पटना हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला देते हुए कहा,ट्रक ड्राइवरों की स्थिति सबसे दयनीय

पटना हाईकोर्ट ने कहा,ट्रक ड्राइवरों की स्थिति सबसे दयनीय

बुधवार को पटना हाईकोर्ट के बेंच ने एक बड़ा फैसला देते हुए ट्रक ड्राइवर सुमित कुमार को पुलिस द्वारा बिना किसी FIR के महीनों तक हिरासत में रखने के मामले में पांच लाख मुआवज़ा देने का आदेश दिया। अपने फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रक ड्राइवर विपरीत स्तिथि में रह कर पूरे देश में जरूरी समान पहुंचाने जैसा काम करते है लेकिन हमारी देश में इसकी स्तिथि सबसे कमजोर है।

पटना हाईकोर्ट

यह पूरा मामला 29 अप्रैल का है जब बिहार पुलिस ने दूध वैन चालक जितेंद्र कुमार (उर्फ संजय कुमार) को उसके वाहन के साथ  हिरासत में लिया था। हिरासत में रखने के 35 दिनों से अधिक समय तक पुलिस ने उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष भी पेश नहीं किया। बाद में शिकायत मिलने पर उच्च न्यायालय ने इस मामले में नोटिस जारी किया था तब पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी।

मामले में सुनवाई के दौरान कोई भी सबूत नहीं पेश कर पाई पुलिस

कोर्ट ने पुलिस के संदेह वाले बात को नहीं माना क्यों की पुलिस कथित दुर्घटना पीड़ित का पता भी नहीं लगा सकी थी और न ही किसी गवाह को पेश कर सकी जिससे आरोप साबित हो सके। कोर्ट ने कहा पुलिस द्वारा उचित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन ना करने के वजह से जितेंद्र के वाहन नहीं चला पाया  पाया गया। इसके साथ कोर्ट ने पुलिस की गिरफ्तारी के आधार, कानूनी सलाहकार तक पहुंच आदि के बारे में उसके अधिकारों का भी उल्लंघन का पाया। कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि छह सप्ताह के अंदर जितेंद्र को मुआवजे के रूप में 5 लाख रुपये का भुगतान किया जाए। 


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पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को ट्रक ड्राइवरों की स्थिति में सुधार लाने के उपायों शुरू कर रिपोर्ट देने को कहा 

पटना हाईकोर्ट

कोर्ट ने ट्रक ड्राइवरों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा इस मामले के तथ्यों से उन मामलों की गंभीर स्थिति का संकेत मिलता है जहां पुलिस अधिकारियों ने कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के उल्लंघन और उल्लंघन में काम किया है। इसके अलावा बेंच ने इस मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों को दंडित करने और सामान्य रूप से पुलिस बल के संवेदीकरण के लिए दिशा-निर्देश भी दिए। 

राज्य सरकार और पुलिस निदेशक को ट्रक ड्राइवरों के लिए अनुकूल व्यस्था स्थापित करे

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कोर्ट के निर्देशो में पुलिस महानिदेशक, बिहार सरकार एक शिकायत निवारण तंत्र के उचित और प्रभावी कामकाज को सुनिश्चित करना,अधिकारियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों की संख्या और प्रकृति के संबंध में एक रिपोर्ट तैयार करना आदि शामिल है। कोर्ट में यह भी कहा कि लगातार इस तरह के मामले सामने आ रहे है जिसमें उन्हें पुलिस और राज्य अधिकारियों के शत्रुतापूर्ण रवैये के अलावा बड़ी प्रतिकूलताओं का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को सुधारने की जरूरत है।

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Shreya Sinni

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