बिहार के बड़े सरकारी अस्पताल PMCH की सच्चाई को जनता को दिखाना बना गुनाह

PMCH की सच्चाई को जनता को दिखाना बना गुनाह

बता दें कि बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल PMCH की हकीक़त को देखना और जानना दोनों अब गुनाह बन चुका है। अस्पताल पीएमसीएच की कमियों को छुपाने के लिए जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के तीसरे दिन अखबार के एक पत्रकार को मात्र फोटो लेने के कारण से गार्डों ने जमकर पीटा है। मात्र अखबार के लिए फोटो लेने पर उस फोटोग्राफर को वार्ड के अंदर खींचकर ले जाया गया और जहां पर उसकी और जमकर पिटाई की गई।

PMCH

ग़ौरतलब है कि हड़ताल के एक दिन पहले यानी 22 दिसंबर को ऐसे ही एक जुर्म की सजा में अस्पताल के गार्डों ने एक लोकल पोर्टल के पत्रकार को पीट दिया था। इतना ही नहीं पत्रकार की पिटाई के मामले पर उपाधीक्षक डॉक्टर राणा एनके सिंह ने अपना बड़ा बयान दिया और कहा कि जो कोई भी वहां लिमिट क्रॉस करेगा उसका यही हाल होगा। बता दें कि पिछले तीन दिनों में PMCH के गार्डों ने 2 पत्रकारों को पीट डाला है।


और पढ़ें :बिहार सरकार ने हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों पर सख्ती के आदेश दिए


PMCH के गार्ड और जूनियर डॉक्टर दोनों ही मारपीट के लिए कुख्यात

जानकारी के मुताबिक़ PMCH के गार्ड और जूनियर डॉक्टर दोनों ही मारपीट के लिए कुख्यात हैं। बता दें कि मोबाइल वीडियो के डर से शायद जूनियर डॉक्टर थोड़ा बच रहे हैं वरना तो इस अस्पताल में कई दफा पत्रकारों को घेर-घेर कर जूनियर डॉक्टरों ने ही पीटा है। अस्पताल में  मरीजों और जूनियर डॉक्टरों के बीच बढ़ते हुए इस तनाव को देखते हुए यहां प्राइवेट सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था को भी किया गया था।

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रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य के ज्यादातर बड़े अस्पतालों में अब प्राइवेट सुरक्षाकर्मियों की तैनाती हो गई है मगर गार्डों की मनमानी की सबसे ज्यादा खबरें-तस्वीरें या वीडियोज तो सरकारी अस्पताल PMCH से ही सामने नज़र आती हैं और जब अस्पताल की कुव्यवस्था दिखाने का कोई पत्रकार या व्यक्ति कोशिश करता है तो ये भड़क जाते हैं और उनकी पिटाई कर देते हैं।

वहीं सरकारी अस्पताल PMCH में तैनात एलाइट फॉल्कन्स एजेंसी के गार्ड ने कहा कि मरीज के परिजनों का फोटो अथवा वीडियो जो भी बनाएगा। उसका हम पिट कर बुरा हाल कर देंगे। PMCH में गार्ड अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजनों से भी उलझते,अभद्रता करते नजर आते हैं। वहां हालात इतनी ख़राब है कि अंदर मरीज दर्द से कराह रहा होता है। मगर बाहर खड़े परिजन को उनसे मिलने की अनुमती नहीं दी जाती है। सच कहें तो ऐसा लगता है मानो गार्ड के बदले अस्पताल में गुंडे तैनात किए गए हैं।

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