बिहार अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर उनकी हड़ताल जारी    

जूनियर डॉक्टरों की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर उनकी हड़ताल  जारी

बता दें कि बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के लगभग 1,000 जूनियर डॉक्टर कुछ दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर अड़े हुए नज़र रहे हैं। जिसका बुरा असर अब दिखने भी लगा है। डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से राज्य की चिकित्सा व्यवस्था संपूर्ण रूप से बिगड़ गई है। इसी बीच बता दें  कि उनकी मांग स्टाइपेंड बढ़ाने  को लेकर है। वहीं पीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से वहां प्रशासन की वैक्लपिक व्यवस्था नाकाफी साबित होती नज़र रही है। दरसअल आज एक 33 वर्षीय मरीज़ की इलाज के अभाव के कारण मृत्यु हो गई है।

जूनियर डॉक्टर्स

जूनियर डॉक्टरों ने कहा तीन साल पर स्टाइपेंड बढ़ाने में सरकार के निर्णय का पालन होना चाहिए

जूनियर डॉक्टरों ने साफ़ बताया कि प्रत्येक तीन साल पर स्टाइपेंड बढ़ाने में सरकार के निर्णय का पालन होना चाहिए और एक जनवरी 2020 को तीन वर्ष संपूर्ण हो चुके हैं एवं सरकार के अड़ियल रवैये को देखते हुए अब  इलाज ठप किया गया है। जूनियर डॉक्टरों ने बताया कि स्वास्थ्य प्रधान सचिव को जूनियर डॉक्टरों से मिलने का समय तक नहीं है। इसलिए उनका कहना है कि जब तक उनके स्टाइपेंड में वृद्धि नहीं की जाती है तब तक हड़ताल जारी रहने वाला है।

जूनियर डॉक्टर्स

 जैसा हमने कहा जूनियर डाक्टरों का पटना के पीएमसीएच  में लगातार धरना और प्रदर्शन जारी है। मगर अब तो इनकी हड़ताल में  इंटर्न भी शामिल हो चुके हैं। इस रविवार को देर शाम तक पटना में जूनियर डॉक्टरों ने पीएमसीएच के गेट पर कैंडल जलाकर अपनी मांगों को रखते हुए नारेबाजी कर प्रदर्शन किया


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 हड़ताली डॉक्टरों ने कहा उनकी एक ही मांग उनका स्टाइपेंड बढ़ना चाहिए

जूनियर डॉक्टरों

स्टाइपेंड बढ़ाए जाने की मांग को लेकर बिहार के समस्त मेडिकल कॉलेजों के पीजी डॉक्टर पिछले 5 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर अड़े हुए हैं और रविवार को पीजी डॉक्टरों ने कैंडल मार्च निकालकर अपना विरोध जताते हुए राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी किया एवं तत्काल मांगों को पुरे किए जाने को लेकर अपील किया।

पीजी डॉक्टरों ने बताया कि राज्य सरकार के आदेशानुसार प्रत्येक 3 वर्षों पर स्टाइपेंड बढ़ाए जाने का सरकार द्वारा आदेश जारी किया था। मगर 1 साल बीत जाने के बाद भी अभी तक स्टाइपेंड में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। डॉक्टरों ने कहा कि मरीज के हित में वे इस हड़ताल को जल्द से जल्द  खत्म करना चाहते हैं। मगर  स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से अभी तक इस विषय पर कोई भी पहल नहीं किया गया है

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