सिस्टर अभया हत्या का मामला केरल के अपराधिक मामलों के इतिहास में सबसे लंबा चलने वाला केस बना

सिस्टर अभया हत्या का मामला

करीब 28 साल पहले सिस्टर अभया का शव उनके हॉस्टल के कुएं में बरामद हुआ था। मंगलवार को सीबीआई ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया और हत्या का गुनेगार एक नल और पादरी को बताया गया है।

28 साल बाद अभया नन केस में CBI कोर्ट का फैसला, एक पादरी और नन दोषी करार | Kerala CBI court two Convicted in Sister Abhaya Murder case - Hindi Oneindia

इस मामले में तिरुअनंतपुरम में मौजूद सीबीआई की विशेष अदालत ने 69 साल के पादरी फादर थॉमस कोट्टूर और 55 साल की नन सिस्टर सेफी को दोषी पाया गया  है और बुधवार को सजा सुनाई जाएगी।

हत्या के साथ एम सबूत मिटाने के भी दोषी करार दिए गए

अभया हत्या मामले में 28 साल बाद फैसला सुनाएगी सीबीआई अदालत - The Jaisalmer News

हत्या में सम्मिलित पादरी और नन को हत्या के साथ-साथ सुबूत मिटाने का भी दोषी करार दिया गया है। इसी के साथ फादर कोट्टूर को हत्या की साजिश रचने के मामले में भी दोषी पाया गया है। आपको बता दें कि 26 मार्च 1992 को 19 वर्षीय अभया की उसके हॉस्टल परिसर में ही हत्या कर दी गई थी। यह हॉस्टल कन्या कैथोलिक चर्च चलाती था।


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क्या था पूरा मामला?

केरल का सिस्टर अभया हत्याकांड: 28 साल बाद पादरी थॉमस और सिस्टर दोषी करार - Viral News INC

26 मार्च 1992 की रात 19 साल की प्री-डिग्री स्टूडेंट अभया अपने रूममेट के साथ हॉस्टल रूम में मौजूद थे। अभया को अगली सुबह परीक्षा की तैयारी के लिए जल्दी उठना था। उसकी रूममेट सिस्टर शर्ली ने उसे अगली सुबह तड़के 4:00 बजे उठा दिया। अभया मुंह धोने के लिए किचन की ओर गई और वही आखरी बार उसके रूममेट ने उसे देखा था। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि जब वह किचन की ओर गई तो उसने थॉमस कोट्टूर, सिस्टर सेफी और फादर पुट्ट्रीकायल को अश्लील स्थिति में पाया। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि कहीं अभया सभी को पादरी और नन के बारे में बताना दे इसी वजह से उसकी हत्या कर दी गई। फादर कोट्टूर ने पहले उसका गला घोटा और सिस्टर सेफी ने उसके सर पर कुल्हाड़ी से वार किया। बाद में इन तीनों ने मिलकर उसके शरीर को हॉस्टल परिसर के कुएं में फेंक दिया।

अभया के भाई ने कहा समझ नहीं आ रहा कोर्ट के फैसले से खुश हूं या नहीं

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दुबई में रहने वाले अभया का भाई बीजू थॉमस ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि जब कोर्ट का फैसला आया तो उन्हें समझ नहीं आया वह खुश है या नहीं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कोर्ट का फैसला आज भी आ सकेगा। इस फैसले को आने में 28 साल का लंबा वक्त लग गया। अभया के भाई ने यह भी कहा कि इस फैसले के बाद उनके माता-पिता जो स्वर्ग में मौजूद है वह‌ जरूर खुश होंगे। करीब 4 साल पहले उन्होंने अपने माता पिता को खो दिया। अपनी बहन के बारे में बात करते हुए बीजू थॉमस भावुक हो गए। 

मामले को आत्महत्या का रंग देने की कोशिश की गई

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इस मामले में कई बार यह आरोप लगे कि स्थानीय पुलिस और क्राइम ब्रांच इसकी सही से जांच नहीं कर रही है। सभी लोग केवल मामला को आत्महत्या घोषित करने में लगे थे जबकि साफ तौर पर या हत्या का मामला था।

वर्ष 1993 में सीबीआई ने इस मामले में अपनी जांच शुरू की। हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस केस को गंभीरता से लिया गया और जांच शुरू हुई। सीबीआई ने कोर्ट के समक्ष कई गवाहों को प्रस्तुत किया जिन्होंने उस रात हॉस्टल परिसर में पादरी को देखे जाने की बात स्वीकार की है। 

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Aparna Vatsh

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