आजादी की लड़ाई देखने वाली जसविंदर कौर होंगी किसान आंदोलन में शामिल

जसविंदर कौर होंगी किसान आंदोलन में शामिल

किसान आंदोलन हर बीते दिन के साथ व्यापक रूप लेता जा रहा है। लाखों की संख्या में अन्नदाता दिल्ली से सटे बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी केवल एक ही मांग है सरकार से की कृषि क़ानून को रद्द कर दिया जाए। इन्हीं में से एक महिला 90 वर्ष की जसविंदर कौर हैं। वो 15 वर्ष की उम्र में 1945 में हुई आजादी की लड़ाई की साक्षी बनी थी। अब वह दिल्ली से सटे टिकरी बॉर्डर पर किसानों के समर्थन में आगे आई हैं एवं बढ़-चढ़कर किसान आंदोलन में हिस्सा ले रही हैं।

जसविंदर कौर

जब तक केंद्र सरकार कृषि कानून वापस नहीं लेते आंदोलन का हिस्सा रहेंगी

जसविंदर कौर ने साफ शब्दों में यह कहा कि जब तक केंद्र सरकार उनके द्वारा बनाई गई कृषि कानून को वापस नहीं लेती तब तक वह किसान आंदोलन में शामिल रहेंगे एवं उनके हक के लिए आवाज उठाती रहेंगी। उनका कहना है कि किसानी उन्हें विरासत में मिली है एवं वह अपनी चौथी पीढ़ी देख रही हैं। उनके कुनबे में करीब 130 लोग हैं जो कहीं ना कहीं से खेतीबाड़ी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि कड़ाके की ठंड में भी अन्नदाता सड़कों पर डटे हुए हैं एवं अपने हक के लिए आवाज उठा रहे। इस दरमियान कई किसानों ने अपनी जान की आहुति दी दे दी। इन सब को देखते हुए हैं उन्होंने किसान आंदोलन में हिस्सा लेने का मन बनाया।

जसविंदर कौर


और पढ़ें :किसान नेताओं द्वारा आंदोलन की रणनीति में किया गया बदलाव, दूसरे राज्यों में आंदोलन को मजबूत बनाने पर होगा जोर


जसविंदर कौर 1965 में पंजाब छोड़ दिल्ली में आकर बसी

जसविंदर कौर

जसविंदर कौर 1965 में ही पंजाब छोड़ राजधानी दिल्ली में आकर बस गई। 1984 में हुए सिख दंगों का भयानक रूप में उन्होंने देख रखा है। उन्होंने बताया कि किसानों की समस्या को समझते हुए सरकार को जल्द से जल्द कृषि क़ानून को वापस लेना चाहिए। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि अपने पूरे जीवन काल में उन्हें 3 वर्ष हमेशा याद रहेंगे। पहला वर्ष 1945 होगा जब भारत के आजादी के लिए लड़ाई लड़ी गई थी। दूसरा वर्ष 1984 जब उन्होंने सिख दंगा देखा और तीसरा होगा 2020 जब लाखों की संख्या में कड़ाके की ठंड में अन्नदाता सड़कों पर आकर अपने हक के लिए आवाज उठाने लगे। उन्होंने बताया कि जब वह दिल्ली आई थी तो यमुना नदी के पास खेती बाड़ी होती थी लेकिन आधुनिक वक्त के आने के बाद सब कुछ बदल गया। फिलहाल उनकी सरकार से अपील है कि कृषि क़ानून को रद्द किया जाए और जब तक यह नहीं होता वह पूरे दमखम के साथ किसानों के समर्थन में आवाज उठाती रहेंगी।

Digiqole Ad Digiqole Ad

Aparna Vatsh

Related post