लॉकडॉउन में लड़कियों पर बढ़ रहा बाल विवाह का खतरा

लॉकडॉउन में बंद हुए स्कूलों के कारण लड़कियों पर बढ़ रहा बाल विवाह का खतरा

2020 कई मायने में के ऐतिहासिक वर्ष रहा है। इस वर्ष दुनिया ने ऐसा कुछ देखा जो पहले किसी ने सोचा भी नहीं होगा। कोविड-19 महामारी ने अपना रौद्र रूप दिखाया जिसकी चपेट में पूरी दुनिया गई। कोविड-19 के चलते कई देशों में बहुत पहले ही लॉकडाउन लगा दिए गए थे। इनमें से एक भारत भी था जहां मार्च के महीने में लॉक डाउन लग गए थे।

लॉकडॉउन बाल विवाह

सरकार ने बहुत पहले लॉकडॉउन लगा कर यह सुनिश्चित करना चाहा कि महामारी का खतरा ज्यादा ना बढ़े लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं है कि इस लॉकडॉउन के कारण लोगों को बहुत सारी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। स्कूल एवं कॉलेज बंद होने के कारण बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन होने लगी। भारत में आज भी कई लोग ऐसे हैं जो आर्थिक कमजोरी के कारण ऑनलाइन शिक्षा लेने में असमर्थ हैं। लॉक डाउन का सबसे बुरा प्रभाव लड़कियों के जीवन पर पड़ा है। पूरे दिन घर में कैद होने के कारण उन्हें पढ़ाई लिखाई से दूर घर के कामों में हाथ बढ़ाना पड़ता है। बुलंदशहर की एक 12 वर्षीय नाबालिग लड़की ने इसको लेकर अपनी आपबीती सुनाई।


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परिवार वालों ने जबरदस्ती शादी करवानी चाहा 

लॉकडॉउन बाल विवाह

लड़की ने बताया कि शुरुआत में जब ऑनलाइन शिक्षा प्रारंभ नहीं हुई थी तो परिवार वालों ने उसकी शादी करवाने का फैसला ले लिया। एक अखबार से किए गए बातचीत के दौरान लड़की काफी घबराई हुई थी और उसने बताया कि उस पर बाल विवाह का खतरा मंडरा रहा है।लड़की की उम्र महज 12 वर्ष है। गांव वालों में यह कहना था कि लड़की जवान होते ही अपने प्रेमी के साथ भाग जाती है और इस तरीके की बातों ने लड़की के भाई में अपनी बहन के प्रति चरित्र संदेह पैदा कर दिया। इसी वजह से उसके परिवार वाले इतनी छोटी सी उम्र में ही उसका बाल विवाह करवाना चाह रहे थे।

लड़की बाल विवाह के सख्त खिलाफ थी

लड़की ने कहा कि उसका विवाह नवंबर में होने वाला था। लॉकडॉउन के बीच अगस्त के महीने में उसका रुका हुआ। लड़की ने रोका के तुरंत बाद यह फैसला लिया कि उसे बाल विवाह नहीं करना है एवं यह रोकने के लिए वह सख्त कदम उठाएगी। किसी तरह उसे अपनी टीचर का नंबर प्राप्त हुआ। उसने अपनी टीचर को कॉल कर उनसे मदद मांगी। 

केंद्रीय मंत्रालय की रिपोर्ट में इस वर्ष बाल विवाह के कई मामले दर्ज हुए

लॉकडॉउन बाल विवाह

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा को मिले आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष लॉकडॉउन यानि अप्रैल से अक्टूबर के बीच बाल विवाह के संदर्भ में 18,324 कॉल आए थे। विशेषज्ञ मानते हैं कि घरों में बंद होने के कारण परिवार वालों को यह लगता है कि लड़की की शादी करवा देनी चाहिए। कोविड-19 माई के चलते सरकार ने शादी विवाह को लेकर भी कुछ नियम जारी किए हैं जिसके अनुसार कम लोग ही विवाह में सम्मिलित हो सकते हैं इसी कारण लोगों को लगता है कि कम खर्चे में अगर शादी निपट रही है तो करवा देनी चाहिए।

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Aparna Vatsh

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