदर्शन में शामिल ज़्यादातर किसान पंजाब-हरियाणा से हैं। यूपी-बिहार जैसे राज्य भी कृषि प्रधान राज्य हैं लेकिन वहां से लोग काफी कम क्यों हैं? इन राज्यों के किसनों के पास भी खेती की ज़मीन है फिर भी यह प्रवासी मज़दूर क्यों है?

बिहार यूपी के किसानो

हर साल हज़ारों लोग खेतों में मज़दूरी करने पंजाब और हरियाणा आते हैं। इनका कहना है कि इन राज्यों में फ़सल की बिक्री काफ़ी मुनाफ़ा देती है जबकि हमारे राज्य में ऐसा नहीं है। प्रवासी मज़दूरों के इन दावों की पीछे क्या मुख्य कारण है इसे जानने इंडिया टुडे की टीम ने अंबाला और मोहाली में काम करने आए लोगों से बात की।

बिहार यूपी और पंजाब हरियाणा जैसे राज्यो के किसानो के आय में अंतर के क्या कारण है?

बिहार यूपी के किसानो

पहली कहानी है गंगा महतो की, वह बिहार के रहने वाले हैं और बताते हैं कि हरियाणा के अंबाला में पिछ्ले दो दशक से काम कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि उनके पास ज़मीन नहीं है या उनकी फ़सल अच्छी नहीं होती। उनके मुताबिक उनके पास चार बीघा ज़मीन है जिसमें वह धान और गेहूं लगाते हैं लेकिन उन्हें सही दाम नहीं मिल पाता। फ़सल का दाम 800- 900 रुपए क्विंटल से अधिक नहीं मिलता और यह उनके परिवार के लिए काफ़ी कम है।


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उनके जैसे और भी कई  उत्तर प्रदेश के  प्रवासी मज़दूर यहां काम करते हैं और उनकी भी यही कहानी है। उनके मालिकों के पास उनके मुकाबले कम ज़मीन है पर मुनाफा कई गुना ज़्यादा और इसका सबसे बड़ा कारण व्यवस्थित मंडिया हैं। 

2006  में APMC अधिनियम को समाप्त करने वाला बिहार देश का पहला राज्य 

बिहार यूपी के किसानो

बिहार ने किसानों से सीधे ख़रीद के लिए निजी कंपनियों को सुविधा प्रदान की थी। और हम आज यहां के किसानो की दशा से वाकिफ़ हैं। वहां के किसानों का दावा है कि उन्हें अपनी उपज निजी कंपनियों को औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती है क्योंकि यहां मंडियों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। वहीं बिचौलिये और स्थानीय व्यापारी  हमसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे की उपज खरीद कर भारी मुनाफ़ा कमाते हैं।

एमएसपी और मंडियों के ख़त्म होने से किसान मजदूर बनकर रह जाएंगे

बिहार यूपी के किसानो

पंजाब और हरियाणा के किसान प्रवासी मज़दूरों का हवाला देते हुए कहते है सरकार के इन काले कानूनों के वजह से हमारी भी यही दशा हो जाएगी। किसान आंदोलन एमएसपी के लिए है क्योंकि अगर एमएसपी ख़त्म हो जाती है तो हम भी उनकी तरह बन जाएंगे। उनका कहना है कि इन कानूनों के आने के बाद हमें अगले तीन से चार साल में बड़े कॉर्पोरेट्स के साथ मज़दूरों के रूप में काम करना पड़ेगा।

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Shreya Sinni

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