भारत में फरवरी 2021 तक COVID-19 महामारी नियंत्रण में आ जाएगी

COVID-19 के करीबन 90 संक्रमण की बात 

भारत में COVID-19 संख्या एक राहत के रूप में  हो सकती है लेकिन नवंबर तक देश ने प्रत्येक मामले के लिए लगभग 90 संक्रमणों को याद किया है। दरअसल फरवरी 2021 में भारत में COVID- 19  महामारी के अंत की भविष्यवाणी करने वाले डीएसटी पैनल के नवीनतम विश्लेषण से पता चलता है कि अब तक लगभग 60 प्रतिशत भारतीय संक्रमित हो चुके हैं।

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बता दें कि डीएसटी समिति द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार दिल्ली और केरल ने हर मामले में लगभग 25 संक्रमणों को देखा एवं वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे अन्य राज्यों ने हर COVID-19 पुष्टि मामले के लिए करीबन 300 संक्रमणों को देखा होगा।

भारत की लगभग 60 प्रतिशत आबादी COVID -19 से संक्रमित 

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एक अध्ययन से पता चला है कि भारत में नवंबर तक कोरोनोवायरस के प्रत्येक ज्ञात मामले में लगभग 90 संक्रमण हो सकते हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा गठित एक पैनल के सदस्यों द्वारा किए गए अध्ययन को एक गणितीय मॉडल के माध्यम से किया गया था। बता दें कि जिसने भविष्यवाणी की थी कि भारत की लगभग 60 प्रतिशत आबादी COVID -19 से संक्रमित हो गई है एवं एंटीबॉडी विकसित की है। इस समिति ने आबादी में वास्तविक संख्या के संक्रमण के एक अनुमान पर जाने के लिए किसी भी दिन के सकारात्मक परीक्षणों की संख्या का उपयोग किया है। यह वही समिति है जिसने भारत-विशिष्ट सुपरमॉडल का विकास किया एवं जिसने भविष्यवाणी किया कि देश में फरवरी 2021 तक महामारी नियंत्रण में आ जाएगी।


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COVID-19:  इटली और यूके जैसे देशों ने हर मामले में करीबन 10-15 संक्रमणों को देखा 

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समिति के सदस्य और आईआईटी कानपुर के एक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने चैनल को कहा कि ज्यादातर राज्यों में 70-120 रेंज में संक्रमण गायब थे। साथ ही अग्रवाल ने कहा कि हम राज्य विश्लेषण कर रहे हैं एवं वर्तमान में यह दर्शाता है कि नवंबर के मध्य तक दिल्ली और केरल प्रत्येक मामले में लगभग 25 संक्रमणों से चूक गए हैं और वहीं यूपी एवं बिहार में हर मामले के लिए यह संख्या लगभग 300 है। उन्होंने बताया कि “चूक” का अर्थ है कि एक प्रयास किया गया था एवं यह चूक गई थी। समिति ने  विश्व स्तर पर खुलासा किया कि इटली और यूके जैसे देशों ने हर मामले में करीबन 10-15 संक्रमणों को याद किया।

ग़ौरतलब है अग्रवाल के अलावा  विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) समिति में IIT हैदराबाद के प्रोफेसर एम विद्यासागर, CMC वेल्लोर के डॉ गगनदीप कंग, भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु के प्रोफेसर बिमान बागची और भारतीय सांख्यिकी संस्थान कोलकाता के प्रोफेसर अरूप बोस और संक पॉल संग लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानिटकर भी रक्षा मंत्रालय से शामिल थीं।  

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